झारखंड में धान का संकट, पिछले साल सूखे के कारण लक्ष्य से आधा हुआ उत्पादन

Updated at : 24 Jun 2019 7:06 AM (IST)
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झारखंड में धान का संकट, पिछले साल सूखे के कारण लक्ष्य से आधा हुआ उत्पादन

मनोज सिंह रांची : झारखंड में 2018 में बारिश कम होने के कारण धान का उत्पादन लक्ष्य के मुकाबले 42 लाख टन कम हुआ था. राज्य के कृषि विभाग ने आलोच्य वर्ष (2018) में खरीफ मौसम में 71 लाख मीट्रिक टन (एमटी) धान उत्पादन का लक्ष्य तय किया था, लेकिन मात्र 29 लाख टन धान […]

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मनोज सिंह
रांची : झारखंड में 2018 में बारिश कम होने के कारण धान का उत्पादन लक्ष्य के मुकाबले 42 लाख टन कम हुआ था. राज्य के कृषि विभाग ने आलोच्य वर्ष (2018) में खरीफ मौसम में 71 लाख मीट्रिक टन (एमटी) धान उत्पादन का लक्ष्य तय किया था, लेकिन मात्र 29 लाख टन धान का उत्पादन हुआ. कृषि विभाग ने अपने तीसरे आकलन में यह अनुमान लगाया है. अब कृषि विभाग ने 2019 के खरीफ मौसम में 86.28 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है. इसमें धान का उत्पादन लक्ष्य करीब 72 लाख टन है.
साथ ही क‍ृषि विभाग ने पिछले साल धान उत्पादन के निर्धारित लक्ष्य और प्राप्त उत्पादन में कमी को देखते हुए भी तैयारी शुरू कर दी है. इस बार अफसरों को कहा गया है कि प्रखंड स्तर तक बारिश की रिपोर्ट तैयार करें. इससे विपरीत परिस्थिति में छोटी यूनिट के हिसाब से भी क्षति का आकलन हो सकेगा.
पिछले साल 129 प्रखंडों में सूखा पड़ा : 2018 में झारखंड में करीब 1527 हजार हेक्टेयर में धान की खेती हुई थी. इस दौरान करीब 44.48 लाख एमटी खाद्यान्न (धान समेत) का उत्पादन हुआ है. जबकि पिछले साल करीब 129 प्रखंडों में सूखा पड़ने के कारण धान का उत्पादन प्रभावित हुआ था. पिछले साल मॉनसून में करीब 741 मिमी ही बारिश हुई थी, जो कि सामान्य से करीब 28 फीसदी कम थी. राज्य सरकार के आग्रह के बाद सूखे का आकलन करने के लिए केंद्रीय टीम झारखंड आयी थी. केंद्रीय टीम ने राज्य सरकार को करीब 346 करोड़ रुपये की राहत स्कीम चलाने को कहा है. इसमें 90 करोड़ राज्य सरकार को खर्च करना है, जबकि शेष राशि (256 करोड़) केंद्र सरकार के आपदा राहत कोष से दी जा रही है.
इस साल (2019) में कृषि विभाग ने करीब 72 लाख एमटी खाद्यान्न उत्पादन और करीब 1800 हजार हेक्टेयर में धान लगाने का लक्ष्य रखा है. खाद्य आपूर्ति विभाग ने पिछले साल करीब चार लाख क्विटंल धान खरीदने का लक्ष्य रखा. इसमें धान अधिप्राप्ति योजना से सरकार मात्र 2.30 लाख एमटी धान खरीद पायी. मालूम हो कि पिछले साल सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 1750 रुपये प्रति क्विंटल रखा था. इसके लिए 239 केंद्र भी बनाये गये थे.
86.28 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य : पिछले साल मॉनसून की शुरुआत में अच्छी बारिश हुई थी. मॉनसून समाप्त होने के समय कम बारिश के कारण उत्पादन पर असर पड़ा था. इस कारण तय लक्ष्य का करीब-करीब 90 फीसदी रोपा होने के बावजूद उत्पादन काफी कम हुआ. बारिश कम होने के कारण उत्पादकता भी घटी थी. 2017-18 में धान की उत्पादकता करीब 2957 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी. जो कि 2018 में घटकर करीब 1908 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रह गयी थी. कृषि विभाग ने इस बार के खरीफ मौसम में 86.28 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है. इसमें धान का उत्पादन लक्ष्य करीब 72 लाख टन है.
2018 खरीफ मौसम में अन्य फसलों आच्छादन (हजार हेक्टेयर में) और उत्पादन (लाख एमटी में)
अनाज आच्छादन उत्पादन
ज्वार 2.046 1.402
बाजरा 0.180 0.105
मक्का 255.14 476.01
रागी 14.99 13.20
अरहर 231.04 233.50
उरद 128.66 107.71
मूंग 30.455 22.77
कुलथी 17.053 11.28
मूंगफली 32.29 31.04
अरंडी 0.04 0.026
तिल 14.63 5.02
काला तिल 4.90 2.45
सोयाबीन 6.01 4.53
सूर्यमुखी 0.35 0.19
कोट
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