घोड़साही में सड़क नहीं होने से परेशान हैं लोग

Updated at : 06 Jul 2019 1:55 AM (IST)
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घोड़साही में सड़क नहीं होने से परेशान हैं लोग

सतगावां : प्रखंड के सुदूरवर्ती नक्सल प्रभावित पंचायत कोठियार के घोड़साही में कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन के द्वारा वन विभाग के सहयोग से आमसभा का आयोजन किया गया. इसमें ग्रामीणों ने गांव की समस्या को रखा. ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पहली जरूरत सड़क की है. यहां सड़क बन जाती है तो कई सारी […]

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सतगावां : प्रखंड के सुदूरवर्ती नक्सल प्रभावित पंचायत कोठियार के घोड़साही में कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन के द्वारा वन विभाग के सहयोग से आमसभा का आयोजन किया गया. इसमें ग्रामीणों ने गांव की समस्या को रखा. ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पहली जरूरत सड़क की है. यहां सड़क बन जाती है तो कई सारी समस्याओं का समाधान हो सकता है.

इसके अलावा ग्रामीणों ने गांव में चेकडैम निर्माण की मांग रखी. इस पर वन विभाग के अधिकारी सुरेंद्र कुमार ने कहा कि जल्द ही सड़क के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया पूरी की जायेगी, क्योंकि वन क्षेत्र में होने के कारण ही सड़क नहीं बन पा रही है.

चेकडैम निर्माण को लेकर भी उन्होंने प्रस्ताव बना कर विभाग को भेजने की बात कही. ग्रामीणों ने यह भी बताया कि बच्चियों की आगे की पढ़ाई के लिए कस्तूरबा गांधी विद्यालय में नामांकन के लिए फाउंडेशन के प्रयास से सूची शिक्षा विभाग व उपायुक्त कार्यालय में दी गयी, पर कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला है. ग्रामीणों ने कहा कि यदि सरकारी विभाग से मदद नहीं मिलती है तो लोग श्रमदान कर भी सड़क बनाने को तैयार हैं. ग्रामीणों ने बताया कि यदि गांव में कोई बीमार पड़ जाता है तो खटिया पर लाद कर प्रखंड मुख्यालय ले जाना पड़ता है.

निर्णय लिया गया कि जल्द ही सड़क निर्माण किया जायेगा. आम सभा में कुलेश्वर राय, घोघल राय, तेतरी देवी, मुखिया प्रतिनिधि दुर्गा सिंह, रोहन कुमार के अलावा सत्यार्थी फाउंडेशन के गोविंद खनाल, हेमांक चौबे, उदय राय, श्रीराम, विक्कू, अनिल, अजय आदि मौजूद थे. ज्ञात हो कि यह गांव आज भी विकास से कोसों दूर है. यहां मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है.

यहां पहुंचने के लिए घोडाकरण गांव से पांच किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है.पहाड़ के बीच से पगडंडी से यहां पहुंचा जा सकता है. यहां के ग्रामीण अभावों में अपना जीवन व्यतीत करने के लिए मजबूर हैं. लोगों को पीने के पानी के लिए एक कुआं है जो लगभग सूख चुका है, एक चापाकल है, लेकिन उसमें आयरन की मात्रा ज्यादा होने से लाल पानी निकलता है जो पीने योग्य नहीं है. एक प्राथमिक स्कूल है, इसके आगे की पढ़ाई के लिए बच्चों के पास कोई विकल्प नहीं है.

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