रांची : बच्चों ने पीया दूध, बौद्धिक विकास व इम्यून सिस्‍टम बढ़ा

Updated at : 02 Feb 2019 1:11 AM (IST)
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रांची  :  बच्चों ने पीया दूध, बौद्धिक विकास व इम्यून सिस्‍टम बढ़ा

पांडेय, रांची : झारखंड राज्य मिल्क फेडरेशन के साथ रिम्स का पीएसएम विभाग लातेहार,चतरा और बालूमाथ के 16 स्कूल में नवंबर 2017 से शोध कार्य शुरू किया था. शोध के लिए आठ स्कूलाें के बच्चों को दूध नहीं दिया गया. वहीं आठ अन्य स्कूल के बच्चों को गिफ्ट मिल्क के तहत दूध दिया गया. एक […]

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पांडेय, रांची : झारखंड राज्य मिल्क फेडरेशन के साथ रिम्स का पीएसएम विभाग लातेहार,चतरा और बालूमाथ के 16 स्कूल में नवंबर 2017 से शोध कार्य शुरू किया था. शोध के लिए आठ स्कूलाें के बच्चों को दूध नहीं दिया गया. वहीं आठ अन्य स्कूल के बच्चों को गिफ्ट मिल्क के तहत दूध दिया गया.

एक साल से ज्यादा समय तक दूध पिलाने के बाद शोधार्थी खास नतीजे पर पहुंचे हैं. शोध में यह पाया गया है कि जिन बच्चों को दूध दिया गया, उनमें शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक विकास हुआ. शरीर में संक्रमण से लड़ने की क्षमता (इम्युनिटी) बढ़ी है. दूर दृष्टि बेहतर हुई है. आईक्यू जो पहले 14 फीसदी थी, वह बढ़ कर 20 फीसदी हो गयी है.

बच्चों की उम्र के हिसाब से लंबाई व वजन में बढ़ोतरी हुई है. बॉडी मॉस इंडेक्स (बीएमआइ) बेहतर हुआ है और एनिमिया (खून की कमी) की कमी हुई है. यह शोध 962 बच्चों पर किया गया था, जिसमें 541 बच्चे ट्राइबल थे.

इसके अलावा आठ स्कूल के उन बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की गयी तो उनके स्वास्थ्य पर कोई ज्यादा असर नहीं था. बच्चों का आइक्यू, इम्युनिटी, दूर दृष्टि व उम्र के साथ लंबाई व वजन में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई. शरीर में सिरम कैल्शियम 25 फीसदी कम मिला. शरीर में विटामिन बी-12 कम पाया गया. खून की कमी जो शोध से पहले सर्वें के दौरान जो मिला था, वैसा ही पाया गया.
तीन फीसदी ने नहीं चखा था दूध का स्वाद
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने लातेहार में गिफ्ट मिल्क प्रोग्राम का शुभारंभ किया था. इसके बाद शोध से पूर्व जब पीएसएम विभाग की टीम ने सर्वे किया था, तो पाया था कि स्कूल जाने वाले बच्चों में से तीन फीसदी बच्चों ने कभी दूध का स्वाद ही नहीं चखा था. 80 फीसदी बच्चे ऐसे थे, जो प्रतिदिन दूध नहीं पीते थे. 85 से 90 फीसदी बच्चों का बौद्धिक स्तर सही नहीं है. उनका आइक्यू 90 से कम मिला था. वहीं 80 फीसदी बच्चे एनिमिया (खून की कमी) से पीड़ित थे.
एक साल तक दूध देने के बाद किये गये शोध में काफी बदलाव देखने को मिला है. बच्चों का बौद्धिक विकास हुआ है. अगर मिड डे मिल प्रोग्राम में 200 मिलीलीटर दूध शामिल किया जाये तो इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. -डॉ विवेक कश्यप, विभागाध्यक्ष, पीएसएम
शोध के लिए मांगा और समय
रिम्स के पीएसएम विभाग ने झारखंड राज्य मिल्क फेडरेशन को रिपोर्ट सौंप दी है. रिपोर्ट में शोध के दौरान आये बिंदुआें को बताया गया है. इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शाेध के लिए कुछ और समय की जरूरत है. सरकार चाहे तो इन स्कूलाें में कुछ और समय तक शोध कार्य करा सकती है.
शोध कार्य में ये थे शामिल : शोध कार्य में डॉ विवेक कश्यप, डॉ एसबी सिंह, डॉ देवेश कुमार, डॉ चंद्रमनी कुमार, डॉ अनित कुजूर, डॉ रिषभ कुमार राणा व पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट आदि शामिल थे.
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