हाइकोर्ट ने खारिज की करोड़ों के घोटाले के आरोपी अभियंता की अग्रिम जमानत, पीएचइडी ने बनाया तकनीकी सलाहकार
Updated at : 04 Feb 2019 8:26 AM (IST)
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रांची : झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा स्वच्छ भारत मिशन योजना में करोड़ों रुपये के घोटाले के आरोपी अभियंता कुमार नीरज की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने के बाद भी पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने उनको रांची नागरिक अंचल में तकनीकी सलाहकार के रूप में पदस्थापित कर रखा है. कुमार नीरज पर गिरिडीह प्रमंडल एक के […]
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रांची : झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा स्वच्छ भारत मिशन योजना में करोड़ों रुपये के घोटाले के आरोपी अभियंता कुमार नीरज की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने के बाद भी पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने उनको रांची नागरिक अंचल में तकनीकी सलाहकार के रूप में पदस्थापित कर रखा है.
कुमार नीरज पर गिरिडीह प्रमंडल एक के कार्यपालक अभियंता के रूप में पदस्थापित रहते हुए सरकारी राशि गबन करने का गंभीर आरोप है. मामले में गिरिडीह उपायुक्त के निर्देश पर एफआइआर करते हुए उनको निलंबित किया गया था. हालांकि, बाद में विभागीय कार्यवाही के दौरान पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने निलंबन वापस लेते हुए उन्हें पदस्थापित कर दिया.
क्या है मामला : गिरिडीह प्रमंडल एक के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता कुमार नीरज को वित्तीय वर्ष 2016-17 में स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 8.5 हजार शौचालय निर्माण के लिए 10.64 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था. लेकिन, निर्माण के बाद तत्कालीन कार्यपालक अभियंता ने राशि का समायोजन नहीं किया.
मामले में उपायुक्त द्वारा गठित जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में इसे वित्तीय अनियमितता और सरकारी राशि के गबन का मामला करार दिया. इसके बाद गिरिडीह उपायुक्त द्वारा थाना में एफआइआर दर्ज कराया गया था. अदालत ने कुमार नीरज की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे खारिज करने का आदेश दिया है.
इधर, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में रांची नागरिक अंचल के तकनीकी सलाहकार कुमार नीरज का कहना है कि मेरे ऊपर गबन का नहीं, राशि के समायोजन का मामला चल रहा था. मैं पूरी तरह से निर्दोष हूं.
यह साबित भी हो चुका है. विभागीय जांच में मुझ पर लगे सभी आरोप गलत साबित हुए. राशि का शत-प्रतिशत समायोजन हो चुका है. स्वच्छ भारत के निदेशक ने मेरे ऊपर दर्ज मामला वापस लेने का आदेश जारी किया है.
इसकी सूचना थाने को दी जा चुकी है. मुझे एक साजिश के तहत फंसाया गया था. मेरे ऊपर मामला दर्ज कराने वाले कार्यपालक अभियंता संजय कुमार खुद दागी हैं. उन पर निगरानी समेत कई जगहों पर मामला चल रहा है. विभाग ने झूठी प्राथमिकी दर्ज करने की वजह से उन पर कार्रवाई भी की है.
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