धान की नर्सरी में ब्लास्ट रोग का खतरा, बचाव को लेकर कृषि वैज्ञानिक ने दी सलाह

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धान की नर्सरी में ब्लास्ट रोग से फसल को बचाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने खास सलाह दी है। सही दवा और खाद के प्रयोग से पैदावार बढ़ाएं।

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किस्को. लोहरदगा जिले में इस समय मौसम में नमी अधिक और हवा कम होने से धान की नर्सरी में फफूंद जनित ब्लास्ट रोग लगने की संभावना बढ़ गयी है. कृषि वैज्ञानिक डॉ किरण सिंह ने किसानों को समय रहते बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है. उन्होंने बताया कि इस रोग से बचाव के लिए किसान हेक्साकोनाजोल 50% ट्राइफ्लोक्सीस्ट्रोबिन 25% का 0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर 7 से 10 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करें. रोपाई के लिए केवल 20 से 25 दिन पुराने स्वस्थ पौधों का ही चयन करें, क्योंकि अधिक उम्र के पौधों से पैदावार घट जाती है. रोपाई हमेशा 20x10 सेमी की दूरी पर कतार बनाकर करें, ताकि पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिल सके.

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संतुलित खाद का करें प्रयोग: डॉ किरण सिंह के अनुसार, रोपाई से पूर्व खेत में प्रति हेक्टेयर 100 किग्रा नाइट्रोजन, 60 किग्रा फॉस्फोरस, 40 किग्रा पोटाश और 25 किग्रा जिंक सल्फेट का संतुलित इस्तेमाल करें. जिन खेतों में पानी जमा रहता है, वहां मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए नील-हरित शैवाल (बीजीए) का एक पैकेट प्रति एकड़ की दर से डालें. कृषि पदाधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि वे नर्सरी की नियमित निगरानी करें और रोग के शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत फफूंदनाशक का छिड़काव करें.


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