अमित शाह ने अपने ब्लॉग में लिखा : आदिवासी देशभक्तों को पुष्पांजलि नहीं कार्यांजलि दे रही है भाजपा
Updated at : 07 Oct 2017 7:10 AM (IST)
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भाजपा अध्यक्ष ने बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातू को याद किया, सरकार की तारीफ की रांची : भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातू की यात्रा काे याद किया है. अपने ऑफिसियल ब्लॉग और टविटर में राज्य सरकार की तारीफ करते हुए विकास योजनाओं और यात्रा के बारे मेें […]
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भाजपा अध्यक्ष ने बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातू को याद किया, सरकार की तारीफ की
रांची : भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातू की यात्रा काे याद किया है. अपने ऑफिसियल ब्लॉग और टविटर में राज्य सरकार की तारीफ करते हुए विकास योजनाओं और यात्रा के बारे मेें विस्तृत ब्योरा दिया है़ श्री शाह ने लिखा है : पार्टी के संगठनात्मक कार्य के लिए आयोजित विस्तृत प्रवास के अंतर्गत मुझे हाल में भगवान बिरसा मुंडा की धरती झारखंड में तीन दिन बिताने का अवसर मिला़
इसी दौरान 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के शुभ अवसर पर मनाये जा रहे सेवा दिवस को मैं भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली को नमन करने खूंटी जिला स्थित उनके पैतृक गांव उलिहातू गया, जहां मुझे उनके वंशजों को सम्मान देने का सौभाग्य प्राप्त हुआ़
सेवा दिवस के अंतर्गत मुझे उलिहातू के सर्वांगीण विकास की विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ़ झारखंड सरकार ने शहीदों की जन्मभूमि रही उलिहातू जैसे 19 गावों के सर्वांगीण विकास के लिए शहीद ग्राम विकास योजना बनायी है़ इसके अंतर्गत इन गांवों की बिजली, पानी, सड़क, पक्का आवास, स्वास्थ्य केंद्र इत्यादि जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को आदर्श रूप से विकसित किया जायेगा़ मेरा मानना है कि झारखंड सरकार ने पूर्व में पारंपरिक रूप से शहीदों को दी जाने वाली पुष्पांजलि को विकास का रंग देकर इसे कार्यांजलि में बदल दिया है़ मैं झारखंड सरकार और उसके मुखिया रघुवर दास को शहीदों को सम्मान देने के इस अनूठे प्रयास के लिए बधाई देता हू़ं श्री शाह ने ब्लॉग में आगे लिखा है कि देश की स्वतंत्रता की लड़ाई में जनजाति और दलित समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और उन्होंने अनेकों बलिदान दिये है़ं परंतु दुर्भाग्यवश इतिहासकारों ने उन्हें वह मान्यता नहीं दी जिसके वह हकदार थे़
अगर हम झारखंड की बात कहें तो भगवान बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हो, नीलाम्बर, पीताम्बर, गया मुंडा और तेलंगा खड़िया इत्यादि जैसे अनेक देश भक्त आदिवासी सुरमाओं ने देश के लिए बलिदान देकर झारखंड और मां भारती की सेवा की़ भगवान बिरसा मुंडा ने तो सिर्फ 20 वर्ष की अल्पायु में लगान माफी के लिए अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन किया और दो वर्षों तक कारागार में रहे़ जेल से बाहर आकर उन्होंने अंग्रेजों से लड़ने के लिए मुंडा सेना गठित की और अनेक अवसरों पर अंग्रेजों के दांत खट्टे किये़
आज भारत में लगभग 9% आबादी आदिवासियों की है जो कि देश के हर कोने में विभिन्न नामों से जाने जाते है़ं हमारा देश तरह-तरह की संस्कृति, भाषाओं, वेश-भूषाओं और खान-पान का एक रंगीन गुलदस्ता है और हमारा आदिवासी समाज इस गुलदस्ते का सबसे अनिवार्य और सुंदर पुष्प है़
अपने सार्वजनिक जीवन में मुझे देश के विभिन्न हिस्से में रहने वाले आदिवासी भाइयों और बहनों से मिलने और उनकी जीवन शैली को नजदीक से देखने का अवसर मिला़ मुझे यह कहने में कोई गुरेज नहीं कि हमारीसभ्यता के संवर्धन में आदिवासियों की अहम भूमिका है. क्योंकि उन्होंने आज भी अपने रीति-रिवाजों को संभाल कर रखा है़
सुदूर इलाकों में बसने और पूर्व की सरकारों की उपेक्षा के कारण दुर्भाग्यवश हमारे आदिवासी समाज का अभी तक वांछित विकास नहीं हो सका है़ पिछले 70 वर्षों में सरकारों ने प्राकृतिक और खनिज संपदा से परिपूर्ण आदिवासी इलाकों का दोहन तो खूब किया परंतु असंतुलित नीतियों की वजह से इस संपत्ति का लाभ इन इलाकों में रहने वालों का नहीं मिल पाया़ जंगल और पहाड़ उजड़ते गए परंतु न तो वनवासी क्षेत्रों के मूलभूत ढांचे को विकसित किया गया और न ही पर्यावरण की सुरक्षा के प्रयास किये गये़
वनवासियों से प्राकृतिक संसाधन तो लगातार छीने जाते रहे परंतु बदले में न उन्हें रोजगार मिला और न ही उनका विकास हो पाया़ परिणाम स्वरूप देश का आदिवासी विकास की दौड़ में बहुत पीछे छूट गया़ जल, जंगल और जमीन का संवर्धन पहले भारतीय जनसंघ और बाद में भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिकता रही है़
वास्तव में जनसंघ का जन्म ही विकास के भारतीय मॉडल के मुद्दे पर हुआ था, जिसके केंद्र में पाश्चात्य तर्ज पर विकास की अंधी दौड़ से हट कर भारतीय सभ्यता के संवर्धन के साथ विकास था़ अतः भाजपा के वैचारिक मूल में ही जंगल और जनजातियों के विकास को प्राथमिकता दी गयी है़ लंबे समय तक सरकार में न रहने के बावजूद भाजपा और उसके वैचारिक परिवार के वनवासी कल्याण आश्रम जैसे अनेक संगठनों ने जनजातियों के विकास अविरल प्रयास किये है़ं
पूर्व में जनजातीय विकास कार्यों को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत किया जाता था और इस विषय के लिए कोई समर्पित मंत्रालय नहीं था.
यह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सोच थी कि आदिवासियों के विकास के लिए उन्होंने एक पृथक जनजातीय कार्य मंत्रालय की स्थापना 1999 में की़ मोदी सरकार ने जनजातियों के विकास के लिए कई कदम उठाये हैं जिनमें से सबसे प्रमुख 2014 में शुरू की गई वनबंधु कल्याण योजना है जिसके अंतर्गत जनजाति आबादी वाले विकास प्रखंडों में अनेक काम किये जा रहे है़ं
मुझे पूर्ण विश्वास है नरेंद्र मोदी की सरकार जिस तरह से काम कर रही है उससे पूर्वोत्तर के साथ-साथ संपूर्ण देश में जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास होगा और उनकी स्वराज से सुराज की यात्रा शीघ्र पूरी होगी़
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