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ग्रामीणों ने चंदा कर दो दिन में बनाया 250 फीट लंबा पुल

Updated at : 27 Jun 2020 11:45 PM (IST)
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ग्रामीणों ने चंदा कर दो दिन में बनाया 250 फीट लंबा पुल

लातेहार जिले के हेरहंज प्रखंड के कटांग गांव में ग्रामीणों ने दो दिन में श्रमदान व चंदा कर 250 फीट लंबा पुल बना डाला. एक लाख रुपये की लागत से बांस, तार और एंगल से बने पुल पर बाइक सवार भी आ-जा सकते हैं. पुल बन जाने से करीब आठ गांवों के चार हजार से अधिक लोगों को अब बरसात में प्रखंड मुख्यालय हेरहंज जाने से वंचित नहीं होना पड़ेगा. अमूमन बरसात में उक्त गांव के लोग पुल नहीं होने के कारण प्रखंड मुख्यालय से कट जाते थे. इससे बीमार लोगों को बड़ी मुश्किल होती थी. उन्हें इलाज तक की सुविधा नहीं मिल पाती थी.

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हेरहंज : लातेहार जिले के हेरहंज प्रखंड के कटांग गांव में ग्रामीणों ने दो दिन में श्रमदान व चंदा कर 250 फीट लंबा पुल बना डाला. एक लाख रुपये की लागत से बांस, तार और एंगल से बने पुल पर बाइक सवार भी आ-जा सकते हैं. पुल बन जाने से करीब आठ गांवों के चार हजार से अधिक लोगों को अब बरसात में प्रखंड मुख्यालय हेरहंज जाने से वंचित नहीं होना पड़ेगा. अमूमन बरसात में उक्त गांव के लोग पुल नहीं होने के कारण प्रखंड मुख्यालय से कट जाते थे. इससे बीमार लोगों को बड़ी मुश्किल होती थी. उन्हें इलाज तक की सुविधा नहीं मिल पाती थी.

देसी तकनीक : ग्रामीण कई बार सांसद व विधायक से पुल बनाने की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन परिणाम शून्य निकला.

इसके बाद ग्रामीणों ने खुद ही पुल बनाने का निर्णय लिया. चंदा कर पहले पैसे जुटाये. इसके बाद देसी तकनीक का इस्तेमाल कर पुल बना दिया. पुल देखने में हरिद्वार का लक्ष्मण झूला की तरह दिखता है. इस हिलनेवाले पुल पर गुजरना भी काफी रोमांचक है. इस पुल के बन जाने से कटांग, मारी, कुसमाही, बरखेता, आसुवे, पाडरम और कच्चा समेत अन्य गांवों के लोगों को बरसात के दिनों में परेशानी नहीं होगी.

सर्वसम्मति से निर्णय लिया

ग्रामीणों ने कटांग नदी में अस्थायी पुल बनाने के पहले बैठक की. इसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आपसी मदद से पुल बनाया जाये. इसके लिए नदी किनारे वैसे स्थल का चुनाव किया गया, जहां दोनों किनारों पर मोटे-मोटे पेड़ हों. इसके बाद मोटे तार की तीन लाइन दोनों ओर के पेड़ में खींचकर एंगल के सहारे बांध दिया गया.

इस तार पर बांस की कमांची बांधी गयी. रास्ता बन जाने पर करीब तीन-चार फीट ऊपर दो मोटे तार रेलिंगनुमा बना कर पेड़ से बांध दिये गये. अब दोनों ऊपर व नीचे के तार में सपोर्ट के लिए पतले तार बांधे गये. ग्रामीणों ने बताया कि इन पतले तारों में तार की जाली बनायी जायेगी, ताकि किसी को गिरने का भय नहीं रहे.

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