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रांची : क्या किसी व्यक्ति का मौलिक अधिकार स्थगित करने का अधिकार है : हाइकोर्ट

Updated at : 26 Apr 2019 8:22 AM (IST)
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रांची : क्या किसी व्यक्ति का मौलिक अधिकार स्थगित करने का अधिकार है : हाइकोर्ट

चुनाव आयोग के आदेश को निरस्त करने का मामला रांची : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत में गुरुवार को चुनाव आयोग द्वारा एडीजी अनुराग गुप्ता के राज्य से बाहर रहने संबंधी आदेश को चुनौती देनेवाली याचिका पर सुनवाई हुई. अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए माैखिक रूप से भारत निर्वाचन आयोग […]

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चुनाव आयोग के आदेश को निरस्त करने का मामला
रांची : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत में गुरुवार को चुनाव आयोग द्वारा एडीजी अनुराग गुप्ता के राज्य से बाहर रहने संबंधी आदेश को चुनौती देनेवाली याचिका पर सुनवाई हुई. अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए माैखिक रूप से भारत निर्वाचन आयोग से जानना चाहा कि क्या किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों को स्थगित किया जा सकता है.
इसका क्या प्रावधान है? इतना ही नहीं, यह भी बताया जाये कि शिकायत में दो अधिकारियों का नाम था, तो सिर्फ एक अधिकारी (प्रार्थी) के खिलाफ ही क्यों कार्रवाई की गयी है. दूसरे अधिकारी पर कार्रवाई क्यों नहीं की गयी. अदालत ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग को अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी.
इससे पूर्व प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने अदालत को बताया कि 18 मार्च को चुनाव आयोग ने आदेश जारी कर उन्हें दिल्ली के झारखंड भवन में योगदान देने तथा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी परिस्थिति में झारखंड नहीं लाैटने काे कहा था.
इसके बाद राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी की. इसमें बिना पद के झारखंड भवन में योगदान देने का आदेश दिया गया. वह पुलिस विभाग में उच्चाधिकारी हैं. इस अवधि में उन्हें किस पद पर माना जायेगा तथा सेवा इतिहास में क्या विवरण दर्ज किया जायेगा. चुनाव आयोग व राज्य सरकार की अधिसूचना से उनके माैलिक अधिकारों का हनन होता है. संविधान ने जो हमें माैलिक अधिकार दिया है, उससे उन्हें वंचित नहीं किया जा सकता है. उन्हें राज्य में जाने, परिवार से मिलने और वोट देने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है.
वे किसी मामले में दोषी नहीं हैं और न ही किसी मामले में उन्हें सजा हुई है. एक प्राथमिकी दर्ज है, जिसमें उन्हें आरोपी बनाया गया है. पूर्व में भी उपचुनाव हुआ है, लेकिन चुनाव आयोग ने कोई आदेश नहीं दिया. आयोग का आदेश सजा सुनाने जैसा है. चुनाव आयोग को इस तरह का आदेश देने का कोई अधिकार नहीं है.
राज्य सरकार की अोर से महाधिवक्ता अजीत कुमार ने पक्ष रखते हुए संविधान व जन प्रतिनिधित्व कानून, आदर्श आचार संहिता का उल्लेख करते हुए कहा कि आपराधिक मामला लंबित है. अनुसंधान जारी है.
विभागीय कार्यवाही में भी कोई अंतिम आदेश पारित नहीं हुआ है. अदालत के सवाल पर महाधिवक्ता ने कहा कि आपराधिक मामले में चार्जशीट दायर नहीं हुई है. चुनाव आयोग की ओर से अधिवक्ता डॉ अशोक कुमार सिंह ने पक्ष रखा, जो अधूरा रहा. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी एडीजी अनुराग गुप्ता ने याचिका दायर की है.
उन्होंने अपने खिलाफ चुनाव आयोग द्वारा दिये गये उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें कहा गया है कि अविलंब दिल्ली के झारखंड भवन में योगदान दें तथा चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी परिस्थिति में (बिना अनुमति) झारखंड नहीं लौटेंगे. आयोग के आदेश के आलोक में राज्य सरकार ने आदेश जारी कर अनुराग गुप्ता को दिल्ली में योगदान देने का निर्देश दिया था.
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