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लोगों ने मांगी मुल्क में अमन चैन की दुआ

Updated at : 28 Mar 2025 8:44 PM (IST)
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लोगों ने मांगी मुल्क में अमन चैन की दुआ

अलविदा जुमे की नमाज को लेकर शुक्रवार को मस्जिदों में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी.

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कोडरमा़ अलविदा जुमे की नमाज को लेकर शुक्रवार को मस्जिदों में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. रमजान उल मुबारक के अंतिम जुमे पर लोगों ने अल्लाह की बारगाह में सिर झुका कर आनेवाले वर्ष में रमजान उल मुबारक की बरकत महीना इनायत करने व मुल्क में अमन-चैन की दुआ मांगी़ जिले की सभी मस्जिदों में लोगों ने अलविदा जुमे की नमाज अदा की़ ज्ञात हो कि रमजान उल मुबारक का 27वां रोजा मुकम्मल हो चुका है. एक माह तक चलने वाले बा-बरकत व रहमत का माह अब रुख्सत हो रहा है़ रमजान के अंतिम अशरा में लोग ज्यादा समय इबादत में लगा रहे हैं. लोगों का मानना है कि इस माह में इबादत करने से उनके सारे अगले-पिछले गुनाह माफ कर दिये जाते हैं.

अलविदा जुमा सबसे अफजल जुमा है

उलेमाओं ने कहा कि अलविदा का मतलब है किसी चीज के रुख्सत होने का यानी रमजान हमसे रुख्सत हो रहा है, इसलिए इस मौके पर जुमे में अल्लाह से खास दुआ की जाती है कि आनेवाला रमजान हम सब को नसीब हो़ रमजान के महीने में आखिरी जुमा (शुक्रवार) को ही अलविदा जुमा कहा जाता है़ अलविदा जुमा रमजान माह के तीसरे अशरे (आखिरी 10 दिन) में पड़ता है़ यह अफजल जुमा होता है़ इससे जहन्नम (दोजक) से निजात मिलती है़ वहीं अलविदा जुमा को अल्लाह ने सबसे अफजल जुमा करार दिया है़ हदीस शरीफ में इस जुमे को सय्यदुल अय्याम कहा गया है़ माह-ए-रमजान से मुहब्बत करने वाले कुछ लोग अलविदा के दिन गमगीन हो जाते हैं. यह आखिरी असरा है, जिसमें एक ऐसी रात होती है, जिसे तलाशने पर हजारों महीने की इबादत का लाभ एक साथ मिलता है़ यूं तो जुमे की नमाज पूरे साल ही खास होती है, पर रमजान का आखिरी जुमा अलविदा सबसे खास होता है़

अल्लाह अपने हर बंदों पर रहम फरमाता है : मुफ्ती नसीम

अलविदा जुमा के मौके पर काजी-ए- शहर मुफ्ती नसीम कासमी ने मस्जिद-ए-अक्सा असनाबाद में नमाजियों को संबोधित करते हुए कहा कि रमजान उल मुबारक महीना हमसे रुख्सत हो रहा है़ रहमतों, बरकतों वाला यह महीना हमें आपस में प्यार, मोहब्बत और अल्लाह के बताये हुए रास्ते पर चलने की सीख देता है़ रमजान के आखिरी अशरे में अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगनी चाहिए़ अल्लाह अपने हर बंदों पर रहम फरमाता है़ हदीस-ए-पाक के मुताबिक रजमान-उल-मुबारक के मुकद्दस महीना में जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और जहन्नम के दरवाजे बंद कर दिये जाते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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