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बरही में हुई ढेलामार होली, भक्तों को मिलता है दैविक शक्ति का वरदान

Updated at : 03 Mar 2026 4:40 PM (IST)
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Holi

ढेलामार होली खेलते लोग.

Lohardaga: लोहरदगा के बरही में ढेलामार खोली खेली गई. यह एक पुरानी परंपरा है, जिसमें गांव के सभी लोग शामिल होते हैं. किसी भी बाहरी के प्रवेश पर रोक रहती है.

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गोपी कुंवर
Lohardaga: होली का त्यौहार क्षेत्र के अनुसार हर जगह पर अनोखे ढंग से मनाया जाता है.कहीं लट्ठमार, तो कहीं जुलूस निकाल कर तो कही मटका फोड़ सहित अनेकों तरह से होली का त्यौहार मनाया जाता. देशभर में रंगों का त्यौहार विविधता से भरा है. वहीं लोहरदगा जिला के सेन्हा प्रखंड क्षेत्र के सेरेंगहातु पंचायत अन्तर्गत बरही ग्राम में अनोखे रूप से रंगों का त्यौहार मनाया जाता है. जो ढेलामार होली के नाम पर प्रसिद्ध है. यह परंपरा संदियो से चला आ रहा है. जिसे बरही ग्राम में रंगों का त्यौहार अनोखे रूप से समस्त ग्रामीणों द्वारा ढेला मार होली खेल कर मनाया जाता है. यह परंपरा सदियों पुराना है.

आज भी निभाई जाती है पुरानी परंपरा

इस संदर्भ में पूर्व जिला परिषद सदस्य सह विहिप जिलाध्यक्ष रामलखन प्रसाद एवं समाजसेवी ग्रामीण परमानंद महतो,महावीर प्रसाद साहू,बहादुर महतो सहित अन्य लोगों का कहना है कि झारखंड राज्य के बरही ग्राम में अनोखे रूप से रंग अबीर के बाद ढेलामार होली खेला जाता है और स्थानीय गाजे बाजे के साथ इस परंपरा को निभाया जाता है. इसमें महिला, पुरुष, बच्चे-बच्चियां त्यौहार का आनंद उठाते हैं. लोगों ने बताया कि ढेलामार होली में दैविक शक्ति का वरदान गांव के भक्तों को प्राप्त होता है.

बाहरी व्यक्ति के शामिल होने पर रोक

गांव के लोग श्रद्धा भाव से इस रस्म में भाग लेते हैं. इस परंपरा के निभाने के दौरान गांव के बाहर से कोई भी शख्स इस कार्यक्रम में भाग नहीं ले सकता है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर इस कार्यक्रम में बाहरी व्यक्ति भाग लेता है तो इस पर अप्रिय घटना होने की संभावना बनी रहती है. इससे पूर्व भी ढेलामार होली परंपरा में बाहर के लोग भाग लिए थे. जिनके साथ अप्रिय घटना घट चुकी है.

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

ग्रामीणों का कहना है कि ढेलामार होली में गांव के ही लोग भाग लेते हैं. जो देवी मंदिर के समीप फगुवा टांड में गड़ा हुआ खूंटे को उखाड़ कर भागते है तो उन लोगों पर ढेला बरसाया जाता है. साथ ही इस के अलावा इस गांव में नये दामादों का स्वागत का एक अनूठा कार्यक्रम आयोजित किया जाता है. जो इस वर्ष किसी कारण से आयोजन नहीं हुआ. होली के दिन गांव के नये दामादों को सम्मान के साथ आदर सत्कार से स्वागत किया जाता है. चाहे वह किसी जाति समाज का हो सभी का मान सम्मान के साथ समस्त ग्रामीणों के द्वारा स्वागत किया जाता है. जो इस बार आयोजन नही किया गया. ढेलामार होली के दौरान किसी तरह का अप्रिय घटना ना हो इसके लिये पुलिस प्रशासन भी सुरक्षा व्यवस्था में मुस्तैद थी.

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AmleshNandan Sinha

लेखक के बारे में

By AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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