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रांची : 157 की जगह 50 किलो सूजी में ही बनाया उपमा

Updated at : 24 Jun 2019 9:16 AM (IST)
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रांची : 157 की जगह 50 किलो सूजी में ही बनाया उपमा

रिम्स के मरीजों की डायट पर डाका रांची : रिम्स किचेन से मरीजों के बेड तक भोजन पहुंचानेवाली आउटसोर्सिंग एजेंसी प्राइम सर्विस मरीजों के डायट मेें कटौती कर रही है. मरीजों को नाश्ते के रूप में दिये जानेवाले उपमा के लिए 157 किलो सूजी की खपत थी, लेकिन एजेंसी ने इसे 50 किलो सूजी में […]

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रिम्स के मरीजों की डायट पर डाका
रांची : रिम्स किचेन से मरीजों के बेड तक भोजन पहुंचानेवाली आउटसोर्सिंग एजेंसी प्राइम सर्विस मरीजों के डायट मेें कटौती कर रही है. मरीजों को नाश्ते के रूप में दिये जानेवाले उपमा के लिए 157 किलो सूजी की खपत थी, लेकिन एजेंसी ने इसे 50 किलो सूजी में ही पूरा कर दिया. इसकी शिकायत उपाधीक्षक डॉ संजय कुमार के पास पहुंची है. उन्होंने जांच करायी, तो मामला सही पाया गया. उन्होंने ने एजेंसी के प्रतिनिधि को तलब किया है. साथ ही इसकी जानकारी निदेशक को भी दे दी गयी है.
रिम्स में भर्ती मरीजों को तीन वक्त का डायट मुहैया कराने की जिम्मेदारी प्राइम सर्विसेज को दी गयी है. इसके लिए एजेंसी को प्रति मरीज 100 रुपये का भुगतान किया जाता है. समय-समय पर ऐसी शिकातें मिल रही हैं कि एजेंसी मरीजों के डायट में कटौती कर रही है.
साथ ही सुबह में दिये जानेवाले नाश्ते में भी कटौती की जा रही है. यह भी पाया गया है कि 100 ग्राम कॉर्नफ्लैक्स की जगह 35 से 40 ग्राम ही कॉर्नफ्लैक्स दिया जाता है. दूध की मात्रा में भी कटौती की जाती है. इधर, एजेंसी का दावा है कि उसकी तरफ से मरीजों को पूरी डायट दी जा रही है. मरीजों के पास खाना भेजने से पहले बाकायदा प्रबंधन के अधिकारियों के सामने डायट की तौल की जाती है.
रांची : रिम्स में सीटी स्कैन जांच के लिए मरीजों को अब निजी जांच एजेंसी (सरकार द्वारा अधिकृत) हेल्थ मैप के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा. रेडियाेलॉजी विभाग को जुलाई के अंत तक नयी सीटी स्कैन मशीन उपलब्ध हो जायेगी. रिम्स निदेशक डॉ दिनेश कुमार सिंह के अनुसार निविदा प्रक्रिया पूरी कर चयनित एजेंसी को कार्यादेश दे दिया गया है. जल्द ही रेडियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ एस टोप्पो के साथ कंपनी के अधिकारी बैठक करेंगे. इसके बाद तय किया जायेगा कि मशीन के साथ क्या-क्या अन्य सुविधाएं देनी हैं. यह प्रक्रिया जुलाई के पहले सप्ताह में पूरा कर ली जायेगी, इसके बाद कंपनी रिम्स प्रबंधन को मशीन उपलब्ध करा देगी. निदेशक के अनुसार कैंसर विंग व कार्डियोलॉजी के लिए भी मशीन के खरीदारी की प्रक्रिया चल रही है.
इधर, मौजूदा समय में रिम्स के रेडियोलॉजी विभाग के पास 12 साल पुरानी सीटी स्कैन मशीन है. अत्यधिक जांच का दबाव के कारण मशीन अक्सर खराब रहती है. बताते हैं कि बीते छह माह में सीटी स्कैन मशीन दस बार से ज्यादा समय तक खराब रही.
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