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रांची : पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों को लागू कराने के लिए राजभवन के समक्ष दिया धरना, बोला हल्ला

Updated at : 22 Nov 2018 8:24 AM (IST)
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रांची : पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों को लागू कराने के लिए राजभवन के समक्ष दिया धरना, बोला हल्ला

जन आंदोलनों के संयुक्त मोर्चा ने दिखायी एकजुटता, राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा हमारी लड़ाई उस व्यवस्था से है, जो यहां के लोगों के खिलाफ है: दयामनी बारला जिस मकसद से राज्य का गठन हुआ था, वह पूरा नहीं हो सका: ललित मुर्मू रांची : झारखंड में पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों को सख्ती से लागू […]

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जन आंदोलनों के संयुक्त मोर्चा ने दिखायी एकजुटता, राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा
हमारी लड़ाई उस व्यवस्था से है, जो यहां के लोगों के खिलाफ है: दयामनी बारला
जिस मकसद से राज्य का गठन हुआ था, वह पूरा नहीं हो सका: ललित मुर्मू
रांची : झारखंड में पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों को सख्ती से लागू कराने के लिए और विभिन्न परियोजनाओं से होने वाले विस्थापन के खिलाफ जन आंदोलनों के संयुक्त मोर्चा ने बुधवार को राजभवन के समक्ष धरना दिया़ लोगों ने अपने विचार रखे.
साथ ही राज्यपाल के नाम ज्ञापन भी सौंपा़ महिला नेत्री दयामनि बारला ने कहा कि हमारी लड़ाई उस व्यवस्था से है, जो यहां के लोगों के खिलाफ है़ पांचवी अनुसूची का अर्थ सबको भोजन, शुद्ध हवा, पानी, शिक्षा और सम्मान है़ कानून व संवैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन से लोग आक्रोशित है़ं यह आक्रोश वीर बिरसा मुंडा, सिदो कान्हू के आक्रोश की तरह सही-गलत के फर्क के साथ होना चाहिए़
जेरोम जेराल्ड कुजूर ने कहा कि ग्राम सभा के अधिकारों का हनन किया जा रहा है़
पांचवी अनुसूची, सुप्रीम कोर्ट के समता जजमेंट, पेसा कानून, सीएनटी- एसपीटी एक्ट और अन्य प्रावधानों का सख्ती से अनुपालन होना चाहिए़ निरंजन जोजोवार ने कहा कि सरकार के कदम यही बताते हैं कि वह चाहती है कि यहां के लोग भूमिहीन, बुद्धिहीन हो जाये़ं यदि 2019 में भाजपा सरकार फिर से आ गयी, तो यह देश हिंदू राष्ट्र बन जायेगा़ ललित मुर्मू ने कहा कि जिस मकसद से राज्य का गठन हुआ था, सरकार उन्हें दफना रही है़ यहां पांचवीं अनुसूची का अनुपालन इसलिए नहीं किया जा रहा है क्योंकि एक सिंडिकेट जल, जंगल, जमीन की लूट करना चाहता है़ आदिवासियों को हिंदू बताते हुए उनकी आबादी कम दिखायी जाती है़
सारा षड्यंत्र इसलिए है ताकि झारखंड ट्राइबल स्टेट न बने़ केडी सिंह ने कहा कि राज्यपाल को अपने विशेषाधिकारों का प्रयोग करना चाहिए़ सभी वामदल जन आंदोलनों के संयुक्त मोर्चा के साथ है़ं इसके अतिरिक्त मौके पर पीसी मुर्मू, बहादुर उरांव, गोपीकांत बख्शी, डेमका सोय, कुमार चंद्र मार्डी, लगु टाइगर, ऑल्फ्रेड एक्का, जेरोम जेराल्ड कुजूर, मिथिलेश डांगी व अन्य ने भी विचार रखे़फादर स्टेन स्वामी, विनोद कुमार, आकाश रंजन, शिवशरण मिश्रा, लक्ष्मीनारायण गोप व अन्य मौजूद थे़
विस्थापित करने के बाद सुधि नहीं लेती सरकार
धरना के दौरान बताया गया कि गैर सरकारी आंकड़ों के अनुसार 15,03,017 लोग विस्थापित हुए हैं, जिसमें 6,20,327 आदिवासी, 2,12,892 एससी व 6,69,753 अन्य वर्ग के लोग है़ं विस्थापित करने के बाद सरकार ने इसकी सुधि नहीं ली़ 1951 से 1995 के बीच इनसे खनिज खनन के लिए 5,15124़59 एकड़, मध्यम व छोटी सिंचाई परियोजनाओं के लिए 5,07,952 एकड़, औद्योगिक इकाइयों के लिए 1,75,730़ 18 एकड़, थर्मल पावर स्टेशन के लिए 6,026़87 एकड़, रक्षा मामलों के लिए 1,12,289़11 एकड़, राष्ट्रीय पार्क व अभयारण्य के लिए 5,05,238़ 50 एकड़ व अन्य परियोजनाओं के लिए 2,28,824़ 29 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया है़
क्या है ज्ञापन में
ज्ञापन में मांग की गयी है कि पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जाये, सीएनटी व एसपीटी एक्ट सख्ती से लागू हो़ गैर मजरुआ आम, गैर मजरुआ खास, जंगल- झाड़ी, सरना-मसना, अखड़ा सहित सभी तरह के सामुदायिक जमीन को भूमि बैंक से मुक्त किया जाये़ भूमि सुधार के तहत जिन किसानों को गैर मजरुआ खास जमीन का हिस्सा बंदोबस्त किया गया है, उसे रद्द न किया जाये़
जमीन अधिग्रहण से पहले गांव सभा की इजाजत लेनी होगी़ नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज की अधिसूचना रद्द की जाये़ व्याघ्र परियाेजना के नाम पर विस्थापन बंद हो़ प्रस्तावित वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर को रद्द किया जाये़ नेतरहाट में बॉक्साइट खनन को बंद किया जाये़ भूमि अधिग्रहण कानून 2017 को रद्द किया जाये़ ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोकने के लिए मनरेगा मजदूरी दर 500 रुपये की जाये़
वर्तमान स्थानीयता नीति खारिज की जाये और 1932 के खतियान को अाधार बनाया जाये़ पंचायत, प्रखंड व जिला मुख्यालयों में स्थानीय बेरोजगार युवाओं को नौकरी दी जाये़ ट्राइबल सब प्लान का पैसा डाइवर्ट न हो़ सामाजिक कार्यकर्ताओं पर दर्ज देशद्रोह का मामला वापस लिया जाये, सरना कोड लागू हो़ कोल्हान अधीक्षक की नियुक्ति की जाये और मानकी- मुंडाओं को लगान रसीद उपलब्ध करायी जाये़
ये संगठन थे शामिल
आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच, केंद्रीय जन संघर्ष समिति लातेहार- गुमला, कोयलकारो जन संगठन बसिया- कोयल क्षेत्र, आजादी बचाओ आंदोलन बड़कागांव, आजादी बचाओ आंदोलन गोड्डा, मानकी मुंडा संघ कोल्हान, विस्थापित मुक्ति वाहिनी चांडिल, तजना डैम प्रभावित संघर्ष समिति, जबड़ा डैम प्रभावित संघर्ष समिति, पड़हा राजा और खूंटी- गुमला- रांची क्षेत्र.
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