रांची : 135 बीएलओ व चार पर्यवेक्षकों को नोटिस

Updated at : 09 Sep 2018 9:34 AM (IST)
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रांची : 135 बीएलओ व चार पर्यवेक्षकों को नोटिस

रांची : 65 कांके एवं 62 खिजरी विधानसभा के बीएलओ एवं पर्यवेक्षकों की बैठक शनिवार को समाहरणालय में हुई. सहायक निर्वाचक निबंधन 65 कांके एवं सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी 62 खिजरी ने बैठक की. बैठक में अनुपस्थित रहे 135 बीएलओ व चार पर्यवेक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. इनमें कांके विधानसभा के 87 […]

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रांची : 65 कांके एवं 62 खिजरी विधानसभा के बीएलओ एवं पर्यवेक्षकों की बैठक शनिवार को समाहरणालय में हुई. सहायक निर्वाचक निबंधन 65 कांके एवं सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी 62 खिजरी ने बैठक की. बैठक में अनुपस्थित रहे 135 बीएलओ व चार पर्यवेक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. इनमें कांके विधानसभा के 87 बीएलओ व दो पर्यवेक्षक तथा खिजरी विधानसभा के 48 बीएलओ व दो पर्यवेक्षक शामिल हैं.
मालूम हो कि नौ व 23 सितंबर को आमसभा होगी. वहीं, 16 सितंबर व सात अक्तूबर को मतदान केंद्र में सभी बीएलओ को बैठक कर दावा आपत्ति प्राप्त करने का निर्देश दिया गया. जो बीएलओ अनुपस्थित पाये जायेंगे उनका वेतन अगले आदेश तक के लिये रोक दिया जायेगा.
नया कार्ड बनाने के नाम पर मांगा था पैसा, निलंबित
रांची़ नया राशन कार्ड बनाने व नाम जोड़ने के नाम पर पैसा मांगने का मामला सामने आने के बाद जिला आपूर्ति पदाधिकारी नरेंद्र गुप्ता ने कांके प्रखंड स्थित सुकुरहुट्टू के डीलर बनु महतो व तमाड़ की दुर्गा महिला समिति उलीलोहार को निलंबित कर दिया है. दोनों राशन डीलरों के खिलाफ पैसे मांगने की शिकायत मिली थी. साथ ही इस मामले को मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र में भी उठाया गया था.
श्री गुप्ता के मुताबिक जो शिकायत मिली थी उसमें कहा गया था कि सभी कार्डधारियों से नया कार्ड बनाने के नाम पर 1200 रुपये की मांग की जा रही है.
इस संबंध में स्थानीय मुखिया ने भी शिकायत की है. वहीं, तमाड़ की दुर्गा महिला समिति उलीलोहार ने राशन कार्ड में नया नाम जोड़ने के लिए 500 रुपये की मांग की थी. जिला आपूर्ति पदाधिकारी ने दोनों डीलरों से एक सप्ताह में स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है. साथ ही इस मामले की जांच पंचायत निगरानी समिति के अध्यक्ष व अन्य जनप्रतिनिधियों को करने का निर्देश दिया है. यह भी निर्देश दिया है कि डीलर के यहां स्वीकृत नये राशन कार्डधारियों से लिखित बयान प्राप्त कर एक सप्ताह अंदर प्रतिवेदन कार्यालय को सौंपे. साथ ही राशन डीलरों से यह पूछा गया है कि क्यों न आपकी अनुज्ञप्ति रद्द कर दी जाये.
लाह किसानों को आर्थिक मजबूती दे रही हैं वंदना राय
ग्रामीण महिलाओं को अक्सर कमतर आंका जाता है. गांवों में संभावनाओं के बंद द्वार उनका हुनर सामने नहीं आने देते. उनकी काबिलियत घर की देहरी से बाहर नहीं निकल पाती है. जेएसएलपीएस (झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी) के मार्गदर्शन में ग्रामीण महिलाएं न सिर्फ खुद की जिंदगी बदल रही हैं, बल्कि अपने परिवार का बेहतर पालन-पोषण करने के साथ-साथ समाज की अन्य महिलाओं को भी हुनरमंद बनाते हुए स्वावलंबी बना रही हैं. ऐसी ही कुछ महिलाओं से आपको रूबरू कराने के लिए हम शुरू कर रहे हैं यह शृंखला.
रांची : आजीविका वनोपज मित्र वंदना राय गुमला जिले के भरनो प्रखंड अंतर्गत बंगरू गांव की महिला किसानों को वैज्ञानिक तरीके से लाह की खेती का गुर सीखा रही हैं. इनके कुशल मार्गदर्शन में महिला किसानों की मेहनत रंग लायी. लाह उत्पादन में बढ़ोतरी से महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है.
बुक कीपर से आजीविका वनोपज मित्र : दिसंबर 2016 में वंदना राय झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी से जुड़ीं. बुक कीपर के रूप में काम करने लगीं. इस काम के लिए हर
महीने सौ रुपये प्रोत्साहन राशि भी मिलने लगी. इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा. सही तरीके से बुक कीपिंग का काम करने के करीब आठ महीने बाद वह आजीविका वनोपज मित्र बनीं.
70 महिला किसानों को सीखा रही हैं लाह उत्पादन का गुर : जुलाई 2017 से वंदना महिलाओं को लाह उत्पादन के वैज्ञानिक तरीके सीखा रही हैं. करीब 10 महिला समूहों के 70 महिला किसानों को लाह उत्पादन की बारीकी सिखायी जा रही है.
लाह से बढ़ी आमदनी : बुंगरू गांव में करीब 150 लाह के पेड़ हैं. महिला लाह किसानों को बेर, कुसुम और पलाश पर लाह लगाने की जानकारी दी जाती है.
पहले गांव में लाह का अच्छा उत्पादन नहीं होता था. इससे महिलाओं को अच्छे उत्पादन को लेकर भरोसा नहीं हुआ. पर, धीरे-धीरे वैज्ञानिक तरीके से खेती करने का भरोसा दिलाया. भरोसा हुआ, तो उसका असर भी दिखा. पहले जहां एक पेड़ से पांच किलो लाह मिलता था, अब 20 किलो तक मिलने लगा. इससे ग्रामीण महिलाओं की आमदनी बढ़ने लगी.
कुसमी लाह का अधिक उत्पादन : गांव में कुसमी लाह का अधिक उत्पादन होता है. यह अच्छी गुणवत्ता वाला होता है. महंगा भी होता है. इस कारण महिला किसानों को अच्छी कीमत भी मिल जाती है. इस लाह से महिला किसानों की जिंदगी में काफी बदलाव आया है.
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