800 घरों का मोहल्ला, जहां सारे बोरिंग फेल

Updated at : 02 Jun 2019 12:46 AM (IST)
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800 घरों का मोहल्ला, जहां सारे बोरिंग फेल

रांची : राजधानी में जल संकट दिनोंदिन विकराल रूप धारण करता जा रहा है. एक माह में करीब 10 हजार से अधिक घरों के बोरवेल सूख चुके हैं. सबसे अधिक जिन क्षेत्रों में समस्या उत्पन्न हुई है उनमें हरमू हाउसिंग कॉलोनी, हरमू बस्ती, विद्यानगर, यमुना नगर व मधुकम शामिल हैं. हालांकि, इन क्षेत्रों में कुछ […]

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रांची : राजधानी में जल संकट दिनोंदिन विकराल रूप धारण करता जा रहा है. एक माह में करीब 10 हजार से अधिक घरों के बोरवेल सूख चुके हैं. सबसे अधिक जिन क्षेत्रों में समस्या उत्पन्न हुई है उनमें हरमू हाउसिंग कॉलोनी, हरमू बस्ती, विद्यानगर, यमुना नगर व मधुकम शामिल हैं.

हालांकि, इन क्षेत्रों में कुछ घर अब भी ऐसे हैं, जिनके बोरिंग से पानी निकल रहा है. लेकिन वार्ड नं 28 में स्वर्ण जयंती नगर एक ऐसा मोहल्ला है, जहां के 800 घरों में से सभी घरों का बोरिंग एक माह पहले ही फेल हो चुका है. पानी की किल्लत को देखते हुए रांची नगर निगम द्वारा हाल ही में इस मोहल्ले में तीन जगहों पर 650, 600 व 550 फीट के तीन बोरिंग करवाये गये. लेकिन तीनों बोरिंग से एक बूंद भी पानी नहीं निकला.

दो किमी दूर से लाते हैं पानी

पानी की किल्लत होने के कारण इस मोहल्ले के अधिकतर लोग मधुकम रोड नंबर पांच के समीप नगर निगम के बनाये एचवाइडीटी जाते हैं. यहां दो घंटे तक लाइन में लगने के बाद दो बाल्टी पानी मिलती है, जिसे साइकिल पर लाद कर आते हैं.

टैंकर आया, तो हाथापाई तय

हालत यह है कि इस मोहल्ले में निगम का टैंकर जब भी पानी लेकर आता है, तो लोगों के बीच झड़प होनी तय है. कारण है कि निगम के टैंकर दो या चार हजार लीटर पानी लेकर पहुंचते हैं, लेकिन पानी भरने के लिए सैकड़ों लोग बाल्टी व डेगची लेकर पहले से ही खड़े रहते हैं. यहां लोगों के मन में डर बैठ गया है कि अगर इस बार टैंकर से पानी नहीं मिला, तो पता नहीं कब मिलेगा. नतीजतन लोग आपस में ही भीड़ जाते हैं. हालांकि हाथापाई होने के बाद भी इस बात की गारंटी नहीं है कि पानी मिल ही जाये.

अब भी नहीं जागे, तो गाेसाईं टाेली तालाब भी हो जायेगा इतिहास में दर्ज

रांची : रांची नगर निगम द्वारा पिछले साल शहर के 10 तालाबों का सौंदर्यीकरण कराया गया. तालाब के चारों ओर बाउंड्री करायी गयी, ताकि अतिक्रमण नहीं हो सके. वहीं, दूसरी ओर शहर में ऐसे भी तालाब हैं, जिन पर जमीन दलालों की नजर है. इसके तहत पहले इन तालाबों को सुखाया जाता है. फिर इन तालाबों में धीरे-धीरे मिट्टी डाल कर इस पर घर बनवा दिया जाता है. कुछ ऐसा ही हाल चुटिया के गोसाईं टोली में स्थित तालाब का है. पूर्व में जहां इस तालाब तक आने के पांच रास्ते थे, वहीं आज अतिक्रमण के कारण तालाब तक आनेवाले पांचों रास्तों पर घरों का निर्माण कर लिया गया है. हालात यह है कि इस तालाब तक जाने का कोई रास्ता ही नहीं बचा है.

रोजाना मिट्टी भर कर इस तालाब पर निर्माण कार्य किया जा रहा है, लेकिन प्रशासन व निगम की नींद नहीं खुली है. तालाब के संबंध में चुटिया विकास समिति के रवि प्रकाश टुन्ना कहते हैं कि अगर प्रशासन व निगम अभी नहीं जागा तो यह तालाब पूरी तरह से गायब हो जायेगा.

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