रांची : सुप्रीम कोर्ट व प्रशासन के निर्देशों का पालन नहीं करनेवाले स्कूलों की मान्यता होगी रद्द
Updated at : 04 Sep 2018 7:55 AM (IST)
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कार्रवाई से पूर्व 15 दिनों की दी जायेगी मोहलत रांची : जिले के स्कूलों पर शिकंजा कसने के लिए इस बार जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है. यहां के स्कूलों को बार-बार निर्देश दिये जाने के बावजूद उसका अनुपालन नहीं करने पर जिला प्रशासन ने संबंधित स्कूलों की मान्यता रद्द कराने की अनुशंसा तक […]
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कार्रवाई से पूर्व 15 दिनों की दी जायेगी मोहलत
रांची : जिले के स्कूलों पर शिकंजा कसने के लिए इस बार जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है. यहां के स्कूलों को बार-बार निर्देश दिये जाने के बावजूद उसका अनुपालन नहीं करने पर जिला प्रशासन ने संबंधित स्कूलों की मान्यता रद्द कराने की अनुशंसा तक करने का निर्णय लिया है.
जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट और जिला प्रशासन के निर्देशों का पालन नहीं करनेवाले स्कूलों पर कार्रवाई करने के पूर्व उन्हें 15 दिनों का समय दिया जायेगा, ताकि समय रहते कमियां दूर कर लें. इसके बाद भी कमियां दूर नहीं की गयीं, तो उनके खिलाफ सीबीएसइ व आइसीएसइ बोर्ड से मान्यता रद्द करने की अनुशंसा की जायेगी. जिला प्रशासन ने ऐसे स्कूलों को शीघ्र ही नोटिस करने का निर्णय लिया है.
बताया जाता है कि जिला प्रशासन ने पिछले दिनों 70 स्कूलों की जांच की. इसमें पाया गया कि प्रशासन की रोक के बावजूद डेवलपमेंट अौर मेडिकल सहित अन्य मद में भारी शुल्क लिये जा रहे हैं.
स्कूलों में एनसीइआरटी के साथ-साथ कई अन्य पुस्तकें खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव बनाया जा रहा है. स्कूलों में पर्याप्त मात्रा में सीसीटीवी नहीं हैं.
स्कूलों की जांच के लिए बनी जिला प्रशासन की टीम ने अपनी रिपोर्ट उपायुक्त को सौंप दी है. जिला प्रशासन ने तय किया है कि बसों में निर्देशों का पालन नहीं किया गया, तो अब स्कूल प्रबंधन के साथ-साथ बस अॉपरेटर के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी जायेगी. जांच टीम के अनुसार बस में सीसीटीवी नहीं पाये गये हैं. इसके अलावा प्राथमिक उपचार बॉक्स भी सही नहीं पाये गये.
क्षमता से अधिक बच्चे बसों में बैठाये जा रहे हैं. बसों की सीट भी मानकों के अनुरूप नहीं हैं. कई स्कूल बसों में ड्राइवर और सह चालक के नंबर भी अंकित नहीं हैं. उनका पुलिस सत्यापन भी नहीं कराया गया. इधर, जिला प्रशासन ने पुन: स्कूल बसों का जांच अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है.
जिला प्रशासन को बसों में मुख्य रूप से इमरजेंसी गेट की व्यवस्था, स्पीड गवर्नर लगा है या नहीं, बसों में सीसीटीवी है या नहीं, बस के सहचालक का नाम-पता, ड्राइवर, खलासी के पुलिस सत्यापन की रिपोर्ट है या नहीं, परिवहन विभाग का हेल्पलाइन नंबर, अग्निशमन यंत्र की अवधि, बस के अंदर अलार्म बेल है या नहीं आदि की जांच करना है.
स्कूलों को पाठ्यक्रम वेबसाइट पर अपलोड करने के लिए कहा गया है. विद्यार्थियों से सिर्फ शिक्षण शुल्क व बस फीस लेने हैं. पुस्तकें खरीदने के लिए दबाव नहीं देना है. नामांकित बच्चों की संख्या साइट पर अपलोड करनी है. सभी कक्षा में सीसीटीवी लगाने हैं. बस के कर्मचारियों के लिए अलग व्यवस्था करनी है.
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