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सरहुल से हम प्रकृति और पूर्वजों का स्मरण करते हैं

Updated at : 01 Apr 2025 9:10 PM (IST)
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सरहुल से हम प्रकृति और पूर्वजों का स्मरण करते हैं

जिले में प्राकृतिक पूजा सरहुल के अवसर पर एमजी रोड स्थित झखरा कुंबा में आदिवासी रीति रिवाज व परंपरा के साथ पूजा अर्चना की गयी.

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लोहरदगा. जिले में प्राकृतिक पूजा सरहुल के अवसर पर एमजी रोड स्थित झखरा कुंबा में आदिवासी रीति रिवाज व परंपरा के साथ पूजा अर्चना की गयी. इस अवसर पर समाज के मुख्य एवं विशिष्ट लोग शामिल हुए. इस अवसर पर पहान भूषण मुंडा, पुजार विष्णु उरांव, महतो डहरु उरांव ने आदिवासी रीति रिवाज के साथ पूजा अर्चना की. पूजा-अर्चना संपन्न होने के बाद शोभा यात्रा निकाली गयी. सरहुल की शोभा यात्रा झखरा कुंबा से निकलकर मेनका सिनेमा होते हुए बड़ा तालाब, शास्त्री चौक, गुदरी बाजार, राणा चौक, मिशन चौक ,बरवाटोली अजय सिंह पार्क, अल्का सिनेमा, पावरगंज चौक, कचहरी मोड देशवाली की टीम के साथ मैना बगीचा पहुंची. मैना बगीचा में सूप बैठने की रस्म पूरी की गयी. प्रकृति और संस्कृति का पर्व सरहुल को लेकर लोहरदगा में उत्साह चरम पर था. इस अवसर पर आदिवासी कल्याण मंत्री चमरा लिंडा, सांसद सुखदेव भगत, विधायक डॉ रामेश्वर उरांव सहित बड़ी संख्या में समाज के नेतृत्व करता एवं अन्य लोग मौजूद थे. सरहुल महोत्सव के दौरान स्थानीय लोक गीत और वाद्य यंत्र की धुन में लोगों में एक नयी ऊर्जा का संचार किया. सभी लोगों ने प्रकृति पर्व की शुभकामनाएं दी. मौके पर मुख्य अतिथि राज्य के जनजातीय मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि सरहुल पर्व के माध्यम से हम प्रकृति और पूर्वजों को स्मरण करते हैं. उन्होंने कहा कि यह पर्व उत्साह उल्लास उमंग के माहौल में प्रकृति से जुड़ने का मौका देता है. सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि प्रकृति पर्व सरहुल में प्रकृति की पूजा की जाती है. प्रकृति से ही जीवन संभव है. प्रकृति पूजा के साथ हम अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं. पूजा के बाद अच्छी बारिश उपज की कामना धरती माता से करते हैं. विधायक डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि भावनाओं से जुड़ा यह पर्व एक दूसरे को समझने का मौका देता है. सरहुल पर्व संदेश देता है कि प्रकृति को नुकसान नहीं पहुंचाया जाये. शोभायात्रा में लोगों ने पारंपरिक परिधानों से सज धज कर मांदर के थम थाप पर जमकर नृत्य किया. महिलाओं एवं बच्चों में खासा उत्साह देखा गया. मंत्री चमरा लिंडा ने पूजा अर्चना कर दी शुभकामनाएं लोहरदगा जिले में प्रकृति पर्व सरहुल की धूम रही. जनजातीय कल्याण मंत्री चमरा लिंडा, सांसद सुखदेव भगत, विधायक डॉ रामेश्वर उरांव और आदिवासी समाज के अगुवा खूब थिरकते नजर आये. लोहरदगा जिले में जिला सरहुल के मौके पर सरना स्थल झखरा कुंबा से प्रकृति की पूजा अर्चना कर केंद्रीय सरना समिति के नेतृत्व में भव्य शोभायात्रा और झांकी निकाली. जहां मुख्य अतिथि राज्य सरकार में जनजातीय कल्याण मंत्री चमरा लिंडा,अतिथि लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत, विधायक डॉ रामेश्वर उरांव शामिल हुए. शोभायात्रा में जिले भर आदिवासी समाज के हजारों महिलाएं पुरुष और बच्चे शामिल हुए. सभी आदिवासी पारंपरिक पोशाक में नजर आये. शोभायात्रा में मांदर की थाप पर मंत्री चमरा लिंडा, सांसद, विधायक तथा अन्य लोगों ने थिरकते हुए सरहुल नृत्य का आनंद लिया. मंत्री, सांसद, विधायक मांदर और नगाड़ा बजाकर झूमते नजर आए. इस दौरान मंत्री विधायक और सांसद ने प्रकृति पर्व पर प्रकृति बचाने और जल जंगल जमीन का बात कर उसे संरक्षित करने का अपील किया. सरहुल शोभायात्रा के स्वागत को लेकर विभिन्न स्थानों पर विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक दलों ने स्टॉल लगाया था. इस अवसर पर स्टॉल लगाकर सतू का शरबत, चना, पानी वितरण किया गया. इस अवसर पर न्यास के सच्चिदानंद लाल ,सुधीर अग्रवाल ,किनेश्वर महतो , मनोज दास, अनिल अग्रवाल, अजय प्रसाद, बिनय केशरी ,बिदेसी साहू सुनील अग्रवाल , देवेंद्र मंडल, जागेश्वर, दीपक, अरविंद अग्रवाल सहित अन्य मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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