एआइ से रोजगार के साधन को बढ़ाया जाना चाहिए : वीसी

Published by : Akarsh Aniket Updated At : 15 May 2026 9:34 PM

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एआइ से रोजगार के साधन को बढ़ाया जाना चाहिए : वीसी

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ज्योति प्रकाश महिला बीएड कॉलेज में दो दिवसीय नेशनल सेमिनार प्रतिनिधि, मेदिनीनगर चियांकी स्थित ज्योति प्रकाश महिला बीएड कॉलेज में शुक्रवार को दो दिवसीय नेशनल सेमिनार का आयोजन किया गया. मौके पर मेदिनीनगर की मेयर अरुणा शंकर, एनपीयू के वीसी डॉ दिनेश कुमार सिंह, चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के अध्यक्ष आनंद शंकर, एनपीयू के डीएसडब्ल्यू डा एसके पांडेय, डॉ राजेंद्र कुमार सिंह ने सेमिनार का उद्घाटन किया. सबसे पहले सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया गया.कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में समाज और शिक्षा का बहुविषयक रूपांतरण विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में शिक्षा जगत, शोध एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही.मौके पर मुख्य अतिथि वीसी डॉक्टर दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि एआइ के माध्यम से रोजगार के साधन को बढ़ाया जाना चाहिये. भारत में जो भौगोलिक दशा है. उसमें लोगों को रोजगार चाहिए. एआइ के माध्यम से स्वास्थ्य व कृषि के क्षेत्र में अच्छा काम हो सकता है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कोऑपरेटिव फार्मिंग पर जोर दिया जायेगा. कहा कि आज पूरी दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव को महसूस कर रही है. शिक्षा जगत इससे सबसे अधिक प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में शामिल है. एआइ केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि ज्ञान, शोध, शिक्षण और सामाजिक संरचना में व्यापक परिवर्तन का माध्यम बन चुका है. आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था में वही संस्थान और विद्यार्थी आगे बढ़ेंगे, जो तकनीक के साथ स्वयं को निरंतर अद्यतन रखेंगे. विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार करना है. एआइ विद्यार्थियों को नयी संभावनाएं प्रदान कर रहा है. कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि विवेक, चिंतन और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास करना है. वर्तमान समय में शोध, डेटा विश्लेषण, डिजिटल लर्निंग और ऑनलाइन शिक्षण पद्धति में एआई की भूमिका तेजी से बढ़ रही है. ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने में भी यह तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. एआइ का सही दिशा में उपयोग किया जाये, तो यह शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है. इस अवसर पर प्रो राजेंद्र सिंह, प्रो एसके पांडेय, पलामू चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष आनंद शंकर, आकर्ष आनंद सहित कई शिक्षाविदों एवं गणमान्य लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किये. संगोष्ठी में बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया. एआइ नावाचार का उत्प्रेरक है : अरुणा शंकर नगर निगम की मेयर अरुण शंकर ने कहा कि एआइ विभिन्न क्षेत्रों में नावाचार का उत्प्रेरक है. एआइ भारत के शैक्षिक परिदृश्य को पुनर्गठित करने, शिक्षण विधियों को बेहतर बनाने, कक्षा की प्रभावशीलता बढ़ाने और राष्ट्रीय विकास में योगदान देने में महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरी है. भारत ने 2025 में वैश्विक जनरेटिव एआइ एप्लीकेशन डाउनलोड का 16 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया है, जो डिजिटल अर्थव्यवस्था में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है. एआइ का एकीकरण भारतीय शिक्षा क्षेत्र में पहले ही क्रांतिकारी परिवर्तन साबित हो चुका है. यह शिक्षकों को रटने वाले कार्यों पर कम समय, बच्चों को सोचने, प्रशन पूछने और विकसित होने में मदद करने पर अधिक समय देने में सक्षम बनायेगी. कहा कि एआइ मानवता की गंभीर समस्याओं का समाधान खोजने में मदद कर रहा है. लेकिन यह कभी भी शिक्षकों की मानवीय भूमिका व उनके मार्गदर्शन का स्थान नहीं ले सकता.

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