रांची : अधिकारियों की रिपोर्ट से नहीं लगता कि झारखंड में नक्सलवाद कम हुआ : चुनाव आयुक्त
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :22 Nov 2019 3:58 AM (IST)
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विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के बाद बोले मुख्य चुनाव आयुक्त रांची : भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा है कि राज्य में नक्सलवाद खत्म होने की कोई सूचना चुनाव आयोग को नहीं है. सरकार क्या कहती है, कोई मंत्री क्या कहता है या सदन के अंदर क्या बातें होती हैं, […]
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विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के बाद बोले मुख्य चुनाव आयुक्त
रांची : भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा है कि राज्य में नक्सलवाद खत्म होने की कोई सूचना चुनाव आयोग को नहीं है. सरकार क्या कहती है, कोई मंत्री क्या कहता है या सदन के अंदर क्या बातें होती हैं, पता नहीं.
आयोग ने झारखंड के अधिकारियों की रिपोर्ट देखी है और उनसे बातचीत की. इसके बाद ऐसा नहीं लगता कि नक्सलवाद में कोई कमी आयी है. अधिकारियों ने तो यह भी आशंका जतायी है कि चुनाव प्रक्रिया बाधित करने के लिए इस बार कोई नया तरीका इस्तेमाल में लाया जा सकता है. केंद्र सरकार भी झारखंड के 19 जिलों को नक्सलवाद प्रभावित मानती है. इनमें 13 जिले अति संवदेनशील हैं. श्री अरोड़ा झारखंड में होनेवाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के बाद गुरुवार को रांची में प्रेस से बात कर रहे थे.
बोले मुख्य चुनाव आयुक्त
अधिकारियों ने जतायी है आशंका, चुनाव प्रक्रिया बाधित करने के लिए इस बार कोई नया तरीका अपना सकते हैं नक्सली
नक्सल प्रभावित राज्य होने की वजह से ही चुनाव आयोग ने झारखंड में पांच चरणों में चुनाव कराने का लिया है फैसला
शांतिपूर्ण चुनाव की तैयारी पूरी
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि नक्सल प्रभावित राज्य होने की वजह से ही चुनाव आयोग ने पांच चरणों में चुनाव कराने का फैसला लिया है. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कड़ी निगरानी रखी जा रही है. शांतिपूर्ण चुनाव के लिए केंद्रीय पुलिस बलों की पर्याप्त संख्या में तैनाती की गयी है. झारखंड को शांतिपूर्ण, पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव के लिए बिल्कुल तैयार कर दिया गया है.
आयोग की टीम ने सुनीं राजनीतिक दलों की शिकायतें
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि चुनाव आयोग की टीम ने राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर उनकी शिकायतें सुनीं. स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए आवश्यक निर्देश दिये.
उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को अधिकतम मतदान के लिए लोगों को प्रेरित करने, धन-बल का दुरुपयोग रोकने, निर्धारित सीमा के अंदर खर्च करने देने, मतदाता सूची की त्रुटियां दूर करने, वीआइपी के साथ कार्यरत पदाधिकारियों को चुनाव ड्यूटी में नहीं लगाने, तीन साल से अधिक समय से कार्यरत पदाधिकारियों का तबादला करने, चुनाव प्रचार या रैली की समयबद्ध अनुमति देने जैसे कई बिंदुओं पर निर्देश दिया.
संवेदनशील और नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त सुरक्षा
श्री अरोड़ा ने कहा कि मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की सुविधा के लिए आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित किये गये हैं. संवेदनशील और नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त सुरक्षा के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की नियुक्ति की गयी है.
उन क्षेत्रों में मतदान बहिष्कार की संभावना के मद्देनजर जरूरी कदम उठाने के लिए कहा गया है. ट्विटर समेत सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों की निगरानी की जा रही है. आचार संहिता उल्लंघन की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की जा रही है. निर्वाची पदाधिकारियों को चुनाव प्रक्रिया को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करनेवाले एनजीओ या अन्य संस्थाओं की निगरानी के निर्देश दिये गये हैं.
कहा गया है कि चुनाव में धर्म का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. उन्होंने बताया कि एक सेंट्रल पीएसयू द्वारा आचार संहिता लगने के बाद रोजगार से संबंधित विज्ञापन प्रकाशित किया गया था. शिकायत मिलने पर आयोग के निर्देश पर पीएसयू ने नियुक्ति प्रक्रिया स्थगित कर दी है.
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