हड़ताली मजदूरों से मिले जनप्रतिनिधि

Updated at : 04 Jul 2018 4:35 AM (IST)
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हड़ताली मजदूरों से मिले जनप्रतिनिधि

जयनगर : केटीपीएस बांझेडीह में मेंटनेंस का काम कर रही एसबीएम कंपनी के मजदूर विभिन्न मांगों को लेकर 27 जून से हड़ताल पर है. छठे दिन हड़ताल की अध्यक्षता दिनेश चौधरी ने की. मंगलवार को जिप अध्यक्ष शालिनी गुप्ता, जिप उपाध्यक्ष प्रतिनिधि श्रीकांत यादव, युवा विस्थापित नेता उमेश यादव धरना स्थल पर पहुंच मजदूरों से […]

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जयनगर : केटीपीएस बांझेडीह में मेंटनेंस का काम कर रही एसबीएम कंपनी के मजदूर विभिन्न मांगों को लेकर 27 जून से हड़ताल पर है. छठे दिन हड़ताल की अध्यक्षता दिनेश चौधरी ने की. मंगलवार को जिप अध्यक्ष शालिनी गुप्ता, जिप उपाध्यक्ष प्रतिनिधि श्रीकांत यादव, युवा विस्थापित नेता उमेश यादव धरना स्थल पर पहुंच मजदूरों से वस्तुस्थिति की जानकारी ली. मजदूरों की समस्याओं व मांगों को सुनने के बाद जिप अध्यक्ष शालिनी गुप्ता ने कहा कि मजदूरों की मांगे जायज है. प्रबंधन व कंपनी को वार्ता कर इस समस्या का हल निकालना चाहिए.

उन्होंने डीवीसी के मुख्य अभियंता सह परियोजना प्रमुख एमसी मिश्रा से बातचीत की.
धरना स्थल पर पहुंचे एचआर हेड मो इस्लाम ने जिप अध्यक्ष को बताया कि प्रबंधन ने एबीएम कंपनी को पत्र लिखा है. मगर कंपनी वार्ता के लिए नहीं आ रही है. इस पर शालिनी गुप्ता ने कहा कि यदि शीघ्र वार्ता नहीं हुई, तो अगले दिन से वह भी मजदूरों के साथ धरना पर बैठेगी. मजदूरों की मुख्य मांगों में डास्ट एलाउंस, लंच एलाउंस, एचआरए, बोनस, नाइट एलाउंस, इएल, सीएल, इएसआइसी आदि शामिल हैं. मौके पर राजकुमार साव, रामचंद्र राम, बीरेंद्र कुमार यादव, जितेंद्र मोदी, उपेंद्र कुमार यादव, क्यूम अंसारी, संजीव पांडेय, प्रभु यादव, अनिल यादव, नरेश चौधरी, चंदन यादव, मंटू यादव, महेश यादव, राजकुमार महतो, बीरेंद्र मोदी, सुशील राणा, रंजीत मंडल, महेश पासवान, अमर प्रसाद, पवन मोदी, कामदेव शर्मा, प्रकाश सिंह, जागेश्वर साव, संदीप सिंह, कामदेव साव, उमाशंकर पासवान, भोला पासवान, रामचंद्र पासवान, भुवनेश्वर दास, सिकंदर साव, उस्मान अंसारी, अनिल यादव, महेंद्र यादव मौजूद थे.
कंपनी मजदूरों की मांगों को पूरा करे
पूर्व विधायक अमित कुमार यादव ने मजदूरों की समस्या सुनने के बाद कहा कि उनकी मांगें जायज है. कंपनी मांगों को पूरा करें. छह दिन से मजदूर हड़ताल पर है और प्रबंधन अथवा कंपनी द्वारा मामला सुलझाने का कोई प्रयास नहीं करना दुर्भाग्यपूर्ण है. इससे साबित होता है कि कंपनी प्रबंधन के इशारे पर मजदूर हितों की उपेक्षा कर रही है. हालांकि देर शाम को उनके नेतृत्व में प्रबंधन से वार्ता हुई. मगर मांगों पर सहमति नहीं बनने के कारण वार्ता विफल रही.
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