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झारखंड : 1932 का खतियान नहीं, तो सरकारी नौकरी में आरक्षण नहीं

Updated at : 18 Apr 2018 7:19 AM (IST)
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झारखंड : 1932 का खतियान नहीं, तो सरकारी नौकरी में आरक्षण नहीं

नियोजन नीति के लिए बनी कमेटी ने की सिफारिश : 11 गैर अनुसूचित जिलों में स्थानीय को ही नौकरी मिले रांची : झारखंड के 11 गैर अनुसूचित जिलों में नियोजन नीति की समीक्षा के लिए बनी उच्च स्तरीय कमेटी ने नौकरियों में केवल 1932 के खतियानी को ही आरक्षण का लाभ देने की अनुशंसा की […]

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नियोजन नीति के लिए बनी कमेटी ने की सिफारिश : 11 गैर अनुसूचित जिलों में स्थानीय को ही नौकरी मिले
रांची : झारखंड के 11 गैर अनुसूचित जिलों में नियोजन नीति की समीक्षा के लिए बनी उच्च स्तरीय कमेटी ने नौकरियों में केवल 1932 के खतियानी को ही आरक्षण का लाभ देने की अनुशंसा की है. सरकार अगर कमेटी की अनुशंसा मान लेती है, तो झारखंड में सरकारी नियुक्तियों में आरक्षण की श्रेणी में आनेवाली जातियों को खतियान के बिना इसका लाभ नहीं मिल पायेगा. राज्य सरकार की ओर से लागू की गयी स्थानीय नीति के अनुरूप 1985 से पहले झारखंड में बसनेवालों को स्थानीय के लिए आरक्षित नौकरियों में सामान्य वर्ग की तरह माना जायेगा.
1932 का खतियान नहीं होने पर आरक्षित जाति से आने पर भी आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा. कमेटी ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री रघुवर दास को सौंप दी है.
अधिकतम उम्र सीमा बढ़ायी जाये : कमेटी ने 13 अनुसूचित जिलों के अनुरूप शेष 11 जिलों में होनेवाली जिला स्तरीय तृतीय व चतुर्थ वर्ग की नियुक्तियों में स्थानीय को शत प्रतिशत आरक्षण देने की अनुशंसा की है.
इन जिलों में अनुसूचित जिलों की तरह ही 10 वर्षों के लिए यह व्यवस्था लागू करने का आग्रह किया है. कमेटी ने जिले के साथ-साथ राज्य स्तरीय तृतीय व चतुर्थ वर्ग की नौकरियों के लिए निकलनेवाले विज्ञापन में स्थानीय निवासी की पात्रता को अनिवार्य करने का भी आग्रह किया है. सरकारी नियुक्तियों में स्थानीय निवासी के लिए अधिकतम उम्र सीमा बढ़ा कर 45 वर्ष करने की अनुशंसा की है.
जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में भी आरक्षण : कमेटी ने जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण का प्रावधान लागू करने की कार्रवाई शुरू करने का आग्रह सरकार से किया है. कहा है कि अनुशंसा लागू होने तक प्रारंभिक स्तर पर चल रही सारी नियुक्तियों को रद्द कर दी जाये. राज्य सरकार के अधीन नियुक्ति के लिए सभी प्रतियोगिता परीक्षा में आरक्षण का लाभ केवल खतियानी को ही मिल सकता है.
तृतीय-चतुर्थ वर्ग में केवल जिले में ही नहीं, राज्य स्तरीय नियुक्ति में भी स्थानीय निवासी की पात्रता हो आवश्यक
राज्य सरकार की सभी नियुक्तियों में अधिकतम उम्र
सीमा 45 वर्ष हो, तब तक सारी नियुक्ति प्रक्रिया रद्द हो
बोले कमेटी के अध्यक्ष अमर बाउरी
Qकमेटी ने नियुक्ति में आरक्षण का लाभ लेने के लिए खतियान को जरूरी बताया है. किस आरक्षण की बात है ?
कमेटी ने खतियान को जातिगत आरक्षण का लाभ लेने के लिए अनिवार्य करने की अनुशंसा की है. यानी राज्य सरकार की स्थानीय नीति के अनुरूप 1985 से पहले राज्य में रहनेवाले सभी लोगों को गैर अनुसूचित जिलों में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की नौकरी करने का अधिकार होगा. लेकिन नौकरी में एससी, एसटी या ओबीसी को आरक्षण का लाभ लेने के लिए खतियान जरूरी होगा. दूसरे राज्यों में भी ऐसी ही व्यवस्था है.
Qयह कमेटी 11 गैर अनुसूचित जिलों में नियोजन नीति को लेकर बनी थी. इसमें आरक्षण के प्रावधान का मामला कैसे आया?
कोई भी नियोजन बिना आरक्षण के प्रावधान के नहीं किया जा सकता है.
कमेटी ने कोई फैसला नहीं किया है, अपनी अनुशंसा सरकार से की है. कमेटी की अनुशंसा दूसरे राज्यों में लागू प्रावधानों का अध्ययन कर की गयी है. छत्तीसगढ़ में भी 1959 के सर्वे को आधार मान कर आरक्षण का लाभ दिया जाता है.
कमेटी की सिफारिशें
1. जिला स्तरीय वर्ग-3 और वर्ग-4 के पदों पर गैर अनुसूचित 11 जिलों में भी अनुसूचित जिलों के लिए कार्मिक विभाग के आदेश के आधार पर प्रावधान किया जाये. इस प्रवाधान के अनुरूप संबंधित जिले के स्थानीय निवासी को ही अगले 10 वर्षों तक नियुक्ति का पात्र माना जाये.
राज्य के वर्ग-3 और वर्ग -4 के पदों पर होनेवाली अन्य नियुक्तियों के लिए मात्र झारखंड राज्य के स्थानीय निवासी को ही पात्र मानने के निमित्त, भारत का संविधान के सुसंगत उपबंधों में रखते हुए, प्रावधान निरूपित किया जाये. राज्य स्तरीय तृतीय व चतुर्थ वर्ग के पदों पर होनेवाली नियुक्तियों में झारखंड के स्थानीय निवासी के ही पात्र होने की शर्त का उल्लेख विज्ञापन में किया जाये.
2 . जेपीएससी पीटी में आरक्षण का प्रावधान शामिल किया जाये. जेपीएससी द्वारा प्राथमिकता के आधार संघ लोक सेवा आयोग, बिहार, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि राज्यों के लोक सेवा आयोग में प्रभावी परीक्षा संचालन की व्यवस्था, जिसमें प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण का प्रावधान शामिल है, को अंगीकृत करने की कार्रवाई राज्य सरकार द्वारा की जाये.
3. राज्य सरकार के अधीन की जानेवाली नियुक्तियों में अन्य राज्य जैसे कि छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश के अनुसार झारखंड के स्थानीय निवासियों (महिला सहित) के लिए अधिकतम उम्र सीमा 45 वर्ष निर्धारित की जाये.
4 राज्य सरकार के अधीन नियुक्ति के लिए सभी प्रतियोगिता परीक्षाओं में आरक्षण का लाभ केवल उन्हीं को प्रदान किया जाये, जिनका नाम खतियान (रिकॉर्ड ऑफ राइटस) में दर्ज है़
5. उपर्युक्त अनुशंसाओं के संबंध में सरकार के स्तर पर अंतिम निर्णय लिये जाने तक वैसी नियुक्तियों, जिनकी प्रक्रिया प्रारंभिक स्तर (विज्ञापन इत्यादि) पर हैं तथा जिनकी परीक्षाएं अभी तक नहीं हुई है, को (11 गैर अनुसूचित जिलों के जिला स्तरीय पदों सहित) स्थगित रखी जाये.
कमेटी की अनुशंसा को
ऐसे समझें
राज्य में तृतीय व चतुर्थ वर्ग की नौकरियों (जिला व राज्य स्तरीय दोनों) के लिए स्थानीय या कहें झारखंडी होना जरूरी
स्थानीय या झारखंडी सरकार की स्थानीय नीति के आधार पर ही लागू होगा, यानी इनके लिए 1932 का खतियान नहीं चाहिए. सरकार द्वारा तय कट ऑफ डेट 1985 सहित कई मानक पूर्व की तरह ही लागू रहेंगे
नियुक्ति के तहत जातीय आरक्षण का लाभ लेने के लिए खतियान जरूरी है. स्पष्ट है कि ऐसे में आरक्षण का लाभ खतियानी लोगों को ही मिलेगा
आरक्षण का लाभ लेनेवाली वैसी जातियां, जिनके पास 1932 का खतियान नहीं है, वे अनारक्षित कोटी में आयेंगी. मतलब इनको आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा आरक्षण की श्रेणी में आनेवाली वैसी जातियां, जिनके पास खतियान नहीं है, पर वे स्थानीयता के मानक को पूरा करते हैं, तो उन्हें स्थानीय होने का लाभ मिलेगा, लेकिन आरक्षण नहीं
अगर मान ली गयी अनुशंसाएं तो रुक जायेंगी 17,572 हाइस्कूल शिक्षक, 3080 प्लस टू शिक्षक, 692 रेडियाे ऑपरेटर, 2483 पुलिस अवर निरीक्षक, 488 विशेष शाखा के पुलिस अवर निरीक्षक, 48 सार्जेंट, संयुक्त इंटरमीडिएट स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा समेत अन्य रिक्तियों के लिए चल रही बहाली की प्रक्रिया
नियुक्ति के लिए अधिकतम उम्र सीमा सभी वर्गों के लिए बढ़ कर 45 वर्ष हो जायेगी
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