कर्नाटक MLC चुनाव में क्रॉस-वोटिंग से बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व नाराज, विजयेंद्र दिल्ली तलब; नहीं मिलेगी माफी

Edited by Rajneesh Anand
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बीजेपी नेतागण

Karnataka MLC elections : कर्नाटक विधान परिषद (एमएलसी) के चुनाव में कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए 7 में से 5 सीटों पर कब्जा कर लिया है. कांग्रेस की इस जीत ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है. एक ओर जहां इससे कांग्रेस को फायदा हुआ है वहीं भाजपा-जेडी(एस) गठबंधन के मतभेदों को उजागर कर दिया है.

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Karnataka MLC elections : कर्नाटक विधान परिषद (MLC) के चुनाव में क्रॉस-वोटिंग पर विधान परिषद में विपक्ष के नेता चालावाड़ी नारायणस्वामी ने कहा कि वो 11 वोट किसे मिले? कांग्रेस को. अगर कांग्रेस ऐसे 11 वोट खरीदकर जीती है, तो यह कांग्रेस के लिए डेमोक्रेसी की जीत है,लेकिन अगर कोई बीजेपी में आकर हमें वोट देता है और जीत जाता है, तो यह असंवैधानिक हो जाता है. उनकी जीत संवैधानिक है; हमारी जीत असंवैधानिक. यह क्या है? बीजेपी ने कर्नाटक में क्रॉस-वोटिंग पर कांग्रेस पर निशाना साधा है.

कर्नाटक में क्रॉस-वोटिंग से बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व नाराज

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में हुए क्रॉस-वोटिंग से बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व नाराज है. इस चुनाव में 11 विधायकों ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ वोटिंग कर उसकी हार में भूमिका निभाई. क्रॉस-वोटिंग करने वालों को माफी नहीं मिलेगी यह तय है. इसकी वजह यह है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र को तलब किया है. इसके पीछे क्रॉस-वोटिंग की वजह को तलाशना है.विजयेंद्र ने भी इस बात को स्वीकारा है कि उनकी पार्टी और जेडी(एस) के कुछ विधायकों ने पार्टी लाइन के खिलाफ मतदान किया. उन्होंने कहा है कि क्रॉस-वोटिंग करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.

11 विधायकों ने पार्टी लाइन के खिलाफ वोट किया

अबतक जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार एनडीए के 11 विधायकों ने पार्टी लाइन के खिलाफ मतदान किया. क्रॉस-वोटिंग करने वालों में बीजेपी और जेडी(एस) दोनों के विधायक हैं. क्रॉस-वोटिंग के कारण कांग्रेस 5 सीट जीतने में सफल रही. चुनाव में कांग्रेस के टिप्पन्नप्पा कमकनूर, पीवी मोहन, बीके हरिप्रसाद, शिवन्ना बीएस और विनय कार्तिक प्रकाश विजयी रहे. इनके अलावा बीजेपी के लिंगराज पाटिल और रघु आर ने जीत दर्ज की. जेडी(एस) उम्मीदवार गोविंदराजू को हार का सामना करना पड़ा. गोविंदराजू की हार ने सबसे अधिक सवाल खड़े किए हैं. जेडी(एस) के पास विधानसभा में 18 विधायक हैं और उन्हें कम से कम 18 प्रथम वरीयता वोट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें केवल 14 वोट मिले. इससे संकेत मिलता है कि कम से कम चार जेडी(एस) विधायकों ने पार्टी के खिलाफ मतदान किया. बीजेपी ने भी गोविंदराजू के समर्थन में वोट करने की अपील अपने विधायकों से की थी, लेकिन उनकी हार से यह स्पष्ट है कि रणनीति विफल रही.

कांग्रेस की विधानपरिषद में ताकत बढ़ी

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव परिणामों के बाद 75 सदस्यीय विधान परिषद में कांग्रेस की ताकत 34 से बढ़कर 39 हो गई है, जबकि भाजपा के 29 और जेडी(एस) के छह सदस्य रह गए हैं. कांग्रेस ने इसे बीजेपी और जेडी(एस) नेतृत्व के खिलाफ असंतोष का संकेत बताया है. राज्य के मंत्री प्रियंक खरगे ने कहा कि यह परिणाम विपक्षी दलों में नेतृत्व के अभाव को दर्शाता है. एनडीए में हुई क्रॉस-वोटिंग और उससे पैदा हुए राजनीतिक संकट की देश भर में चर्चा हो रही है.

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लेखक के बारे में

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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