सिदो,कान्हू का देश को आजाद कराने में बहुत बड़ा योगदान

Updated at : 01 Jul 2018 4:14 AM (IST)
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सिदो,कान्हू का देश को आजाद कराने में बहुत बड़ा योगदान

विकास भारती विशुनपुर कृषि सिंगल विंडो सेंटर में कार्यक्रम किस्को,लोहरदगा : विकास भारती विशुनपुर कृषि सिंगल विंडो सेंटर में हूल दिवस का आयोजन प्रमुख सरिता देवी की अध्यक्षता में हुई. संचालन रामजीत उरांव ने किया. मौके पर सरिता देवी ने कहा कि बहुत खुशी की बात है कि स्वतंत्र भारत में हम सांस ले रहे […]

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विकास भारती विशुनपुर कृषि सिंगल विंडो सेंटर में कार्यक्रम

किस्को,लोहरदगा : विकास भारती विशुनपुर कृषि सिंगल विंडो सेंटर में हूल दिवस का आयोजन प्रमुख सरिता देवी की अध्यक्षता में हुई. संचालन रामजीत उरांव ने किया. मौके पर सरिता देवी ने कहा कि बहुत खुशी की बात है कि स्वतंत्र भारत में हम सांस ले रहे हैं और घूम रहे है़ं इसमें सिर्फ वीर सेनानियों का बहुत बड़ा योगदान है़ उन्होंने कहा कि सिदो,कान्हू, चांद, भैरव और बिरसा मुंडा का देश को आजाद करने में बहुत बड़ा योगदान रहा है. जिसके कारण हम हूल दिवस मना रहे है़ं इस दौरान सरिता देवी ने लोगों को झारखंड के अमर शहीदों की श्रद्धांजलि के लिए खेती बढ़ाने, पेड़ लगाने, पानी बचाने एवं जंगल बचाने की अपील की.
जिससे पर्यावरण की सुरक्षा हो सके और शहीदों का सपना साकार हो सके. मौके पर सिंगल विंडो के फील्ड समन्वयक अनिल कुमार ने कहा कि संथाल परगना को पहले जंगल तराई के नाम से जाना जाता था. वहां पर 1790 से 1830 ई के बीच आदिवासी बसे फिर वहां से दो वीर सिदो,कान्हू ने साहेबगंज जिला के भोगनाडीह गांव में जन्म लिया. फिर 1855 से 1856 में ब्रिटिश सरकार और साहूकारों के खिलाफ जंग छेड़ा गया. इस भयंकर मुठभेड़ में संथालो की हार हुई. क्योंकि सिदो, कान्हू तीर- धनुष से लड़ रहे थे. जबकि अंग्रेजों के पास आधुनिक हथियार थे. सिदो को अगस्त 1855 में पकड़ कर पंचकठिया नामक जगह पर बरगद के पेड़ पर फांसी दे दी गयी. वह पेड़ आज भी पंचकठिया में स्थित है जिसे शहीद स्थल कहा जाता है. फिर कान्हू को बंदी बना कर फांसी दे दी गयी, ये आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं. जिसे याद करने और आदिवासियों को जागरूक करने के लिए 30 जून को हूल दिवस के रूप में मनाया जाता है. मौके पर कृषि सिंगल विंडो से मीना देवी, मनोरमा बाड़ा, सुरेश लोहरा सहित अन्य लोग उपस्थित थे.
सेन्हा में हूल क्रांति दिवस मना
सेन्हा,लोहरदगा़ प्रखंड सभागार में विकास भारती के कृषि सिंगल विंडो सेंटर सह सीएफटी परियोजना के संयुक्त तत्वावधान में हूल क्रांति दिवस मनाया गया. उद्घाटन प्रखंड बीस सूत्री अध्यक्ष रामकिशोर शुक्ला, क्षेत्रीय समन्वयक देवेंद्र मंडल, कृषि सिंगल विंडो सेंटर के प्रखंड समन्वयक पिंकी जायसवाल, सीएफटी, जिला ग्राम स्वराज समन्वयक प्रणव पाठक, आजीविका विशेषज्ञ राजदीप लोहरा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया. मौके पर देवेंद्र मंडल ने कहा कि देश की आजादी में सिदो, कान्हू, चांद,
भैरव की महत्वपूर्ण भूमिका थी. उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए जल संचय भी समय की विशेष मांग है. जिसे हमें करना अत्यंत आवश्यक है. मौके पर प्रणव पाठक ने कहा कि झारखंड में स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल सिदो, कान्हू ने संथाल परगना क्षेत्र के भोगनाडीह गांव से बिगुल फूंका जिनके बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता है. रामकिशोर शुक्ला ने कहा कि आज हम गरीबी और बेरोजगारी की गुलामी से जूझ रहे हैं. गरीबी को कृषि क्रांति के माध्यम से हम दूर कर सकते हैं.
सिंगल विंडो की प्रखंड समन्वयक पिंकी जायसवाल ने कहा कि स्वयं की जिंदगी तो सभी जीते हैं परंतु हमारा जीवन तभी सार्थक होता है जब हम समाज और देश के लिए जीयें और हमारा जीवन भी श्रेष्ठ और उन्नत हो. कृषि सिंगल विंडो सेंटर के तत्वावधान में लगभग 100 किसानों के बीच अनुदानित दर पर धान बीज का वितरण किया गया. मौके पर श्याम कुजूर, धर्मवीर भगत, जगदीश लकड़ा, सीएफटी के प्रखंड समन्वयक रामस्वार्थ महतो, नरेश प्रजापति, किसान विश्राम लोहरा, अशोक उरांव, रुदन उरांव, मालती देवी सहित अन्य लोग उपस्थित थे.
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