सूख गये नदी, तालाब व चापानल
Updated at : 28 Apr 2016 7:58 AM (IST)
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पानी के लिए मचा हाहाकार. जयनगर प्रखंड में 2055 चापानलों में 341 खराब जयनगर : तपती गरमी व लू के थपेड़ों से जहां लोग परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर पूरे क्षेत्र में पानी के लिए हहाकार मचा है. लोगों को बड़ी मशक्कत के बाद पानी मिल रहा है. पशु पक्षी नदी व ताल तलैये के […]
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पानी के लिए मचा हाहाकार. जयनगर प्रखंड में 2055 चापानलों में 341 खराब
जयनगर : तपती गरमी व लू के थपेड़ों से जहां लोग परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर पूरे क्षेत्र में पानी के लिए हहाकार मचा है. लोगों को बड़ी मशक्कत के बाद पानी मिल रहा है. पशु पक्षी नदी व ताल तलैये के सूख जाने से अपनी प्यास बुझाने के लिए भटकते नजर आ रहे हैं. सरकार द्वारा सभी पंचायतों में डोभा निर्माण की घोषणा की गयी है.
जब धरती पर 30 से 35 फीट तक पानी नहीं मिलता, ऐसे में डोभा का निर्माण महज खानापूर्ति है. टैंकर से जलापूर्ति की चर्चा रोज होती है, मगर अभी तक जलापूर्ति शुरू नहीं की गयी है. पूरे प्रखंड में कुल 2055 चापानल लगे हैं.
इसमें से 341 खराब हैं. जबकि 1714 चापानल चालू है, मगर उससे पर्याप्त पानी नहीं आ रहा हैं. प्रखंड के अक्तो, हरहारो, केशो नदी, चरकी पहरी चैक डैम, जयनगर पोखर, धरेयडीह तालाब, बाराडीह सोती पूरी तरह सूख गये हैं. उनके सूखने से कटहाडीह, जयनगर, पहरीडीह, गोपालडीह, महुआटांड़, पहाड़पुर, ककरचोली, तरवन, इरगोबाद, सरमाटांड़, सतडीहा, योगियाटिल्हा, तिलोकरी, गडगी समेत कई ऐसे गांव है, जो उन्ही नदियों पर आश्रित हैं. इन गांव के लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. फिलहाल क्षेत्र का पारा 41 डिग्री सेल्सियस है. पानी के अभाव में जेठुआ सब्जी भी बरबाद हो रही है.
लतवेधवा उच्च विद्यालय में पेयजल संकट
प्रखंड के उच्च विद्यालय लतवेधवा में छात्र छात्राओं व शिक्षकों के समक्ष गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है. स्कूल का एक मात्र कुआं पूरी तरह से सूख गया है, जबकि चापानल खराब पड़ा है. यहां अध्ययनरत 307 छात्र-छात्राओं को बगल के मध्य विद्यालय के चापानल से पानी लाना पड़ता है. विद्यार्थी बताते हैं कि उक्त चापानल भी उन्हें पर्याप्त पानी नहीं दे पा रहा है.
सरकार ने वर्ग एक से आठ तक की कक्षाओं को 28 अप्रैल से बंद करने का निर्णय लिया है, जबकि नौवीं से बारहवीं तक की कक्षा 6:30 बजे से 10:30 बजे तक चलेगी. मगर आंगनबाड़ी केंद्र के 0 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है. इन बच्चों को चिलचिलाती धूप में केंद्र जाना पड़ता है. स्थानीय लोगों ने भीषण गरमी को देखते हुए आंगनबाड़ी केंद्रों में भी गरमी छुट्टी करने की मांग की है.
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