बकोरिया कांड :सीबीआइ ने लिया सीआइडी से दस्तावेज
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 29 Nov 2018 7:30 AM
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रांची : बकोरिया कांड की जांच के लिए नयी दिल्ली से बुधवार को सीबीआइ की टीम रांची पहुंची. टीम का नेतृत्व जांच अधिकारी केके सिंह कर रहे हैं. सीबीआइ के पदाधिकारियों ने सीआइडी से बकोरिया कांड से जुड़े दस्तावेज ले लिया. सीबीआइ की टीम जल्द ही बकोरिया जायेगी. सीबीआइ के कुछ वरीय अधिकारी गुरुवार को […]
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रांची : बकोरिया कांड की जांच के लिए नयी दिल्ली से बुधवार को सीबीआइ की टीम रांची पहुंची. टीम का नेतृत्व जांच अधिकारी केके सिंह कर रहे हैं.
सीबीआइ के पदाधिकारियों ने सीआइडी से बकोरिया कांड से जुड़े दस्तावेज ले लिया. सीबीआइ की टीम जल्द ही बकोरिया जायेगी. सीबीआइ के कुछ वरीय अधिकारी गुरुवार को रांची पहुंचेंगे. हाइकोर्ट के आदेश के आलोक में सीबीआइ दिल्ली की विशेष अपराध शाखा ने 19 नवंबर 2018 को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी. हाइकोर्ट ने जवाहर यादव बनाम राज्य सरकार मामले की सुनवाई के बाद बकोरिया कांड की जांच सीबीआइ से कराने का आदेश दिया था.
22 अक्तूबर 2018 को दिये गये आदेश के आलोक में सीबीआइ दिल्ली की विशेष शाखा ने पलामू सदर थाने में दर्ज प्राथमिकी संख्या 349/2015 के तथ्यों को कांड संख्या आरसी-4(एस)/ 2018 के रूप में दर्ज किया. प्राथमिकी में मृतक उदय यादव (पिता-जवाहर यादव, मनिका, लातेहार), एजाज अहमद (पिता सिद्दिक मियां, प्रतापपुर, चतरा), योगेश यादव (पिता लखन यादव, प्रतापपुर, चतरा) सहित नौ लोगों को अभियुक्त बनाया. सभी के खिलाफ 147,148,149,353,307 आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-बी)ए/26/27/35, एक्सप्लोसिव सबस्टांस एक्ट की धारा 4/5 और 17 सीएलए एक्ट के तहत आरोपी बनाया है.
बकोरिया कांड एक नजर में
आठ जून 2015 को पलामू जिले के सतबरवा ओपी क्षेत्र के बकोरिया में हुए नक्सलियों के साथ कथित मुठभेड़ में दो उग्रवादी सहित 12 लोग मारे गये थे.
इस मामले में पलामू सदर थाने में नौ जून 2015 को प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. राज्य सरकार ने बाद में इस मामले की जांच सीआइडी को सौंप दी थी. सीआइडी जांच में उदय यादव, योगेश यादव, एजाज अहमद,अमलेश यादव, देवराज उर्फ अनुराग जी, संतोष यादव, नीरज यादव, बुधम उरांव, महेंद्र सिंह, सत्येंद्र परहिया, प्रदीप तिर्की व उमेश सिंह उर्फ उमेश खरवार के मारे जाने की पुष्टि की गयी थी. सीआइडी ने इस मामले में कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की थी. इसमें दावा किया गया था कि सभी मृतक उग्रवादी हैं और उनका आपराधिक इतिहास है.
विधि विज्ञान प्रयोगशाला ने तीन के हाथ में बारूद के गंध पाये जाने की पुष्टि की थी. उग्रवादियों के पास से मिले हथियार से फायरिंग की पुष्टि की गयी थी. प्रयोगशाला ने उग्रवादियों द्वारा इस्तेमाल किये गये स्कार्पियो पर 7.62 एमएम, 5.56 एमएम और 0.303 कैलिबर राइफल से गोली लगे होने की भी पुष्टि की थी.
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