सड़ी पाइप लाइन, मशीनों में लगी जंग
Updated at : 27 Apr 2016 12:50 AM (IST)
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डोमचांच में दम तोड़ रहे चापानल, सूख गये कई कुएं बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं लोग, कई किलोमीटर दूर से लाना पड़ता है पानी, वर्षों से बंद करोड़ों की जलापूर्ति योजना का हाल बेहाल डोमचांच : प्रखंड व आसपास के क्षेत्र में गरमी शुरू होते ही पेयजल संकट गहरा गया है. क्षेत्र के नदी, […]
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डोमचांच में दम तोड़ रहे चापानल, सूख गये कई कुएं
बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं लोग, कई किलोमीटर दूर से लाना पड़ता है पानी, वर्षों से बंद करोड़ों की जलापूर्ति योजना का हाल बेहाल
डोमचांच : प्रखंड व आसपास के क्षेत्र में गरमी शुरू होते ही पेयजल संकट गहरा गया है. क्षेत्र के नदी, तालाब 10-15 दिन पहले ही सूख चुके हैं, अब चापानल भी दम तोड़ने लगे हैं तो कई जगहों पर कुआं तक भी सूख गये हैं. ऐसे में आम जनता बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान दिख रही है. परेशानी का आलम यह है कि लोगों को पेयजल कई किलोमीटर दूर से जुगाड़ कर लाना पड़ रहा है. लोगों की मानें, तो हाल के वर्षों में इस बार पानी के लिए अधिक किल्लत है.
इधर, डोमचांच में वर्षों पूर्व करोड़ों रुपये की लागत से बनी जलापूर्ति योजना शुरू होने की बजाय और बदतर हो गयी है. करोड़ों की मशीनें जंग खा गयी हैं, तो पाइप लाइन सड़ चुके हैं. कई जगहों पर चोरों ने पाइप लाइन की चोरी कर ली है. जानकारी के अनुसार प्रखंड में करोड़ों की लागत से तैयार जलापूर्ति योजना पिछले करीब 25 वर्षों से ज्यादा समय से बंद पड़ी है. ऐसे में यहां के 40 हजार लोग प्रभावित हो रहे हैं, जलापूर्ति के लिए मसमोहना नदी तक लगायी गयी आठ किलोमीटर तक पानी की पाइप लाइन सड़ गयी है.
वहीं पीएचइडी विभाग का कार्यालय क्षतिग्रस्त व जलमीनार की स्थिति जर्जर हो चुकी है. जलमीनार के आसपास तो झाड़ियां तक उग गयी हैं. वाटर रिफाइनरी सेक्शन जर्जर है. विभाग ने मसमोहना नदी में डीप बोरिंग के माध्यम से लोगों को पानी मुहैया कराना शुरू किया था, पर कुछ वर्षों बाद ही यह योजना बंद हो गयी. इतना कुछ होने के बावजूद स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इसके लिए सवाल उठाये, पर उनकी भी एक नहीं चली.
1983 में शुरू हुई थी जलापूर्ति योजना
बताया जाता है कि 1976-77 में डोमचांच में जलापूर्ति योजना को लेकर शिलान्यास हुआ था. इसके बाद दो दिसंबर 1983 को करोड़ों रुपये की लागत से डोमचांच में पेयजल आपूर्ति के लिए योजना चालू की गयी थी. इसका उदघाटन लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग बिहार सरकार के तत्कालीन मंत्री रामआश्रय प्रसाद सिंह ने किया था.
शुरुआत में यह योजना सिर्फ पांच वर्षों तक चालू रही. इसके बाद जलापूर्ति बंद हो गयी. बाद में इसे पुन: वर्ष 1991 में शुरू किया गया, पर कुछ माह बाद ही बंद हो गया. इस योजना के बंद रहने से डोमचांच, महेशपुर, चैनपुर, तेतरियाडीह, महथाडीह, दुरोडीह, बंगाय, मसमोहना, शिवसागर, बेहराडीह, बंगाखलार, काराखूट आदि क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं.
योजना सिर्फ पांच वर्षों तक चालू रही
बताया जाता है कि 1976-77 में डोमचांच में जलापूर्ति योजना को लेकर शिलान्यास हुआ था. इसके बाद दो दिसंबर 1983 को करोड़ों रुपये की लागत से डोमचांच में पेयजल आपूर्ति के लिए योजना चालू की गयी थी.
इसका उदघाटन लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग बिहार सरकार के तत्कालीन मंत्री रामआश्रय प्रसाद सिंह ने किया था. शुरुआत में यह योजना सिर्फ पांच वर्षों तक चालू रही. इसके बाद जलापूर्ति बंद हो गयी. बाद में इसे पुन: वर्ष 1991 में शुरू किया गया, पर कुछ माह बाद ही बंद हो गया. इस योजना के बंद रहने से डोमचांच, महेशपुर, चैनपुर, तेतरियाडीह, महथाडीह, दुरोडीह, बंगाय, मसमोहना, शिवसागर, बेहराडीह, बंगाखलार, काराखूट आदि क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं.
जल्द कारगर कदम उठायें प्रशासन
डोमचांच निवासी उमेश कुमार, नीलकंठ सिंह, जहूर अली, नरेश वर्णवाल, नौरंगी राम ने बताया कि गरमी अभी शुरू हुई है, पर अभी से पेयजल की किल्लत है. आसपास के क्षेत्र में लोग परेशान हैं, प्रशासन की ओर से भी कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है. लोग किसी तरह पानी का जुगाड़ कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रशासन को पेयजल समस्या से निजात दिलाने के लिए जल्द ही कारगर कदम उठाना चाहिए.
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