बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने कहा- राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में प्रदर्शित करना हिंदू धर्म का अपमान
राहुल गांधी (File Photo)
Rahul Gandhi : लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी 19 जून को अपना 56वां जन्मदिन मना रहे हैं. इस अवसर पर राहुल गांधी को कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भगवान परशुराम के रूप में चित्रित कर उनकी पूजा की. इसपर बीजेपी के नेता शहजाद पूनावाला ने आपत्ति दर्ज कराई है.
Rahul Gandhi : राहुल गांधी के जन्मदिन के मौके पर कांग्रेस पार्टी ने उन्हें परशुराम के रूप में प्रदर्शित किया. राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में प्रदर्शित करने पर बीजेपी ने सख्य आपत्ति जताई और इसे हिंदू धर्म का अपमान बताया. वाराणसी में युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का 56वां जन्मदिन, गंगा नदी के किनारे उनकी तस्वीर पर दूध चढ़ाने सहित प्रतीकात्मक हिंदू रीति-रिवाजों के साथ मनाया, जिसके बाद बीजेपी की आपत्ति आई.
राहुल गांधी को एक हाथ में फरसा और दूसरे में संविधान लिये दिखाया गया
जन्मदिन के जश्न के दौरान इस्तेमाल की गई तस्वीर में राहुल को भगवान परशुराम के रूप में दर्शाया गया. तस्वीर में उनके एक हाथ में फरसा और दूसरे हाथ में संविधान की प्रति थी. बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि कांग्रेस के लिए राहुल गांधी भगवान हो सकते हैं, लेकिन हिंदुओं के लिए नहीं. जिस तरह से राहुल गांधी को भगवान विष्णु के अवतार परशुराम के रूप में दिखाया गया है, उससे पता चलता है कि वे लगातार हिंदू धर्म का अपमान कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल लगातार हिंदू परंपराओं का अपमान करते रहे हैं और अब वोट बैंक की राजनीति के लिए ऐसी हरकतें कर रहे हैं.
कांग्रेस और राहुल ने हिंदू परंपराओं का अपमान किया
शहजाद ने कहा कि राहुल गांधी ने हिंदू आतंकवाद और भगवा आतंकवाद की बात की. उन्होंने कहा कि राम मंदिर में आयोजित प्राण-प्रतिष्ठा समारोह महज नाच-गान कार्यक्रम था. उन्होंने बार-बार हिंदू परंपराओं का अपमान किया है और उन पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने भगवान राम के अस्तित्व को ही नकार दिया था. उन्होंने दावा किया कि हिंदुओं का अपमान करने का एक लंबा सिलसिला रहा है. हिंदुओं को अपशब्द कहो और वोट बैंक से वाहवाही बटोरो – यही उनकी राजनीति रही है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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