झरिया में बैठकर अमेरिका के लोगों को ठगने वाला साइबर अपराधी गिरोह का भंडाफोड़, 29 पकड़ाये
Updated at : 22 Dec 2019 8:45 AM (IST)
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धनबाद/रांची : प्रदेश में अब तक का सबसे शातिर साइबर अपराधी गिरोह झरिया के ऐना इस्लामपुर में पकड़ा गया है. यह गिरोह कॉल सेंटर की आड़ में विदेशी खासकर अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाता था. हर माह इंडियन करेंसी में कैश करीब 25 लाख रुपये कमाता था. जबकि विदेशी नागरिकों से यह ऑनलाइन डाॅलर में […]
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धनबाद/रांची : प्रदेश में अब तक का सबसे शातिर साइबर अपराधी गिरोह झरिया के ऐना इस्लामपुर में पकड़ा गया है. यह गिरोह कॉल सेंटर की आड़ में विदेशी खासकर अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाता था. हर माह इंडियन करेंसी में कैश करीब 25 लाख रुपये कमाता था.
जबकि विदेशी नागरिकों से यह ऑनलाइन डाॅलर में ठगी करता था. उस डॉलर को कोई और व्यक्ति इंडियन करेंसी में चेंज कर इन अपराधियों को नकद में पैसा मुहैया कराता था. वह व्यक्ति कौन है, उसका पता लगाया जा रहा है. गोरखधंधा करीब डेढ़ साल से चल रहा था. पुलिस ने इस सिलसिले में 29 लोगों को हिरासत में लिया है. सभी से पूछताछ की जा रही है.
गिरोह का मास्टरमाइंड झरिया कोयलांचल काे विक्रांत सिंह और ज्वाला सिंह बताया जाता है. अन्य गिरफ्तार लोगों में मासस नेता रुस्तम अंसारी का बेटा बंटी अंसारी, राणा सिंह, बिट्टू अंसारी, सुजीत सरकार, दानिश अंसारी, बादशाह अंसारी, सन्नी, वकील शामिल हैं. पुलिस ने सभी लोगों को फिलहाल धनसार थाना में रखा है. छापामारी में रांची साइबर एक्सपर्ट की टीम भी शामिल थी.
झारखंड में इस तरह के साइबर अपराध की पहली घटना
हर माह करीब 25 लाख रुपये की करते थे कमाई
रांची से साइबर डीएसपी व विशेषज्ञ पहुंचे झरिया, कर रहे जांच
कोलकाता के कॉल सेंटर में सीखे थे फर्जीवाड़ा का ट्रिक
31 कंप्यूटर, तीन दर्जन से ज्यादा मोबाइल और दो वाहन बरामद
साइबर पुलिस, धनबाद, धनसार और झरिया पुलिस ने शुक्रवार की रात दो बजे संयुक्त रूप से ऐना इस्लामपुर में रुस्तम अंसारी के गैरेज में छापामारी कर इन लोगों को गिरफ्तार किया. पुलिस ने इनके पास एक महिंद्रा की टीयूवी गाड़ी (जेएच 10बीइ 9505) एक वर्ना गाड़ी (जेएच 10बीक्यू 7007), 31 कंप्यूटर, एक लैपटॉप, व तीन दर्जन से अधिक मोबाइल बरामद किये हैं.
कोलकाता से लायी गयी थी अमेरिकी इंग्लिश बाेल ग्राहक फंसाने वाली टीम
विक्रांत और ज्वाला की टीम ज्यादातर अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाता था. इन नागरिकों को फंसाने के लिए इन दोनों ने अमेरिकन इंग्लिश अच्छे ढंग से बोलने वाले लोगों की टीम कोलकाता से झरिया स्थित अपने सेंटर पर लाया था. विक्रांत सिंह और ज्वाला सिंह पहले कोलकाता के एक कॉल सेंटर में काम करते थे. वहीं से इन लोगों ने साइबर अपराध की ट्रिक सीखी थी.
झरिया के ऐना इस्लामपुर में फर्जी कॉल सेंटर बनाकर अमेरिकी नागरिकों से साइबर फ्राड किया जा रहा था. मामले में पुलिस 29 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है. इनमें लगभग 18 लोगों की संलिप्तता सामने आयी है. और पूछताछ के बाद पूरी स्थिति स्पष्ट हो जायेगी.
किशोर कौशल, एसएसपी, धनबाद
कौन है ज्वाला सिंह
जोड़ापोखर. ज्वाला सिंह थाना क्षेत्र के शालीमार निवासी ददन सिंह का छोटा पुत्र है. स्थानीय लोग बताते हैं कि ज्वाला पिछले करीब दो वर्ष से साइबर अपराध में सक्रिय था. उसने धनबाद के बैंक मोड़ में साइबर कैफे खोल रखा है.
ज्वाला सिंह का पिता ददन सिंह ठेकेदारी और सूदखोरी का कारोबार करता है. ज्वाला ठगी जैसे जरायम की बदौलत अकूत संपत्ति कूटना चाहता था. साइबर अपराध से जुड़ने के बाद ज्वाला ज्यादातर बाहर ही रहने लगा था. पुलिस के अनुसार, ददन सिंह डिगवाडीह निवासी सचिता सिंह के हत्या मामले में उम्रकैद की सजा पाया हुआ है. फिलहाल वह उच्च न्यायालय से बेल पर है.
कैसे बनाते थे विदेशियों को निशाना
अब तक की जांच में यह बात सामने आयी है कि इस गिरोह ने वहां के लोगों का डिटेल अमेरिका की एक एजेंसी से 500 से 1000 डॉलर में ले लिया. उसमें से गिरोह ऐसे लोगों को चिह्नित करता था जो बुजुर्ग हों. इसके बाद उन्हें इंटरेक्टिव वायस रिस्पांस सिस्टम के जरिये कस्टम केयर जैसे नंबर से मैसेज भेजता था. उन्हें कहा जाता था कि आपका बैंक खाता पैसे नहीं होने के कारण बंद किया जा रहा है. कई लोग इसे स्कैम समझते थे, मगर कुछ लोग अपराधियों के चक्कर में फंस जाते थे.
इंट्रेक्टिव वायस से ही उन्हें एक टोल फ्री नंबर दिया जाता था. टोल फ्री नंबर पर जब अमेरिकी ग्राहक फोन करता तो यहां बैठे साइबर अपराधी आइपी एड्रेस जंप करवा कर टोल फ्री नंबर को अपने फोन से जोड़ लेते थे. फोन करने वाले ग्राहक को वह बताते थे कि आपका खाता बंद होने वाला है क्योंकि उसमें पैसे कम हैं.
वह फिलहाल न्यूनतम राशि बैंक की तरफ से उसमें डाल दे रहे हैं. मगर कुछ दिनों के बाद वे पैसे फिर से काट लिये जाएंगे. नहीं देने पर उन्हें जुर्माना देना पड़ेगा. जो ग्राहक इस बात पर तैयार हो जाते तो उन्हें व्यूर नामक एप का लिंक भेजा जाता. लिंक पर कनेक्ट करने के बाद साइबर अपराधी ग्राहक के मोबाइल प्रोग्रामिंग को हैक कर लेते और बदल देते.
जितने पैसे ग्राहक के खाते में पहले से थे और उसमें जितने देने की बात थी, उससे कई ज्यादा पैसे ग्राहक के बैंक खाते में दिखने लगते थे. साइबर अपराधी बिना पैसे भेजे सिर्फ प्रोग्रामिंग हैक करके उनके खाते में अधिक पैसा दिखाते थे. अधिक पैसा दिखने के बाद ग्राहक को फिर से फोन किया जाता था और कहा जाता कि गलती से उनके खाते में ज्यादा पैसा चला गया है.
इसलिए वह न्यूनतम राशि छोड़ बाकी के पैसे वापस कर दें. इसके बाद साइबर अपराधियों द्वारा ग्राहकों को एक वाउचर नंबर दिया जाता था. उसके जरिये ही ग्राहकों से डॉलर के जरिये पैसा लिया जाता था. फिर उस पैसे को इंडियन करेंसी में कनवर्ट करा, इस गिरोह के पास नकद पैसा आता था. इससे पुलिस को लग रहा है कि इस धंधे में और भी बड़ा गिरोह शामिल है. आगे की जांच में और खुलासे हो सकते हैं.
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