बकोरिया मुठभेड़ में 12 की हुई थी मौत, सीबीआइ दिल्ली करेगी जांच, दर्ज की प्राथमिकी

Updated at : 21 Nov 2018 7:06 AM (IST)
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बकोरिया मुठभेड़ में 12 की हुई थी मौत, सीबीआइ दिल्ली करेगी जांच, दर्ज की प्राथमिकी

रांची : पलामू जिले के सतबरवा ओपी क्षेत्र में हुए बकोरिया कांड की जांच सीबीआइ दिल्ली करेगी. आठ जून 2017 को हुए कथित पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में 12 लोगों की हुई मौत मामले में सीबीआइ दिल्ली स्थित स्पेशल सेल-1 ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है. इसमें उदय यादव, एजाज अहमद व योगेश यादव सहित नौ अज्ञात […]

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रांची : पलामू जिले के सतबरवा ओपी क्षेत्र में हुए बकोरिया कांड की जांच सीबीआइ दिल्ली करेगी. आठ जून 2017 को हुए कथित पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में 12 लोगों की हुई मौत मामले में सीबीआइ दिल्ली स्थित स्पेशल सेल-1 ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है. इसमें उदय यादव, एजाज अहमद व योगेश यादव सहित नौ अज्ञात व अन्य को आरोपी बनाया गया है.
हाइकोर्ट के आदेश पर पूर्व मेंं घटना को लेकर पलामू के सदर थाना में नौ जून 2015 को दर्ज कांड सं 349/2015 को सीबीआइ ने टेकओवर कर नयी प्राथमिकी सं आरसी/एसआइ 2018/एस/0004 दर्ज की है. आरोपियों पर धारा 147/148/149/353/307 व 25(1-ए)/25(1-बी)ए/26(1)(2)/27(1)(2)/35 आर्म्स एक्ट के अलावा 17 सीएलए एक्ट व 4/5 विस्फोटक एक्ट की धाराएं लगायीगयी हैं.
मामले का अनुसंधानकर्ता डीएसपी केके सिंह को बनाया गया है. प्राथमिकी दर्ज करने को लेकर सीबीआइ मुख्यालय ने सीआइडी से पलामू के सदर थाना में दर्ज एफआइआर की सर्टिफाइड की कॉपी मांगी थी. लेकिन कॉपी नहीं मिलने पर एजेंसी ने अपने स्तर से एफआइआर की सर्टिफाइड कॉपी प्राप्त कर प्राथमिकी दर्ज की. बता दें कि पलामू पुलिस के बाद मामले की जांच सीआइडी ने टेकओवर किया था.
करीब ढाई साल मामले की जांच के बाद जून 2018 में सीआइडी ने मुठभेड़ को सही बताते हुए पलामू कोर्ट में अंतिम जांच प्रतिवेदन दाखिल कर दिया था. बता दें कि हाइकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का प्रयास कुछ आला पुलिस अधिकारियों ने किया था. दिल्ली में स्टेट काउंसिल से रायशुमारी भी की गयी थी. हालांकि डीजीपी के अनुरोध पर हुई चर्चा में सीएम ने सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्देश नहीं दिया था.
हाइकोर्ट का क्या था आदेश :
कोर्ट ने 22 अक्तूबर को अपने आदेश में कहा था कि राज्य की पुलिस और सीआइडी जैसी जांच एजेंसियों पर से लोगों का विश्वास डिग रहा है. उस विश्वास को कायम करने, उसे वापस लाने के लिए मामले की स्वतंत्र जांच जरूरी है.
इसलिए मामले की जांच सीबीआइ को सौंपी जाती है. झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय ने प्रार्थी जवाहर यादव की क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया था. उन्होंने सीबीआइ को जांच शीघ्र पूरी कर रिपोर्ट हाइकोर्ट को सौंपने का आदेश दिया था.
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