जनवरी तक 170 दुकानों के लाइसेंस निलंबित किये गये थे, तीन माह में राज्य की 80 दवा दुकानों का लाइसेंस निलंबित
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :13 Apr 2019 1:33 AM (IST)
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रांची : राज्य औषधि निदेशालय के निर्देश पर विभिन्न औषधि निरीक्षकों (ड्रग इंस्पेक्टर) ने गत तीन माह में राज्य भर की 80 दवा दुकानों का लाइसेंस निलंबित किया है. मार्च में रांची की दो (मेहता मेडिकल चुटिया व अोम मेडिको, ढुमसा टोली चुटिया) दुकानों का लाइसेंस सस्पेंड हुआ है. यह आंकड़ा 15 जनवरी से दो […]
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रांची : राज्य औषधि निदेशालय के निर्देश पर विभिन्न औषधि निरीक्षकों (ड्रग इंस्पेक्टर) ने गत तीन माह में राज्य भर की 80 दवा दुकानों का लाइसेंस निलंबित किया है. मार्च में रांची की दो (मेहता मेडिकल चुटिया व अोम मेडिको, ढुमसा टोली चुटिया) दुकानों का लाइसेंस सस्पेंड हुआ है. यह आंकड़ा 15 जनवरी से दो अप्रैल तक का है.
दो अप्रैल को धनबाद के उन्नत मेडिकल, रजवार बस्ती का लाइसेंस निलंबित किया गया है. वहीं इसी दिन धनबाद के ही श्री कान्हा मेडिकल, पीएमसीएच के पास कोचा टोली का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है. गौरतलब है कि इससे पहले 30 जुलाई 2018 से सात जनवरी 2019 तक पांच माह के दौरान कुल 170 लाइसेंस निलंबित किये गये थे.
उस दौरान सबसे अधिक लाइसेंस रांची जिले में निलंबित हुए थे. गौरतलब है कि ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के विभिन्न प्रावधानों के तहत दवा दुकानों को लाइसेंस जारी किया जाता है. दवा दुकानों में फार्मासिस्ट जरूरी है. बगैर फार्मासिस्ट के दवा दुकान दवाएं नहीं बेच सकते हैं.
दरअसल, दवा दुकान का लाइसेंस फार्मासिस्ट के नाम पर ही मिलता है. यही वजह है कि दुकान निरीक्षण के दौरान वहां संबंधित फार्मासिस्ट के नहीं होने पर उस दुकान का लाइसेंस निलंबित हो जाता है. इसी तरह दवाओं की खरीद, बिक्री व स्टोरेज संबंधी एक्ट के अन्य प्रावधान का उल्लंघन होने पर भी लाइसेंस निलंबित किये जाते हैं.
इनमें दवाओं का भंडारण तापमान नियंत्रण तथा रखरखाव संबंधी दिशा-निर्देश के अनुकूल न होना, संबंधित दुकान में बेची गयी दवाओं का ब्योरा उपलब्ध न होना, बगैर बिल के दवाओं की खरीद, मरीजों को दवाएं बगैर चिकित्सक की परची के देना तथा दुकान की लाइसेंस अवधि समाप्त होने के बाद समय पर इसका नवीकरण न कराना जैसे मिलते-जुलते कारणों की वजह से लाइसेंस का निलंबन होता है.
हालांकि, दवा दुकानदारों द्वारा संतोषजनक जवाब देने तथा दवा निरीक्षक की रिपोर्ट में लिखी कमी सुधार लेने के बाद लाइसेंस फिर से बहाल कर दिये जाते हैं. गंभीर मामलों में लाइसेंस रद्द कर दिये जाते हैं.
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