उदासीनता . हाल मदरसा दारूल ओलूम का
Updated at : 14 Feb 2016 5:09 AM (IST)
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जमीन पर पढ़ते हैं बच्चे पाकुड़ : सरकार कहती है विद्यालयों व मदरसों में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जायेगा. बेंच डेस्कों की कमी नहीं होने दी जायेगी. लेकिन सदर प्रखंड के मदरसा दारूल ओलुम हरिगंज में बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर है. जानकारी के अनुसार मदरसा की स्थापना 1976 में आसपास के […]
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जमीन पर पढ़ते हैं बच्चे
पाकुड़ : सरकार कहती है विद्यालयों व मदरसों में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जायेगा. बेंच डेस्कों की कमी नहीं होने दी जायेगी. लेकिन सदर प्रखंड के मदरसा दारूल ओलुम हरिगंज में बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर है. जानकारी के अनुसार मदरसा की स्थापना 1976 में आसपास के ग्रामीणों ने शिक्षा का अलख जगाने के लिए किया था. लेकिन बच्चों के पठन-पाठन के लिए एक अदद कमरा का भी निर्माण नहीं कराया जा सका.
ग्रामीणों के सहयोग से खुले आसमान के नीचे मदरसा के शिक्षक पढ़ाने को मजबूर थे. हालांकि पूर्व विधायक अकिल अख्तर ने अपने निजी फंड से दो कमरे का निर्माण कराया था. ग्रामीणों के काफी प्रयास के बाद 2015 में एमएसडीपी योजना के तहत लाखों रुपये की लागत से दो मंजिला भवन का निर्माण तो कराया. लेकिन राशि के अभाव में कमरा अधूरा है. वहीं बेंच व डेस्क के अभाव में वर्ग अष्टम के बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं. यहां 421 बच्चों का नामांकन किया गया है. पांच सरकारी शिक्षक व एक पारा शिक्षक बच्चों को तालिम देने का काम करते हैं.
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