पाटन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र : एक डॉक्टर के भरोसे चल रहा स्वास्थ्य केंद्र

Updated at : 03 Dec 2018 8:09 AM (IST)
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पाटन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र : एक डॉक्टर के भरोसे चल रहा स्वास्थ्य केंद्र

रामनरेश तिवारी, पाटन : यह तीन मामले यह बताने के लिए काफी है कि स्वास्थ्य व्यवस्था किस कदर लचर हो चुकी है. तीनों मामले पलामू के पाटन प्रखंड से जुड़े हुए है. लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले, इसके लिए सरकार के स्तर से लगातार प्रयास हो रहा है. लेकिन इसके बाद भी जो स्थिति […]

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रामनरेश तिवारी, पाटन : यह तीन मामले यह बताने के लिए काफी है कि स्वास्थ्य व्यवस्था किस कदर लचर हो चुकी है. तीनों मामले पलामू के पाटन प्रखंड से जुड़े हुए है. लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले, इसके लिए सरकार के स्तर से लगातार प्रयास हो रहा है. लेकिन इसके बाद भी जो स्थिति है वह यह बताने के लिए काफी है कि तमाम प्रयास के बाद भी आज भी आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल रही है.
स्थिति यह है कि पाटन के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक की कमी है. सात के विरुद्ध चार कार्यरत है. लेकिन तीन का पता नहीं है. पूछने पर पता चलता है कि डॉ रविशंकर की पदस्थापना हुई थी. लेकिन 16 जनवरी-2017 से डॉ रविशंकर अनुपस्थित चल रहे है. वह वापस भी लौटेंगे या नहीं. इसका पता बताने वाला कोई नहीं है.
इसके अलावा डॉ विकासचंद घोष व डॉ सोमा डे 10 अगस्त 2017 से लापता है. मात्र एक डाक्टर के सहारे पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था टीकी है. वह प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के पद पर भी कार्यरत है. प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ सरोज कुमार का कहना है कि जो जिम्मेवारी मिली है उसे किसी तरह निभा रहे हैं. जो संसाधन उपलब्ध है उसी में व्यवस्था उपलब्ध कराया जा रहा है.
केस नंबर-1
पाटन के मनिका गांव की पार्वती देवी अपने मायके में रहती थी. उसे अप्रैल में प्रसव हुआ था, पर 18 नवंबर तक उसे मुख्यमंत्री जननी सुरक्षा योजना का लाभ नहीं मिला था. वह बीमार थी. उसकी मां ने अपना दो कट्ठा जमीन बेच कर इलाज कराया पर स्थिति बिगड़ गयी. मुख्यमंत्री 19 नवंबर को पलामू आने वाले थे. जब मीडिया कर्मी मामले की कवरेज करने मनिका पहुंच गये, तो मुख्यमंत्री तक मामला न पहुंचे इसके लिए स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हुआ. आनन फानन में उसे मेदिनीनगर सदर अस्पताल लाया गया. फिर खून चढ़ाकर रांची भेज दिया गया, जहां इलाज के दौरान 19 नवंबर को उसकी मौत हो गयी. जीते जी उसे मुख्यमंत्री जननी सुरक्षा योजना का लाभ नहीं मिला.
केस नंबर-2
13 नंवंबर को पाटन-पड़वा मुख्य पथ पर सड़क दुर्घटना में एक युवक पिकअप से गिर गया था. तत्काल उसे लोग पाटन के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ले गये. लेकिन वहां कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था कि इलाज हो सके. उसे मेदिनीनगर के सदर अस्पताल लाया जा रहा था. जहां रास्ते में ही उसकी मौत हो गयी. लोग बताते है कि यदि समय पर इलाज शुरू हो जाता तो संभव था कि उस युवक की जान बच जाती.
केस नंबर-3
पाटन थाना क्षेत्र के डाढा गांव के छात्र वृजकेश प्रजापति को सांप ने डंस लिया. उसके घर वाले इलाज के लिए पाटन के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गये. लेकिन वहां बताया गया कि यहां लाने से कोई फायदा नहीं. एंटी स्नेक्स का इंजेक्शन नहीं है. कोई फायदा नहीं होगा. बाहर ले जाये. उसके बाद घरवाले उसे नवजीवन अस्पताल तुंबागड़ा ले गये. जब युवक की हालत बिगड़ने लगी, तो अस्पताल प्रबंधन ने रिम्स रेफर कर दिया. पास में पैसा नहीं था. उसके परिजन लौटे और झाड़ फूंक के सहारे उसे बचाने की कोशिश करने लगे. अंतत: वृजकेश की मौत हो गयी. सिस्टम उसे इंजेक्शन तक उपलब्ध नहीं करा पायी.
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