रांची : रिम्स ओपीडी से 1300 मरीज लौटे निजी अस्पतालों में भी मिली निराशा

Updated at : 18 Jun 2019 7:47 AM (IST)
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रांची : रिम्स ओपीडी से 1300 मरीज लौटे निजी अस्पतालों में भी मिली निराशा

राज्य के 12,000 डॉक्टरों ने किया कार्य बहिष्कार, जताया विरोध रांची : नील रतन सरकार मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (कोलकाता) के डॉक्टरों के समर्थन मेें राष्ट्रीय आइएमए द्वारा सोमवार को आहूत हड़ताल का राज्य मेेें व्यापक असर दिखा. स्टेट आइएमए व डिस्ट्रिक्ट आइएमए से जुड़े राज्य के करीब 12,000 डॉक्टरों ने कार्य बहिष्कार किया. सरकारी […]

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राज्य के 12,000 डॉक्टरों ने किया कार्य बहिष्कार, जताया विरोध
रांची : नील रतन सरकार मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (कोलकाता) के डॉक्टरों के समर्थन मेें राष्ट्रीय आइएमए द्वारा सोमवार को आहूत हड़ताल का राज्य मेेें व्यापक असर दिखा. स्टेट आइएमए व डिस्ट्रिक्ट आइएमए से जुड़े राज्य के करीब 12,000 डॉक्टरों ने कार्य बहिष्कार किया.
सरकारी व निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने अोपीडी सेवाएं पूरी तरह से ठप कर दी, जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा. सरकारी अस्पताल के अलावा निजी अस्पताल व क्लिनिक में भी उन्हें निराशा हाथ लगी. गंभीर हालत में आये मरीजों का इलाज इमरजेंसी मेेें किया गया. राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में भी हड़ताल का पूरा असर दिखा. यहां ओपीडी सेवा संचालित नहीं हुई.
इससे करीब 1300 से ज्यादा मरीज परामर्श से वंचित रह गये. यहां मरीज बिस्तर लगाकर अगले दिन के इंतजार में बैठ गये. रिम्स में इमरजेंसी सेवाएं बहाल थी. पूर्व से तय ऑपरेशन हुए और सीटी-एमआरआइ सहित सभी तरह की जांच की गयी.
लेकिन ब्लड जांच नहीं हुई. इधर, स्टेट व डिस्ट्रिक्ट आइएमए और जेडीए के डॉक्टरों ने अधीक्षक कार्यालय के प्रवेश द्वार पर धरना दिया. कोलकाता की घटना और वहां के सरकार के विरोध में नारेबाजी की गयी.
राष्ट्रीय अाह्वान पर किया गया कार्य बहिष्कार पूरी तरह सफल रहा. सरकारी और निजी अस्पताल में सेवाएं पूरी बाधित रही. लेकिन इमरजेंसी और आवश्यक सेवाएं बहाल रही. यह मरीजों के हित मेें था. कार्य बहिष्कार से राज्य मेें कहीं कोई बड़ी क्षति नहीं हुई है. कार्य बहिष्कार केे दौरान लोगों को जो असुविधा हुई है, उसके लिए हमें अफसोस है.
डॉ प्रदीप सिंह, सचिव, राज्य आइएमए
रिनपास में परेशान परिजनों का हंगामा
रांची : हड़ताल का असर रिनपास (कांके) में भी दिखा. दूर-दराज से इलाज कराने आये मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी हुई. सभी हंगामा करने लगे. मौके पर पहुंची कांके थाना की पुलिस ने लोगों को समझा कर शांत कराया.
दोपहर बाद निदेशक डॉ सुभाष सोरन को भी ओपीडी में बैठना पड़ा. उन्होंने करीब छह बजे तक मरीजों को परामर्श दिया. निदेशक के साथ चिकित्सा अधीक्षक डॉ पीके सिन्हा और डॉ सिद्धार्थ सिन्हा ने भी मरीजों को देखा. इससे पहले इंडियन साइकेट्री सोसाइटी ने भी चिकित्सकों से काम नहीं करने का आह्वान किया. इसे देखते हुए चिकित्सकों ने संस्थान के सामने प्रदर्शन भी किया. इसमें पूर्व निदेशक डॉ जयति शिमलई, डॉ अमित, डॉ भुवन, डॉ अरविंद समेत कई विद्यार्थी शामिल रहे.
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