बिहारशरीफ में ई-लाइब्रेरी का सपना पांच साल बाद भी अधूरा, 8 करोड़ खर्च करने के बाद भी आम पाठकों के लिए नहीं खोला जा सका

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Nalanda News dream of an e-library BiharSharif

ई लाइब्रेरी बिल्डिंग

Nalanda News : नालंदा के बिहारशरीफ स्थित ऐतिहासिक जिला केंद्रीय पुस्तकालय पर स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 8.10 करोड़ रुपये खर्च कर आधुनिक भवन और अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की गईं, लेकिन निर्माण पूरा होने के बावजूद पुस्तकालय आज तक आम पाठकों के लिए नहीं खोला जा सका है.

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(बिहारशरीफ से कंचन कुमार की रिपोर्ट)

Nalanda News : नालंदा के बिहारशरीफ स्थित ऐतिहासिक जिला केंद्रीय पुस्तकालय पर स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 8.10 करोड़ रुपये खर्च कर आधुनिक भवन और अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की गईं, लेकिन निर्माण पूरा होने के बावजूद पुस्तकालय आज तक आम पाठकों के लिए नहीं खोला जा सका है. इससे छात्रों, शोधार्थियों और पुस्तक प्रेमियों में निराशा और नाराजगी बढ़ती जा रही है.

1920 में हुई थी स्थापना, अब भी इंतजार में छात्र

धनेश्वर घाट स्थित जिला केंद्रीय पुस्तकालय की स्थापना वर्ष 1920 में हुई थी. स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत इसका जीर्णोद्धार कर जी+4 आधुनिक भवन बनाया गया. परिसर में पार्किंग, रेस्टोरेंट, कैफेटेरिया और अन्य सुविधाएं विकसित की गईं, लेकिन इनका लाभ अब तक आम लोगों को नहीं मिल पा रहा है.

डेढ़ साल में पूरा होना था काम, बीत गए पांच साल

अप्रैल 2021 में पुस्तकालय को अत्याधुनिक ई-लाइब्रेरी के रूप में विकसित करने की योजना शुरू हुई थी. निर्माण कार्य के लिए डेढ़ वर्ष की समयसीमा तय की गई थी, लेकिन पांच वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पुस्तकालय का हैंडओवर और संचालन शुरू नहीं हो सका है.

समीक्षा बैठकों के बावजूद नहीं खुले दरवाजे.

निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही पुस्तकालय को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया था. विभिन्न स्तरों पर समीक्षा बैठकें हुईं और जल्द संचालन के निर्देश भी दिए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है.

आधुनिक भवन तैयार, फिर भी सुविधा से वंचित छात्र.

भवन पूरी तरह तैयार होने के बावजूद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र और शोधार्थी आधुनिक अध्ययन सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं. युवाओं का कहना है कि पुस्तकालय शुरू होने से उन्हें बेहतर अध्ययन वातावरण मिल सकता है.

एक साल पहले पूरा हुआ निर्माण, सेवा अब भी बंद

स्थानीय लोगों का दावा है कि पुस्तकालय का अधिकांश निर्माण कार्य करीब एक वर्ष पहले ही पूरा हो चुका है. बावजूद इसके प्रशासनिक प्रक्रियाओं और प्रबंधन संबंधी कारणों से इसे जनता के लिए शुरू नहीं किया गया है. करोड़ों रुपये की परिसंपत्ति फिलहाल उपयोग से बाहर पड़ी हुई है.

निजी लाइब्रेरी और कोचिंग पर निर्भर छात्र

सरकारी स्तर पर विकसित इस आधुनिक पुस्तकालय के बंद रहने से छात्र निजी पुस्तकालयों और कोचिंग संस्थानों पर निर्भर हैं. उनका कहना है कि सरकारी ई-लाइब्रेरी शुरू होने से पढ़ाई की गुणवत्ता और संसाधनों तक पहुंच बेहतर हो सकती है.

डिजिटल सुविधाएं तैयार, लेकिन उपयोग का इंतजार

परियोजना के तहत डिजिटल कैटलॉगिंग, ऑनलाइन बुक ट्रैकिंग सिस्टम, कंप्यूटर आधारित सदस्यता व्यवस्था, आधुनिक रीडिंग रूम और तकनीकी संसाधनों की व्यवस्था की गई है. दिव्यांग पाठकों के लिए रैंप और अलग अध्ययन कक्ष भी बनाए गए हैं, लेकिन ये सुविधाएं अभी तक उपयोग में नहीं लाई जा सकी हैं.

फीकी पड़ रही चमक, जवाबदेही पर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किए गए भवन की रंगाई-पुताई और बाहरी चमक धीरे-धीरे फीकी पड़ने लगी है. इसके बावजूद पुस्तकालय का संचालन शुरू नहीं होना परियोजना की उपयोगिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है. अब छात्र और नागरिक जल्द से जल्द पुस्तकालय को जनता के लिए खोलने की मांग कर रहे हैं.

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विवेक सिंह

लेखक के बारे में

By विवेक सिंह

विवेक सिंह की डिजिटल मीडिया और जनसरोकारों से जुड़े विषयों में विशेष रुचि रही है. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कार्यरत हैं. वे बिहार के मिथिला क्षेत्र के निवासी हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं.

उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई की है. शिक्षा के दौरान उन्होंने रिपोर्टिंग, समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, जनसंचार, फोटो जर्नलिज्म, मोबाइल जर्नलिज्म (MOJO) और मीडिया रिसर्च की गहन समझ विकसित की है. अध्ययन के दौरान उन्होंने दूरदर्शन (Doordarshan) में इंटर्नशिप भी की, जहां उन्हें न्यूजरूम की कार्यप्रणाली, टीवी समाचार निर्माण, स्क्रिप्ट लेखन, विजुअल चयन, फील्ड रिपोर्टिग और प्रसारण प्रक्रिया को नजदीक से समझने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ.

पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्होंने मीडिया प्लेटफॉर्म The Newsdharma के माध्यम से ग्राउंड रिपोर्टिंग, जनमत संग्रह (Public Opinion), सामाजिक मुद्दों की कवरेज और स्थानीय समाचारों के संकलन का व्यापक अनुभव प्राप्त किया. उन्होंने विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और जनहित से जुड़े विषयों पर जमीनी स्तर से रिपोर्टिंग करते हुए आम लोगों की आवाज को प्रमुखता से सामने लाने का कार्य किया है.

इसके साथ ही वे NGO Amar Shaheed Bipin Singh Foundation से जुड़कर सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं. स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, युवा सशक्तिकरण, धार्मिक और जनकल्याण से जुड़े अभियानों में उनकी विशेष भागीदारी रही है. समाज के विभिन्न वर्गों के बीच जागरूकता फैलाने और सकारात्मक बदलाव लाने के प्रयासों में वे निरंतर योगदान देते रहे हैं.

वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कार्यरत विवेक सिंह राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, खेल, अपराध, रियल-टाइम समाचारों, सामाजिक सरोकारों और समसामयिक विषयों से जुड़ी खबरों पर लेखन करते हैं. डिजिटल पत्रकारिता के साथ-साथ उन्हें SEO (Search Engine Optimization), कंटेंट प्लानिंग और ट्रेंड-आधारित समाचार लेखन की अच्छी समझ है. ब्रेकिंग न्यूज की पहचान, त्वरित कवरेज और कम समय में तथ्यपरक समाचार तैयार करना उनकी प्रमुख कार्यक्षमताओं में शामिल है.

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