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मनरेगा योजना में फर्जी दस्तावेज के सहारे बिचौलियों ने निकाले एक लाख रुपये

Updated at : 19 Oct 2025 7:58 PM (IST)
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मनरेगा योजना में फर्जी दस्तावेज के सहारे बिचौलियों ने निकाले एक लाख रुपये

मनरेगा योजना में फर्जी दस्तावेज के सहारे बिचौलियों ने निकाले एक लाख रुपये

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लातेहार ़ जिले के मनिका प्रखंड के नामुदाग पंचायत के चेचेंधा गांव में फर्जी दस्तावेज के सहारे बिचौलियों ने एक लाख रुपये की अवैध निकासी कर ली. गांव के मोहन यादव, उसकी पत्नी कमली देवी और बेटा सुनील यादव तीनों के नाम से अलग-अलग तीन इसीबी योजनाएं मनरेगा के तहत स्वीकृत की गयी है. प्रत्येक योजना की लागत 50 हजार है. लेकिन फर्जी दस्तावेजों के जरिये 100392 बिचौलियों ने राशि हड़प ली है. जबकि उक्त परिवार के पास योजना क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त जमीन नहीं है. मोहन यादव ने बताया कि उसके पास मात्र 29 डिसमिल जमीन है. बरसात के पूर्व कुछ टीसीबी खोदे गये थे. योजना कोड-3645991 में वास्तविक कार्य करने वाले मजदूरों का नाम नन्हक यादव, संजय यादव, विजय यादव और प्रदीप यादव है. मनरेगा आयुक्त को शिकायत पत्र सौंपा जायेगा : झारखंड सरकार सोशल ऑडिट सोसाइटी कार्यकारणी समिति सदस्य जेम्स हेरेंज ने मामले की जांच की. जिसमें काफी अनियमितता पायी गयी है. श्री हेरेंज ने बताया कि कानूनी प्रावधान के तहत 10 अक्तूबर को मनिका बीडीओ को जांच रिपोर्ट सौंपकर प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है. लेकिन बीडीओ स्तर से अब तक कोई कार्रवाई नही हुई है. जिससे प्रतीत होता है कि प्रखंड में भ्रष्टाचार रोकने में उनकी कोई रूचि नहीं है. उन्होंने बताया कि प्रखंड की उदासीनता के विरुद्ध जिले के उपायुक्त को भी वित्तीय गड़बड़ी की जांच के लिए पत्र लिखा गया है. साथ ही जल्द ही मनरेगा आयुक्त को शिकायत पत्र सौंपा जायेगा. उन्होंने बताया कि मोहन यादव की पत्नी और बेटे के नाम से स्वीकृत योजना में किसी भी तरह का कार्य नहीं किया गया है. जबकि उन दोनों नाम पर क्रमश: 12 और 18 फर्जी मजदूरों के नाम दर्ज कर कुल 69372 रुपये का गबन किया गया है. तीनों योजनाएं अप्रैल तथा मई 2025 में क्रियान्वित दिखाया गया है. जबकि इस अवधि में अमृत यादव पंजाब में, सरयू यादव और इंद्रदेव यादव केरल में पलायन किये हुए हैं. योजनाओं के स्थलीय जांच की भनक लगते ही आनन-फानन में आठ अक्तूबर को सरसों बुने हुए जमीन में दिखाने के लिए टीसीबी खोदा जा रहा है. जबकि योजना इसीबी खुदाई की है. जिसमें गड्ढों की साइज भी अलग होती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SHAILESH AMBASHTHA

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