रांची : हाईकोर्ट ने पूछा, सरकार बताये, मिलावटखोरों पर क्या कार्रवाई की

Updated at : 26 Oct 2019 6:55 AM (IST)
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रांची : हाईकोर्ट ने पूछा, सरकार बताये, मिलावटखोरों पर क्या कार्रवाई की

खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर दर्ज जनहित याचिका पर हुई सुनवाई रांची : झारखंड हाइकोर्ट में शुक्रवार को दूध सहित अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. एक्टिंग चीफ जस्टिस हरीशचंद्र मिश्र और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की खंडपीठ ने राज्य में खाद्य पदार्थों में […]

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खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर दर्ज जनहित याचिका पर हुई सुनवाई
रांची : झारखंड हाइकोर्ट में शुक्रवार को दूध सहित अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. एक्टिंग चीफ जस्टिस हरीशचंद्र मिश्र और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की खंडपीठ ने राज्य में खाद्य पदार्थों में मिलावट की सही तरीके से जांच नहीं होने पर नाराजगी जतायी.
मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा कि मिलावट रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाये जा रहे हैं. मिलावटी खाद्य पदार्थ लेने के लिए लोग मजबूर हैं. स्वास्थ्य पर इसका गंभीर असर पड़ रहा है. सरकार इस मामले में गंभीर प्रतीत नहीं हो रही है. ऐसा लगता है कि मिलावटखोरों की अधिकारियों के साथ मिलीभगत है. मिलावट करनेवालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गयी है, उसकी जानकारी दें.
खंडपीठ ने कहा कि एक मोबाइल वैन व एक लेबोरेटरी के भरोसे खाद्य पदार्थों की जांच की बात हो रही है. जांच के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की जाती है. खंडपीठ ने यह भी कहा कि मिलावटखोरों पर कार्रवाई नहीं की जाती है. सड़क के किनारे मिलावटी फूड बिकते हैं. फल व सब्जियों को रंगा जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, लेकिन उसकी जांच नहीं की जाती है.
खंडपीठ ने राज्य सरकार को शपथ पत्र के माध्यम से विस्तृत जवाब दायर करने का निर्देश दिया. साथ ही पूछा कि मिलावटी खाद्य पदार्थों का सैंपल कहां से उठाया जाता है. जब्त सैंपल में गड़बड़ी पाये जाने के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई की जाती है. मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री बंद करने के लिए रोड मैप प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह के बाद होगी.
हाइकोर्ट ने राज्य सरकार को विस्तृत जवाब दायर करने का निर्देश दिया
24 फूड सेफ्टी अफसर कार्यरत, इनके सहारे जांच संभव नहीं
इससे पूर्व एमिकस क्यूरी अधिवक्ता पीयूष पोद्दार ने खंडपीठ को बताया कि लगभग 24 फूड सेफ्टी ऑफिसर कार्यरत हैं. इनके सहारे पूरे राज्य में खाद्य पदार्थों की जांच संभव नहीं है. कहीं भी फूड सैंपल जमा नहीं किया जाता है.
मिलावटी खाद्य पदार्थों की जांच के लिए प्रत्येक जिला में प्रयोगशाला होनी चाहिए. वहीं, राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि 53 फूड सेफ्टी ऑफिसरों के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया चल रही है. दुमका में एक प्रयोगशाला की स्थापना की जा रही है. उल्लेखनीय है कि दूध में मिलावट व सिंथेटिक दूध की बिक्री संबंधी ‘प्रभात खबर’ में प्रकाशित खबर को हाइकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए उसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था.
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