रांची : लोकायुक्त, मानवाधिकार आयोग एसीबी ठीक से काम नहीं कर रहे

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 02 Feb 2019 1:13 AM

विज्ञापन

रांची : झारखंड हाइकोर्ट में शुक्रवार को रामगढ़ में 2013 में फर्जी टीन नंबर पर कोयले की ढुलाई कर करोड़ों रुपये के राजस्व के नुकसान पहुंचाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस अनिरुद्ध बोस व जस्टिस एचसी मिश्र की खंडपीठ ने सुनवाई के दाैरान प्रार्थी का पक्ष सुनने के बाद मामले […]

विज्ञापन

रांची : झारखंड हाइकोर्ट में शुक्रवार को रामगढ़ में 2013 में फर्जी टीन नंबर पर कोयले की ढुलाई कर करोड़ों रुपये के राजस्व के नुकसान पहुंचाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस अनिरुद्ध बोस व जस्टिस एचसी मिश्र की खंडपीठ ने सुनवाई के दाैरान प्रार्थी का पक्ष सुनने के बाद मामले को गंभीरता से लिया.

खंडपीठ ने माैखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य में लोकायुक्त, मानवाधिकार आयोग व एसीबी प्रभावी तरीके से कार्य नहीं कर रहे हैं. इन संस्थाअों को अधिकार दिया जाना चाहिए. इंफ्रास्ट्रक्चर की जो कमी है, उसे भी दूर किया जाना चाहिए.

500 ट्रक कोयले की हुई थी ढुलाई : इससे पूर्व प्रार्थी की अोर से अधिवक्ता राजीव कुमार ने खंडपीठ को बताया कि रामगढ़ में फर्जी टीन नंबर के आधार पर लगभग 500 ट्रक कोयले की ढुलाई की गयी थी. यह वाणिज्यकर पदाधिकारियों की मिलीभगत से संभव हुआ था. इससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व की क्षति पहुंचायी गयी है.

इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री को मिली थी. मुख्यमंत्री ने एसीबी से मामले की जांच कराने का आदेश दिया था. इसके बाद एसीबी ने पीइ दर्ज कर मामले की जांच आैर गड़बड़ी पायी थी. एसीबी ने निगरानी आयुक्त से मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति मांगी, लेकिन एसीबी को अनुमति नहीं दी गयी. मामले को वाणिज्य कर विभाग के सचिव के पास भेज दिया गया. सचिव ने समिति गठित की. उक्त विभागीय समिति ने तत्कालीन महाधिवक्ता से मंतव्य मंगाने की अनुशंसा की. तत्कालीन महाधिवक्ता ने मंतव्य दिया कि जांच में ऐसा कोई तथ्य नहीं मिला है कि प्राथमिकी दर्ज की जाये.

निगरानी आयुक्त ने नहीं दी प्राथमिकी की अनुमति : प्रार्थी ने यह भी कहा कि राज्य में एसीबी, लोकायुक्त व मानवाधिकार आयोग सही तरीके से कार्य नहीं कर रहे हैं. इस कारण दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है.
वहीं एसीबी की अोर से बताया गया कि मामले में निगरानी आयुक्त से प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति मांगी गयी थी, लेकिन अनुमति नहीं मिली. वहीं राज्य सरकार की अोर से बताया गया कि विभागीय समिति व महाधिवक्ता से प्राप्त मंतव्य में कहा गया कि इसमें कोई मामला नहीं बनता है. इसलिए प्राथमिकी दर्ज करने की जरूरत नहीं है. उल्लेखनीय है कि जनहित याचिका प्रार्थी झारखंड अगेंस्ट करप्शन की अोर से दायर की गयी है.
  • मामला रामगढ़ के घाटो कोलियरी में फर्जी
  • टीन नंबर पर कोयले की ढुलाई का
  • भ्रष्टाचार की जांच करनेवाली संस्थाअों को कैसे मजबूत बनाया जाये, प्रार्थी से सुझाव मांगा
  • अगली सुनवाई 15 मार्च को होगी
  • कर्नाटक व मध्य प्रदेश का उदाहरण दिया
खंडपीठ ने कहा कि लोकायुक्त कर्नाटक व लोकायुक्त मध्य प्रदेश को छापेमारी व अनुसंधान करने का अधिकार है. वहां लोकायुक्त संस्था काफी प्रभावी तरीके से कार्य करती है. झारखंड में भी भ्रष्टाचार की जांच करनेवाली संस्थाअों को मजबूत बनाया जाना चाहिए. उन्हें स्वतंत्रता मिले. इनको कैसे मजबूत बनाया जाये, इस पर खंडपीठ ने प्रार्थी को सुझाव देने को कहा.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola