सहकारिता को दें आंदोलन का रूप

Updated at : 08 Jul 2018 3:29 AM (IST)
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सहकारिता को दें आंदोलन का रूप

आयोजन. कृषि की संसदीय समिति की बैठक में अधिकारियों को दिया गया निर्देश कृषि जमीन के बदले में संस्था द्वारा कराये जा रहे कार्यों की जानकारी ली बैंकों से पूछा कि अब तक कितने छोटे, मध्यम और उच्च किसानों को ऋण दिया गया रांची : कृषि की संसदीय समिति ने झारखंड में सहकारिता के कार्यों […]

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आयोजन. कृषि की संसदीय समिति की बैठक में अधिकारियों को दिया गया निर्देश

कृषि जमीन के बदले में संस्था द्वारा कराये जा रहे कार्यों की जानकारी ली
बैंकों से पूछा कि अब तक कितने छोटे, मध्यम और उच्च किसानों को ऋण दिया गया
रांची : कृषि की संसदीय समिति ने झारखंड में सहकारिता के कार्यों को और बढ़ावा देने का निर्देश अधिकारियों को दिया. इसे आंदोलन का रूप देने के लिए कहा. समिति ने कृषि ऋण पर हो रहे कार्यों की जानकारी बैंक के अधिकारियों से ली. सांसद हुकुमदेव नारायण यादव की अध्यक्षता वाली कमेटी ने शनिवार को होटल रेडिशन ब्लू में तीन सत्र में बैठक की.
समिति ने सार्वजनिक उपक्रम के अधिकारियों से कृषि जमीन के बदले में संस्था द्वारा कराये जा रहे कार्यों की जानकारी ली. राज्य में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में हो रहे शोध की जानकारी यहां के तकनीकी संस्थानों से ली. बैंकिंग सेक्टर के साथ बैठक में राज्य में कृषि के क्षेत्र में दिये जा रहे ऋण की जानकारी ली.
बैंकों से पूछा गया कि अब तक कितने छोटे, मध्यम और उच्च किसानों को ऋण दिया गया है. इसका आंकड़ा बैंकों के पास नहीं था. बैंकों से यह जानने की कोशिश की गयी कि अलग-अलग जरूरतों के हिसाब कैसे किसानों को प्रोत्साहित करते हैं. कमेटी के सदस्यों को बैंकों ने करीब 25 फीसदी एनपीए की जानकारी दी. कमेटी के सदस्यों ने कहा कि एनपीए के प्रतिशत और पैसे में अंतर दिख रहा है. सदस्यों ने कहा कि सहकारी क्षेत्र से काम किया जा सकता है.
कमेटी के सदस्यों को बैंकों ने करीब 25 फीसदी एनपीए की जानकारी दी
जैसा पेड़ काटते हैं, वैसा ही लगायें
कमेटी के सदस्यों ने सार्वजनिक उपक्रम के अधिकारियों के साथ बैठक में खनन के लिए ली जा रही भूमि के उपयोग पर जानकारी ली. उन्होंने जानना चाहा कि खेती योग्य जो भी जमीन ली जाती है, उसका खनन कंपनियां किस रूप में उपयोग करती है. कंपनियों से यह पूछा कि खनन के लिए अगर सखुआ या अन्य कीमती पेड़ काटा जाता है, तो उसके बदले क्या लगाया जाता है. इसका खनन कंपनियों के अधिकारियों ने कोई ठोस जानकारी नहीं दी.
अधिकारियों को टीम के सदस्यों ने निर्देश दिया कि यह सुनिश्चित करें कि जितना महत्वपूर्ण पेड़ काटा जा रहा हो, उतना ही महत्वपूर्ण पौधा लगाया जाये. सीसीएल ने बंद पड़ी खदानों में मछली पालन कराने की जानकारी कमेटी को दी. कमेटी के अध्यक्ष श्री यादव ने पूछा कि एक साल में कितने वजन की मछली होती है. सीसीएल ने बताया कि करीब 400 ग्राम की. श्री यादव ने कहा कि इसे एक साल में कम से कम सवा किलो का होना चाहिए. अधिकारियों को कहा कि कोशिश कीजिए कि यह काम मत्स्यजीवी सहयोग समितियों के माध्यम से हो.
घट रही जमीन, बढ़ रही है जनसंख्या
कमेटी के सदस्यों ने अंतिम सत्र में राज्य में संचालित कृषि विभाग की संस्थाओं के साथ बैठक की. इसमें सदस्यों का कहना था कि जमीन घट रही है, जनसंख्या बढ़ रही है. इसके हिसाब से खाद्यान्न की जरूरत पूरी करनी है. इसके लिए ज्यादा से ज्यादा अनुसंधान की जरूरत है. अब तक कई नयी वेराइटी आयी है. इस कारण देश खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर रहा है. आनेवाले समय में यही स्थिति बरकरार रहे, इसके लिए ज्यादा से ज्यादा हाइब्रिड बीज खोजने की जरूरत है. इसके लिए राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के साथ मिल कर काम करने की जरूरत है. कार्यक्रम में राज्य की कृषि सचिव पूजा सिंघल, कृषि निदेशक रमेश घोलप, खान निदेशक के साथ-साथ यहां के कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति और कृषि विभाग के वरीय अधिकारी भी मौजूद थे.
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