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गर्भवतियों की स्वास्थ्य निगरानी करेगा हाई रिस्क प्रेग्नेंसी एप

Updated at : 15 Oct 2025 5:32 PM (IST)
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गर्भवतियों की स्वास्थ्य निगरानी करेगा हाई रिस्क प्रेग्नेंसी एप

उपायुक्त मनीष कुमार ने प्रोजेक्ट जागृति के तहत जिले में कालाजार और मलेरिया नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य जागरूकता, मॉनिटरिंग और रोकथाम पर बैठक की। उन्होंने दो से तीन टीमें अमड़ापाड़ा और लिट्टीपाड़ा में लगाने, पीकेडीएल मरीजों की 84 दिन की दवा का पालन सुनिश्चित करने और रात्रि चौपाल में स्थानीय भाषाओं में प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए।

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जिला प्रशासन की पहल पर तैयार किया जा रहा एप्लिकेशन संवाददाता, पाकुड़. उपायुक्त मनीष कुमार ने प्रोजेक्ट जागृति – बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में एक कदम के अंतर्गत जिले में कालाजार और मलेरिया जैसी स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर बैठक की. बैठक में रोग नियंत्रण, रोकथाम और जागरुकता कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की गयी. डीसी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कालाजार और मलेरिया के मामलों की लगातार मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाये. उन्होंने कहा कि लोगों को गर्म पानी पीने और बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत रिपोर्ट करने के लिए जागरूक करें. अमड़ापाड़ा और लिट्टीपाड़ा क्षेत्रों में दो से तीन टीम लगाने के निर्देश दिये गये. डीसी ने कहा कि पीकेडीएल मरीजों को 84 दिन की दवा पूरी करने का पालन सुनिश्चित कर प्रतिदिन निगरानी की जाये. वर्तमान में जिले में कुल 76 पीकेडीएल मरीज हैं. उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि रात्रि चौपाल के माध्यम से संथाली और बंगाली भाषा में कालाजार से बचाव के लिए प्रचार-प्रसार किया जाये. प्रोजेक्ट जागृति के तहत उपायुक्त ने बताया कि हाइ रिस्क प्रेग्नेंसी एप का निर्माण किया जा रहा है. इस एप का उद्देश्य जिले में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की निगरानी और स्वास्थ्य देखभाल को डिजिटल माध्यम से प्रभावी बनाना है. इसके माध्यम से प्रत्येक गर्भवती महिला की स्वास्थ्य स्थिति, नियमित जांच, पोषण संबंधी जानकारी और डोज़ या टीकाकरण का रिकॉर्ड ट्रैक किया जाएगा. एप से स्वास्थ्य कर्मियों को समय पर चेतावनी और रिमाइंडर मिल सकेगा, जिससे किसी भी गंभीर स्थिति में तुरंत हस्तक्षेप किया जा सकेगा. उन्होंने कहा कि इस एप के माध्यम से गर्भवती महिलाओं में संभावित जटिलताओं का समय पर पता लगाया जा सकेगा. स्वास्थ्य कर्मियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सटीक और त्वरित जानकारी उपलब्ध होगी. सतत निगरानी और डेटा आधारित निर्णय लेने में मदद मिलेगी. उच्च जोखिम गर्भावस्था के मामलों में समय पर सहायता और उपचार सुनिश्चित होगा. उपायुक्त ने यह भी कहा कि इस डिजिटल पहल से जिले में मातृ और शिशु स्वास्थ्य के सुधार में महत्वपूर्ण योगदान होगा और प्रोजेक्ट जागृति के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र में जिले की उपलब्धियों को और मजबूत किया जाएगा. बैठक में उपाधीक्षक, सदर अस्पताल डॉ मनीष सिन्हा, जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ के के सिंह, सभी प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं एमओआईसी समेत अन्य स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी उपस्थित थे.

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