लोहरदगा में 20 जुलाई तक हुई 73.7 मिमी बारिश, किसानों की चिंता बढ़ी
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 21 Jul 2023 1:43 PM
धनरोपनी का समय भी गुजरता जा रहा है. मानसून की बेरूखी इसी तरह बनी रही तो निश्चित तौर पर इस वर्ष भी किसानों को सुखाड़ जैसी विभीषका का सामना करना पड़ेगा.
लोहरदगा जिला की अधिकांश आबादी कृषि कार्य से जुड़े हुए हैं. परंतु हाल के दिनों में मौसम के बदलते रूख से किसानों के मस्तिष्क पर चिंता सता रही है. किसान सुखाड़ जैसी आशंका से व्याकुल है. प्रभावित किसानों का कहना है कि बड़ी उम्मीदों के साथ बेहतर उत्पादन की आस में उम्दा किस्म के महंगे धान बीज की खरीदारी कर अपने खेतों में बीज की बुआई की गई. साथ ही साथ लगातार अपनी श्रमशक्ति लगाने व पटवन करने बाद धान का बिचड़ा तैयार हो चुका है.
और जब इसे रोपाई की बारी आयी तो मानसून ने दगा दे दिया. धीरे-धीरे पककर बूढ़ा होने लगा है. धनरोपनी का समय भी गुजरता जा रहा है. मानसून की बेरूखी इसी तरह बनी रही तो निश्चित तौर पर इस वर्ष भी किसानों को सुखाड़ जैसी विभीषका का सामना करना पड़ेगा. यहां उल्लेखनीय हो कि लोहरदगा जिला में जुलाई माह की औसत वर्षा 305 मिमी होती है, परंतु इस वर्ष 20 जुलाई तक 73.7 मिमी ही वर्षा हुई. जिले के सामान्य वर्षा पार्क के तुलना में महज 24.17 प्रतिशत ही वर्षा हो पायी हैं
कम वर्षा के कारण खेतों में लगे धान के बिचड़े बर्बाद हो रहे हैं. प्रभावित किसान किसी तरह पटवन कर बिचड़े को बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं और हर रोज बारिश की उम्मीद में किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं. कभी-कभार आसमान में घने बादल भी छा रहे हैं, परंतु हल्की बूंदा-बांदी के बाद आसमान साफ हो जा रहा है तथा सूर्य की चमकती किरणें किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर रही है. जिले में अल्प बारिश होने के कारण चंद साधन संपन्न किसान विलियर्स मशीन के माध्यम से पटवन कर धान बिचड़ा की बुवाई किया है.
परंतु अधिकांश किसान अभी भी मानसून की इंतजार में बैठे हैं. जिला कृषि विभाग के अनुसार जिले में अभी तक महज 1. 73 प्रतिशत ही धान रोपनी का कार्य पूर्ण हुआ है. जबकि जिले में लगभग 50 हजार हेक्टेयर धान की रोपाई का लक्ष्य रखा गया हैं. इधर कृषि वैज्ञानिक डॉ हेमंत पांडेय का कहना है कि कम वर्षा से खेती प्रभावित हुई है. अभी तक हर हाल में धान की रोपाई का शुरू ही जानी चाहिये. परंतु वर्षा की वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा संभव नहीं लगता हैं. ऐसी परिस्थिति में किसानों को वैकल्पिक खेती की ओर ध्यान देना चाहिए. और उरद, कुर्थी, मूंग, मसूर आदि की खेती कर सकते है.
कैरो में 171.2 तथा किस्को में 23.2 मिमी हुई वारिश : जुलाई माह में जिले का सामान्य वर्षापात 305 मिमी हैं. जबकि अब तक मात्र 73 पॉइंट 4 मिली मीटर वर्षा हुई है प्रखंड वार देखे तो लोहरदगा सदर प्रखंड में 20 जुलाई तक 45.2 मिमी वर्षा हुई. इसी तरह सेन्हा प्रखंड में 90.8, भंडरा प्रखंड में 87.0, कुडू प्रखंड में 41.6, किस्को प्रखंड में 23.2, कैरो प्रखंड में 171.2 व 57.0 मिमी वारिश हुए हैं. इस तरह देखा जाय तो जिले के कैरो प्रखंड में सर्वाधिक 171.2 मिमी वर्षा हुई हैं. जबकि सबसे कम किस्को प्रखंड में मात्र 23.2 मिमी बारिश हुई है.
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