रांची : सिक्कों के लिए करेंसी चेस्ट खोले आरबीआइ

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68वें राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में उठा सिक्कों का मामला रांची : राज्य के सभी बैंकों की शाखाओं को हर तरह के सिक्के स्वीकार करने होंगे. कोई परेशानी है तो इसके लिए आरबीआइ अतिरिक्त करेंसी चेस्ट खोल कर बाजार में मौजूद सिक्कों के भंडारण की व्यवस्था करे. ये बातें 68वें राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति […]

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68वें राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में उठा सिक्कों का मामला
रांची : राज्य के सभी बैंकों की शाखाओं को हर तरह के सिक्के स्वीकार करने होंगे. कोई परेशानी है तो इसके लिए आरबीआइ अतिरिक्त करेंसी चेस्ट खोल कर बाजार में मौजूद सिक्कों के भंडारण की व्यवस्था करे. ये बातें 68वें राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में वित्तीय सेवाएं विभाग, वित्त मंत्रालय के संयुक्त सचिव मदनेश मिश्रा ने कही.
उन्होंने कहा कि ग्राहकों से सिक्के लेने की सलाह देने के बावजूद शिकायतें आ रही हैं. चार बार यह मामला संसद में उठ चुका है. बेहतर हो आरबीआइ इस मामले में ठोस पहल करे.
बैठक में राज्य सरकार ने मानकों के हिसाब से शिक्षा ऋण में 16 फीसदी की कमी, सीडी रेशियो में करीब 5 फीसदी की कमी, एग्रीकल्चर क्रेडिट में राष्ट्रीय बेंचमार्क के हिसाब से 18 फीसदी की कमी को लेकर चिंता जतायी. बैठक में आरबीआइ के जीएम संजीव दयाल, वित्त सचिव सह अपर मुख्य सचिव केके खंडेलवाल, योजना एवं वित्त विभाग के सचिव सत्येंद्र सिंह, सीइओ जेएसएलपीएस, एसएलबीसी के डीजीएम संजीव सरकार सहित विभागों के अधिकारी शामिल थे.
बैंकों का घाटा बढ़ा : झारखंड में 5866.98 करोड़ का ग्रास एनपीए है. लोन नहीं चुकानेवाले 1.35 लाख लोगों के ऊपर सर्टिफिकेट केस है.
अन्य पैरामीटर पर बैंकों के नतीजे
पीएमइजीपी के 7149 एकाउंट में 12743.00 करोड़ का कर्ज फंसा है किसान क्रेडिट कार्ड के 3,60,353 खातों में 1,20,450.18 करोड़ का कर्ज फंसा है प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के 4420 खातों में 72,781.50 करोड़ का कर्ज फंसा है लघु एवं सूक्ष्म उद्योग को बांटे गये लोन की राशि 24508 करोड़ रुपये है एमएसएमइ को बांटे गये लोन की राशि 26934.78 करोड़ रुपये है
बैंक खर्च नहीं रहे योजनाओं पर पैसा
बैठक में यह बात सामने आयी कि राज्य के 16 जिले ऐसे हैं जहां बैंक अनुपात के हिसाब से विकास योजनाओं पर पैसा खर्च नहीं कर रहे हैं. यहां 60 प्रतिशत की तुलना में ऋण-जमा अनुपात करीब 40 प्रतिशत ही है. बैंकों का ऋण-जमा अनुपात घटकर 56.40 हो गया है, जबकि करीब तीस जून को 59.35 प्रतिशत था.
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