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झारखंड में रसोई गैस की किल्लत बढ़ी, रांची में कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पर रोक

Updated at : 10 Mar 2026 10:13 AM (IST)
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LPG Cylinder Crisis

झारखंड के खूंटी में रसोई गैस लेने के लिए लगी लंबी कतार. फोटो: प्रभात खबर

LPG Cylinder Crisis: ईरान-इजरायल तनाव के बीच झारखंड में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत बढ़ने लगी है. कॉमर्शियल गैस की सप्लाई सीमित होने से होटल-रेस्टोरेंट प्रभावित हैं. रांची समेत कई जिलों में पैनिक बुकिंग से घरेलू गैस की मांग तेजी से बढ़ गई है. प्रशासन ने वितरण व्यवस्था पर निगरानी शुरू कर दी है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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LPG Cylinder Crisis: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब झारखंड में भी दिखाई देने लगा है. पेट्रोलियम पदार्थों के आयात में संभावित बाधा और बाजार में फैल रही आशंकाओं के कारण राज्य के कई शहरों में रसोई गैस की किल्लत की स्थिति बनने लगी है. खासकर 19 किलो वाले कॉमर्शियल एलपीजी सिलिंडरों की आपूर्ति पर फिलहाल अघोषित रोक लगा दी गई है. तेल कंपनियों ने यह कदम घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से उठाया है. हालांकि, इस संबंध में कंपनियों की ओर से कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन गैस एजेंसियों को मौखिक रूप से निर्देश दिया गया है कि अगले आदेश तक कॉमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति सीमित रखी जाए.

घरेलू सिलिंडर की आपूर्ति को दी जा रही प्राथमिकता

तेल कंपनियों का कहना है कि घरेलू गैस की बढ़ती मांग को देखते हुए यह अस्थायी व्यवस्था लागू की गयी है. इंडियन ऑयल के एक मंडल स्तरीय वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार कंपनियों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 14.2 किलो वाले घरेलू गैस सिलिंडरों की आपूर्ति बाधित न हो. हालांकि, अस्पतालों, स्कूल-कॉलेजों के मेस और अन्य जरूरी संस्थानों को कॉमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति जारी रखने की बात कही गई है. लेकिन होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग और शादी-समारोह जैसे आयोजनों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है.

रोजाना हजारों सिलिंडरों की होती है सप्लाई

राजधानी रांची में इंडियन ऑयल से जुड़ी गैस एजेंसियों के माध्यम से रोजाना 150 से लेकर 1000 तक कॉमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति होती है. औसतन 500 सिलिंडर प्रतिदिन के हिसाब से केवल एक कंपनी की आपूर्ति लगभग 2.25 लाख सिलिंडरों के रोटेशन पर आधारित होती है, जो ग्राहकों तक पहुंचायी जाती है. इसी तरह भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और अन्य तेल कंपनियां भी गैस की सप्लाई करती हैं. फिलहाल एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए गैस वितरण किया जाए.

घबराहट में बुकिंग से अचानक बढ़ी मांग

गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि वास्तविक समस्या गैस की कमी नहीं, बल्कि पैनिक बुकिंग है. मिडिल ईस्ट संकट की खबरों के बाद लोगों ने घबराहट में अधिक मात्रा में सिलिंडर बुक कराना शुरू कर दिया है. पहले जहां रोजाना 350 से 400 घरेलू सिलिंडरों की बुकिंग होती थी, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 2300 से 2500 तक पहुंच गयी है. इतनी बड़ी संख्या में बुकिंग होने से गैस एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है. एजेंसी संचालकों के अनुसार, इतनी मांग को पूरा करने के लिए दो की जगह आठ वाहनों से सिलिंडर की आपूर्ति करनी होगी, जो फिलहाल संभव नहीं है. इसी कारण कॉमर्शियल सिलिंडरों की सप्लाई सीमित कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है.

कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की कीमतों में उछाल

रसोई गैस की किल्लत की अफवाहों के बीच राजधानी रांची में कॉमर्शियल सिलिंडरों की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है. कई जगहों पर सिलिंडर सरकारी दर से कहीं अधिक कीमत पर उपलब्ध कराये जा रहे हैं. रांची के डोरंडा स्थित एक रेस्टोरेंट के मालिक आदित्य भूषण सिंह ने बताया कि पहले उनके रेस्टोरेंट में कॉमर्शियल गैस सिलिंडर करीब 1800 रुपये में मिलता था, लेकिन अब कुछ सप्लायर इसे 2600 रुपये में देने की बात कर रहे हैं. उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में संकट बढ़ने के साथ ही कालाबाजारी की आशंका भी बढ़ सकती है.

प्रशासन ने शुरू की निगरानी

रांची में घरेलू गैस की आपूर्ति में आ रही परेशानी को देखते हुए जिला प्रशासन ने व्यवस्था को दुरुस्त करने की पहल शुरू कर दी है. उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री के निर्देश पर एसडीओ कुमार रजत ने पेट्रोलियम कंपनियों के क्षेत्रीय प्रबंधकों के साथ ऑनलाइन बैठक की. बैठक में निर्णय लिया गया कि दो गैस बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिनों का अंतराल अनिवार्य होगा. साथ ही बुकिंग के दो से तीन दिनों के भीतर होम डिलिवरी सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये हैं. इसके अलावा पांच और दो किलो के छोटे सिलिंडर बिना बुकिंग के उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है. प्रशासन ने तेल कंपनियों को टोल फ्री नंबर जारी करने और उस पर हमेशा कर्मी तैनात रखने का निर्देश भी दिया है, ताकि उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिल सके.

खूंटी और लोहरदगा में भी गैस की कमी

राजधानी के अलावा राज्य के अन्य जिलों में भी गैस की कमी देखने को मिल रही है. खूंटी में लंबे समय से गैस नहीं मिलने के कारण लोग काफी परेशान हैं. कई लोग गैस सिलिंडर लेकर वितरक के यहां चक्कर लगाते नजर आ रहे हैं. मंगलवार को जैसे ही इंडियन गैस की खेप खूंटी के अनिगड़ा स्थित गोदाम में पहुंची, बड़ी संख्या में उपभोक्ता वहां पहुंच गये. सुबह से ही लंबी कतार लग गयी. हालांकि एजेंसी द्वारा बिना बुकिंग गैस देने से इनकार किया जा रहा है. वहीं, लोहरदगा में भी एलपीजी सिलिंडर की कमी शुरू हो गयी है. गैस वितरकों का कहना है कि जमशेदपुर से सिलिंडरों की आपूर्ति नहीं हो पाने के कारण यह समस्या पैदा हुई है.

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शादी के मौसम में बढ़ी परेशानी

शादी-विवाह के मौसम में गैस की कमी से लोगों की परेशानी और बढ़ गयी है. कई परिवारों को खाना बनाने और अन्य घरेलू जरूरतों के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और गैस वितरण व्यवस्था को सामान्य करने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं. यदि कोई एजेंसी या वितरक कालाबाजारी करते पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन और तेल कंपनियों को उम्मीद है कि पैनिक बुकिंग पर नियंत्रण होने और नियमित आपूर्ति बहाल होने के बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगी.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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