रांची : लीज रेंट पर सरकार ले सकती है जमीन : बाबूलाल मरांडी
Updated at : 09 Jul 2018 7:55 AM (IST)
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योजनाओं के लिए सरकार को जमीन अधिग्रहण करने की जरूरत नहीं रांची : पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जमीन आदिवासियों के जीविकोपार्जन का साधन है. अगर इनकी जमीन चली गयी, तो अस्तित्व ही खत्म हो जायेगा. ऐसे में आदिवासियों को अपनी जमीन बचाना जरूरी है. इसके लिए लड़ाई लड़ने के लिए तैयार रहें. […]
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योजनाओं के लिए सरकार को जमीन अधिग्रहण करने की जरूरत नहीं
रांची : पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जमीन आदिवासियों के जीविकोपार्जन का साधन है. अगर इनकी जमीन चली गयी, तो अस्तित्व ही खत्म हो जायेगा. ऐसे में आदिवासियों को अपनी जमीन बचाना जरूरी है. इसके लिए लड़ाई लड़ने के लिए तैयार रहें. 1951 की जनगणना के बाद से आदिवासियों की संख्या घट कर 36 से 26 प्रतिशत हो गयी है. अगर परिसीमन लागू हुआ, तो आरक्षण में भी भागीदारी कम हो जायेगी. सरकारी योजनाओं के लिए सरकार को जमीन अधिग्रहण करने की जरूरत नहीं है.
सरकार रैयतों से लीज रेंट पर जमीन ले सकती है. इससे रैयतों का मालिकाना हक भी बरकरार रहेगा और सरकारी योजनाएं भी चलती रहेंगी. सरकार के पास जब अडाणी व अंबानी को देने के लिए जमीन है, तो वह विस्थापितों को क्यों नहीं जमीन दे सकती है. श्री मरांडी रविवार को डिबडीह स्थित जेबी सेलिब्रेशन हॉल में आदिवासी मुद्दों को लेकर बुलायी गयी बैठक में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि आंदोलन की व्यापकता और जन दबाव में ही सरकार पीछे हट सकती है.
धर्म चुनना लोगों का मौलिक अधिकार : श्री मरांडी ने कहा कि सरकार की ओर लागू किये गये धर्मांतरण बिल के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की जा सकती है. धर्म के आधार पर आरक्षण से रोकना असंवैधानिक है.
व्यक्ति कौन सा धर्म मानेगा, यह उसका मौलिक अधिकार है. इसके लिए लोगों को कैसे मजबूर किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि आदिवासी बंटे रहें. मैं भी भाजपा की पाठशाला से आया हूं. इसलिए मुझे उसके बारे में सब पता है.
भाजपा के अंतिम बादशाह होंगे नरेंद्र मोदी : श्री मरांडी ने कहा कि झारखंड मुश्किल दौर से गुजर रहा है. नरेंद्र मोदी भाजपा के अंतिम बादशाह साबित होंगे. इन्हें बचाने के लिए भाजपा सारे हथियार का इस्तेमाल करेगी. इसे मिलकर निष्क्रिय कर दें.
बाहर से आनेवाले को रोकनेवाली होनी चाहिए स्थानीय नीति
श्री मरांडी कहा कि संविधान में स्थानीय व नियोजन नीति एक दूसरे से जुड़ी है. स्थानीय नीति ऐसी होनी चाहिए, जिससे हम बाहर से आनेवाले को रोक सकें. संविधान के अनुच्छेद 16 (3) के तहत सरकार को संसद से कानून पास कराने का प्रयास करना चाहिए, ताकि जिलों की रिक्तियों को स्थानीय के लिए आरक्षित किया जा सके.
भूमि अधिग्रहण 2013 का कानून लागू होगा, तभी बचेगी जमीन : रामेश्वर
पूर्व केंद्रीय मंत्री रामेश्वर उरांव ने कहा कि झारखंड में 23 प्रतिशत ही जमीन खेती योग्य है. इसमें से सरकार दो प्रतिशत खेती योग्य जमीन का अधिग्रहण करना चाहती है.
ऐसे में खेती योग्य जमीन घट जायेगी. अगर भूमि अधिग्रहण 2013 का कानून लागू हुआ, तो ही जमीन बचेगी. इसके लिए आदिवासियों को एकजुट रहने की जरूरत है. प्रकाश उरांव ने कहा कि अगर बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और हेमंत सोरेन आदिवासियों के हित में निर्णय लेते, तो आज इतनी किचकिच नहीं होती. सरकार पंचायती राज व्यवस्था को खत्म कर समानांतर समिति खड़ा कर रही है. प्रेम चंद्र मुर्मू ने कहा कि स्थानीय नीति, भूमि अधिग्रहण कानून व धर्मांतरण बिल को निरस्त करने की जरूरत है. वीरेंद्र भगत ने कहा कि सरकार साजिश के तहत आदिवासी व ईसाई को लड़ा कर लाभ उठाना चाहती है.
एकजुट होकर भाजपा से मुकाबला किया जा सकता है. बैठक में पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने 26 अगस्त को बैठक बुलाने का प्रस्ताव लाया, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया. कार्यक्रम को दयामनी बारला, वासवी किड़ो, ग्लैडसन समेत कई नेताओं ने संबोधित किया.
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