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बदहाल शिक्षा व्यवस्था : पलामू में 36 प्लस टू हाईस्कूल में 32000 छात्र, टीचर सिर्फ 147, कैसे होगी पढ़ाई ?

Updated at : 29 Nov 2022 2:46 PM (IST)
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बदहाल शिक्षा व्यवस्था : पलामू में 36 प्लस टू हाईस्कूल में 32000 छात्र, टीचर सिर्फ 147, कैसे होगी पढ़ाई ?

आंकड़ों पर गौर करें तो पलामू जिले के प्लस टू विद्यालयों में इंटर साइंस के 14000, इंटर आर्ट्स के 17000 व इंटर कॉमर्स के 1000 विद्यार्थी हैं. प्रावधान के मुताबिक इन विद्यालयों में प्रत्येक विद्यालय में 11 पद सृजित हैं. इस हिसाब से 396 शिक्षकों की जरूरत है.

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Bad Education System: झारखंड के पलामू जिले में 36 प्लस टू हाईस्कूल हैं. इनमें करीब 32 हजार विद्यार्थी हैं, लेकिन इन्हें पढ़ाने के लिए सिर्फ 147 शिक्षक हैं. कई विद्यालय तो ऐसे भी हैं जो सिर्फ और सिर्फ एक ही शिक्षक के भरोसे हैं. कई विषयों के शिक्षकों का पद भी सृजित नहीं है. कई विद्यालयों में शिक्षकों की कमी देखते हुए अन्य शिक्षकों का प्रतिनियोजन भी नहीं किया गया है. इस कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई पूरी तरह से प्रभावित हो रही है. दो या चार विषयों को छोड़कर अन्य विषयों की पढ़ाई ही नहीं होती है.

396 शिक्षकों की जरूरत है

आंकड़ों पर गौर करें तो प्लस टू विद्यालयों में इंटर साइंस के 14000, इंटर आर्ट्स के 17000 व इंटर कॉमर्स के 1000 विद्यार्थी हैं. प्रावधान के मुताबिक इन विद्यालयों में प्रत्येक विद्यालय में 11 पद सृजित हैं. इस हिसाब से 396 शिक्षकों की जरूरत है. गणित के सृजित पद 36 हैं, जबकि पदस्थापित 18 हैं, वहीं भौतिकी के 36 में 10, रसायन में 13, जीव विज्ञान में 12, अर्थशास्त्र में 13, हिंदी में 15, संस्कृत में 19, अंग्रेजी में आठ, भूगोल में 20, इतिहास में 9 और कॉमर्स में 10 शिक्षक पदस्थापित हैं. इनमें से 13 वैसे भी शिक्षक हैं जिन्होंने विद्यालय छोड़ दिया है.

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विषयों के पद ही सृजित नहीं हैं

राजनीतिक शास्त्र, गृह विज्ञान, मनोविज्ञान, भूगर्भ शास्त्र, कंप्यूटर साइंस जैसे विषय के शिक्षकों का किसी भी विद्यालय में पद ही सृजित नहीं है, जबकि बड़ी संख्या में विद्यार्थी इस विषय का अध्ययन करते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि शैक्षणिक व्यवस्था सुदृढ़ करने की दिशा में एक सरकार की जो पहल है वह सिर्फ आंकड़ों तक ही क्यों सीमित है? विद्यालय में शिक्षकों की कमी कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. दूरदराज इलाकों में पढ़ाई पूरी नहीं कर पाने के कारण विद्यार्थियों ने स्थानीय विद्यालयों में नामांकन करा लिया है. इनमें लड़कियों की संख्या अधिक है.

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जहां अधिक विद्यार्थी, वहां और कम हैं शिक्षक

जिन विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक है, वहां शिक्षकों की कमी सबसे अधिक है. राजकीयकृत उत्क्रमित मध्य विद्यालय हैदर नगर में 2000 विद्यार्थियों पर सिर्फ तीन शिक्षक, राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय लेस्लीगंज में 1800 विद्यार्थियों पर तीन शिक्षक, राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय तरहसी में 2000 विद्यार्थियों पर दो शिक्षक एवं राजकीय बालिका प्लस टू उच्च विद्यालय हुसैनाबाद में 2000 विद्यार्थियों में सिर्फ चार शिक्षक हैं.

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पांच विद्यालयों में कोई शिक्षक पदस्थापित नहीं

इस वर्ष पांच विद्यालयों में प्लस टू की पढ़ाई शुरू की गयी है, लेकिन अभी तक न तो कोई शिक्षक पदस्थापित किये गये हैं और न ही किसी को प्रतिनियोजन पर वहां भेजा गया है. इनमें ब्राह्मण उच्च विद्यालय मेदिनीनगर, राजकीयकृत उच्च विद्यालय दीपौवा पाटन, राजकीयकृत उत्क्रमित मध्य विद्यालय रनेभरी पांकी, राजकीयकृत उच्च विद्यालय रत्नाग पांडू व राजकीयकृत उच्च विद्यालय डाली छतरपुर के नाम शामिल हैं.

रिपोर्ट : चंद्रशेखर सिंह, मेदिनीनगर, पलामू

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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