जपला सीमेंट फैक्ट्री को फिर से चालू कराने की मांग के साथ MLA शिवपूजन आमरण अनशन पर

रांची : हुसैनाबाद विधानसभा क्षेत्र के बसपा विधायक कुशवाहा शिवपूजन मेहता विधानसभा मुख्य द्वार पर मंगलवार से आमरण अनशन कर रहे हैं. जपला सीमेंट फैक्ट्री को फिर से चालू कराने की मांग और एससी/एसटी/ओबीसी की आरक्षण सीमा को 50 फीसदी से 73 फीसदी करने की मांग के साथ विधायक ने आज से आमरण अनशन की […]
रांची : हुसैनाबाद विधानसभा क्षेत्र के बसपा विधायक कुशवाहा शिवपूजन मेहता विधानसभा मुख्य द्वार पर मंगलवार से आमरण अनशन कर रहे हैं. जपला सीमेंट फैक्ट्री को फिर से चालू कराने की मांग और एससी/एसटी/ओबीसी की आरक्षण सीमा को 50 फीसदी से 73 फीसदी करने की मांग के साथ विधायक ने आज से आमरण अनशन की शुरुआत की.
विधायक का आरोप है कि पूर्व में उनके द्वारा जपला सीमेंट फैक्ट्री को फिर से चालू कराने की मांग की गयी थी. इसपर सूबे के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सदन में आश्वासन दिया था. आश्वासन के सालभर बाद भी कोई काम नहीं हुआ. यहांतक कि मुख्यमंत्री ने आम मंच से भी सीमेंट फैक्ट्री को शुरू कराने की बात कही है.
अनशन शुरू करते ही सीएम रघुवर दास विधायक से मिलने अनशन स्थल पर पहुंचे और जपला सीमेंट फैक्ट्री को शीघ्र ही शुरू कराने का आश्वासन देते हुए अनशन तोड़ने का आग्रह किया. जिसे विधायक ने अस्वीकार कर दिया. श्री मेहता ने कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार कार्रवाई नहीं करती तब तक उनका आमरण अनशन जारी रहेगा.
प्रभात खबर डॉट कॉम के बातचीत में विधायक शिवपूजन मेहता ने बताया कि जपला सीमेंट फैक्ट्री करीब 1990 से बंद पड़ा है. झारखंड अलग राज्य गठन के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि यह फैक्ट्री फिर से शुरू हो जायेगा और उन्हें रोजगार मिलेगा. लेकिन राज्य गठन के 18 साल बीत जाने के बाद भी किसी सरकार ने उस ओर ध्यान नहीं दिया.
विधायक ने बताया कि जिस समय फैक्ट्री चालू अवस्था में था उस समय का मजदूरों का पैसा बकाया आजतक उन्हें नहीं मिल पाया है. अभी पिछले महीने फैक्ट्री के स्क्रैप को बेचने के लिए टेंडर आयोजित किया गया था. स्क्रैप करीब 13 करोड़ रुपये में बिका. खरीदार हुसैनाबाद के उपेंद्र सिंह हैं, जिन्हें तीन माह के अंदर पैसे जमा करने का निर्देश दिया गया है. उन पैसों से मजदूरों के बकाये का भुगतान किया जायेगा.
एससी, एसटी और ओबीसी के आरक्षण को 50 फीसदी से बढ़ाकर 73 फीसदी करने की मांग
विधायक शिवपूजन ने कहा कि राज्य अलग होने से पहले एससी, एसटी और ओबीसी को 73 फीसदी का आरक्षण मिलता था जिसे धीरे-धीरे उसे कम कर 50 फीसदी कर दिया गया. इससे गरीब और पिछड़े तबके के लोगों को मुख्यधारा में लाने में परेशानी हो रही है.
उन्होंने कहा कि संयुक्त बिहार में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण दिया जाता था, जिसे अब घटाकर 14 फीसदी कर दिया गया. एससी को 14 फीसदी आरक्षण का लाभ दिया जाता था, जिसे अब घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया. वहीं एसटी को पहले 32 फीसदी आरक्षण दिया जाता था, जिसे घटाकर अब 26 फीसदी कर दिया गया.
शिवपूजन मेहता का आरोप है कि सरकार के बार-बार आश्वासन के बाद भी दोनों ही मुद्दों पर कोई प्रगति नहीं है. उन्होंने कहा कि विधानसभा में इस मुद्दे को कई बार उठाया गया है, लेकिन सत्ता पक्ष की ओर से कोई जवाब नहीं मिला. गैरसरकारी संकल्प में भी यह सवाल उठाया गया है. साथ ही जपला सीमेंट फैक्ट्री के बारे में ध्यानाकर्षण सत्र में मुख्यमंत्री से सवाल पूछे गये हैं.
विस अध्यक्ष को थी अनशन की जानकारी फिर भी सुविधाएं नहीं
विधायक ने कहा कि तीन दिनों पहले विधानसभा सचिव के माध्यम से विधानसभा अध्यक्ष को आमरण अनशन की सूचना दी थी. इसके बावजूद भी अनशनकारियों को मिलने वाली मेडिकल सुविधा उन्हें नहीं प्रदान की गयी. उन्होंने कहा कि जबतक मुख्यमंत्री सदन में दोनों मांगों को लेकर आश्वासन नहीं देंगे, तबतक उनका अनशन चलता रहेगा. उन्होंने बताया कि उनके मांग को बाकी विधायकों का भी समर्थन है. अरूप चटर्जी उनके समर्थन में आये और उनकी मांग का जायज ठहराया.
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