विशेष बातचीत : जेवीएम अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी बोले, अभी महागठबंधन की थ्योरी बनी, प्रैक्टिकल बाकी

Updated at : 20 Jan 2019 7:15 AM (IST)
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विशेष बातचीत : जेवीएम अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी बोले, अभी महागठबंधन की थ्योरी बनी, प्रैक्टिकल बाकी

आगामी लोकसभा व विधानसभा चुनाव को लेकर झारखंड में महागठबंधन का खाका तैयार हो चुका है. लोकसभा चुनाव कांग्रेस के नेतृत्व में लड़ा जायेगा. वहीं विधानसभा चुनाव का नेतृत्व हेमंत सोरेन करेंगे. 30 जनवरी तक सीट शेयरिंग पर फैसला होना है. 31 जनवरी को महागठबंधन की विधिवत घोषणा की जायेगी. पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी भी […]

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आगामी लोकसभा व विधानसभा चुनाव को लेकर झारखंड में महागठबंधन का खाका तैयार हो चुका है. लोकसभा चुनाव कांग्रेस के नेतृत्व में लड़ा जायेगा. वहीं विधानसभा चुनाव का नेतृत्व हेमंत सोरेन करेंगे. 30 जनवरी तक सीट शेयरिंग पर फैसला होना है. 31 जनवरी को महागठबंधन की विधिवत घोषणा की जायेगी. पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी भी गैर भाजपा दलों के महागठबंधन का हिस्सा बन गये हैं. यह कैसे संभव हुआ तथा इसकी चुनौतियां क्या है, इस मुद्दे पर ब्यूरो प्रमुख आनंद मोहन ने श्री मरांडी से बात की.
Qराज्य में झाविमो व झामुमो को एक साथ आना बड़ी राजनीतिक घटना मानी जा रही है. यह कैसे हुआ?
भाजपा को हराना हमारी प्राथमिकता है. राज्य हो या देश, हालात सबके सामने है. उसको देखते हुए सारी परिस्थितियां बनी है. हर कोई यही समझ रहा है कि देश का भला कैसे हो, लोकतंत्र कैसे मजबूत रहे. पिछले साढ़े चार वर्षों में कई लोकतांत्रिक संस्थाअों को कमजोर किया गया है.
न्यायपालिका हो, चुनाव अायोग हो या सीबीआइ, इन सबको कमजोर किया गया है. लोकतांत्रिक स्तंभ कमजोर हुआ है तथा देश तानाशाही की तरफ बढ़ा है. हम लोकतंत्र के सदैव पक्षधर रहे हैं. आज बाबूलाल मरांडी जहां खड़ा है, जो दिख रहा है, वह डेमोक्रेसी की बदौलत है. इस विकट परिस्थिति में बहुत कुछ सोचने का समय नहीं है.
आज भाईचारा पर आघात हुआ है, देश में लोगों के बीच दूरियां बढ़ी है. मॉब लिंचिंग जैसे प्रायोजित काम हो रहे हैं. पीएम मोदी ने कहा था- न खाऊंगा ना खाने दूंगा. पर देश को कुशासन व भ्रष्टाचार ने बरबाद कर दिया. काला धन नहीं आया. भाजपा मां-बेटे को गाली देकर अपने सारे पाप छिपा रही है.
Qमतलब आपने हेमंत का नेतृत्व देश की परिस्थितियों का कारण मान लिया है?
अभी महागठबंधन की थ्योरी सामने आयी है. प्रैक्टिकल बाकी है…….
Qयानी अभी कुछ मामला साफ होना बाकी है?
मैं ऐसा कुछ नहीं कह रहा. मेरी बात समझें.
Qयानी हेमंत सोरेन परिस्थितियों के कारण नेतृत्व संभाल रहे हैं?
मैंने इस संदर्भ में यह नहीं कहा है. मैं देश की परिस्थितियों के बारे में बोल रहा हूं. देश की परिस्थितियां अनुकूल नहीं है. अौर यह कोई दल नहीं, बल्कि जनता की मांग है कि हम साथ आयें. जनता का मूड है कि भाजपा को शासन से बाहर किया जाये.
Qमहागठबंधन का खाका कब तक सामने आयेगा?
अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. सीटों का बंटवारा होना बाकी है. अौर यह अहम है. नेतृत्वकर्ता को बड़ा दिल दिखाना होगा. बिहार में जब लालू-नीतीश का गठबंधन हो रहा था अौर नीतीश नेता तय हुए.
तब नीतीश ने बड़ा दिल दिखाया. अब मोदी को देश का प्रधानमंत्री बनना है अौर वह नीतीश कुमार के साथ समझौता कर रहे हैं, अपनी जीती हुई सीटें उन्हें दे रहे हैं. ऐसे में नेतृत्वकर्ता की जवाबदेही बढ़ जाती है.
लोकसभा में आपकी कितनी सीटों की दावेदारी है?
यह अभी नहीं कहा जा सकता. इस मुद्दे पर जब बैठेंगे तो बातें होगी.
सीट बंटवारे का आधार क्या होगा?
जीत की संभावना पर ही सीट बांटी जानी चाहिए. उसका आधार संख्या न हो. कौन कहां से जीत सकता है, जीतने की क्या संभावना है, यह सब देखना होगा.
महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर बहुत पेंच है क्या?
यह मामला सुलझ जाना चाहिए.
मैंने गुरुजी को राज्य सभा भेजा था
बातचीत के क्रम में बाबूलाल जी ने कहा कि राज व लोक हित के मामले में मैंने किसी से कभी परहेज नहीं किया. मैंने मुद्दों की राजनीति की है.
जब मैं भाजपा में था, तब शिबू सोरेन को राज्यसभा भेजा था. मैंने उन्हें दुमका में शिकस्त दी थी, केंद्र में मंत्री बना. जब मैं मुख्यमंत्री बना, तो मैंने अटलजी से बात की. उन्हें बताया कि शिबू सोरेन जुझारू नेता है. उन्होंने झारखंड के लिए लड़ाई लड़ी है. इनको राज्यसभा जाना चाहिए. अटल जी मेरी बात से सहमत हुए. उन्होंने कहा कि आप जैसा उचित समझते हैं करें. मैंने जीवन में एेसा राजनीतिक चरित्र रखा है.
कॉमन मेनिफेस्टो (घोषणा पत्र) बने
श्री मरांडी ने कहा कि गठबंधन का स्वरूप जब तय हो जाये, तो उसके बाद मुद्दों पर बात होनी चाहिए. हम राज्य को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं, यह तय होनी चाहिए. हमारा लक्ष्य क्या होगा, यह पहले साफ हो. महागठबंधन का कॉमन एजेंडा बनना चाहिए.
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