खाता न बही, भूमि संरक्षण विभाग जो कहे, वही सही

Updated at : 28 Jun 2019 1:56 AM (IST)
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खाता न बही, भूमि संरक्षण विभाग जो कहे, वही सही

कुड़ू ( लोहरदगा) : भूमि संरक्षण विभाग लोहरदगा द्वारा जल संचयन को लेकर कराये जा रहे तालाब जीर्णोद्धार के नाम पर भारी गड़बड़ी प्रखंड क्षेत्र में हो रही है. तालाब जीर्णोद्धार का काम पानी पंचायत लाभुक के द्वारा कराये जाने का प्रावधान है, लेकिन प्रखंड क्षेत्र में तालाब जीर्णोद्धार के नाम पर फर्जी ग्राम सभा […]

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कुड़ू ( लोहरदगा) : भूमि संरक्षण विभाग लोहरदगा द्वारा जल संचयन को लेकर कराये जा रहे तालाब जीर्णोद्धार के नाम पर भारी गड़बड़ी प्रखंड क्षेत्र में हो रही है. तालाब जीर्णोद्धार का काम पानी पंचायत लाभुक के द्वारा कराये जाने का प्रावधान है, लेकिन प्रखंड क्षेत्र में तालाब जीर्णोद्धार के नाम पर फर्जी ग्राम सभा के माध्यम से पानी पंचायत बनायी गयी तथा पानी पंचायत में शामिल लाभुकों का ना तो तालाब से, ना ही आसपास की सिंचित जमीन से कोई वास्ता है.

मॉनसून आगमन के पहले तालाब खुदाई शुरू कराया गया तथा मॉनसून आते ही काम जैसे -तैसे पूर्ण करा सरकारी राशि की निकासी करा ली गयी. नतीजतन तालाब, परकोलेशन टैंक पहली बरसात भी झेल नहीं पाया. तालाब सूख गये हैं. जल संचयन की योजना प्रखंड में फेल होकर रह गयी है.
योजना शुभारंभ का भटक गया उद्देश्य , पानी पंचायत का क्या है प्रावधान : जल संसाधन विभाग द्वारा पानी संरक्षण को लेकर भूमि संरक्षण विभाग द्वारा वैसे तालाब, जिनमें सालों भर पानी रहता है. निजी, सरकारी तथा गैरमजरूआ भूमि पर वर्षों पहले बने तालाब, पांच साल के भीतर उक्त तालाब में मनरेगा समेत किसी भी विभाग द्वारा कोई काम नहीं कराया गया है.
ऐसे तालाबों को चिह्नित करते हुए तथा प्रखंड सह अंचल कार्यालय के द्वारा भूमि सत्यापन के बाद जीर्णोद्धार कराया जाना है. तालाब की खुदाई तथा सफाई कराते हुए पानी के लेबल को बरकरार रखना, तालाब के आसपास के जमीन के किसानों को सालों भर खेती के लिए पानी मुहैया कराना था, लेकिन तालाब जीर्णोद्धार के नाम पर प्राक्कलन के अनुसार कहीं खुदाई नहीं कराया गया.
जैसे – तैसे खुदाई के नाम पर लीपापोती करते हुए योजना को पूर्ण कर तालाब जीर्णोद्धार के नाम पर आवंटित राशि की निकासी कर ली गयी. बताया जाता है कि राज्य सरकार के द्वारा तालाब जीर्णोद्धार के लिए पानी पंचायत गठन को लेकर जो गाइडलाइन जारी किया गया है, नियम के अनुसार निजी तालाब के मालिक तथा तालाब से सिंचित होनेवाले जमीन के मालिक तालाब से सटे किसानों की ग्रामसभा बैठक के बाद पानी पंचायत का गठन करते हुए तालाब जीर्णोद्धार का काम शुरू कराया जाये.
तालाब से निकलनेवाली मिट्टी को तालाब से दूर डंप किया जाये, लेकिन कुड़ू प्रखंड में सरकार के गाइडलाइन को ध्यान में नहीं रखा गया. पिछले सत्र 2017 – 2018 में प्रखंड में एक दर्जन तालाब का भूमि संरक्षण विभाग के द्वारा जीर्णोद्धार कराया गया, लेकिन शायद ही किसी तालाब में प्राक्कलन के अनुसार काम हो पाया हो. कई स्थानों पर बने परकोलेशन टैंक टूट गया. तालाब बह गया. जांच हुई, लेकिन नतीजा सिफर रहा.
इस साल भी भूमि संरक्षण विभाग द्वारा एक दर्जन तालाब के जीर्णोद्धार के लिए भूमि सत्यापन तथा बीडीओ की अनुशंसा मांगी गयी है.
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