रनिया के कटहल की मांग देश के कई राज्यों में

Updated at : 24 Mar 2026 6:52 PM (IST)
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रनिया के कटहल की मांग देश के कई राज्यों में

रनिया प्रखंड कटहल उत्पादन और निर्यात के मामले में वर्षों से अपनी अलग पहचान कायम रखी है.

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रनिया. रनिया प्रखंड कटहल उत्पादन और निर्यात के मामले में वर्षों से अपनी अलग पहचान कायम रखी है. यहां से हर साल फरवरी-मार्च से लेकर जून-जुलाई तक देश के विभिन्न राज्यों में बड़े पैमाने पर कटहल की आपूर्ति की जाती है. जिससे स्थानीय किसानों को अच्छी आमदनी होती है. रनिया प्रखंड के सौदे, कैनबाकी, लोहगढ़, जयपुर, बरजो, बनई, कोड़ाकेल, मार्चा, बिश्रामपुर, नवांटोली, उड़ीकेल सहित अन्य गांवों में उन्नत किस्म के कटहल की पैदावार होती है. जिसे किसान साप्ताहिक बाजार जैसे रनिया, सौदे, टांगरकेला और लोहागरा में कटहल लेकर पहुंचते हैं. जहां थोक व्यापारी उनसे खरीदारी कर अन्य राज्यों के व्यापारियों को बेचते हैं. यहां के कटहल की गुणवत्ता और स्वाद बेहतर होने के कारण दूसरे राज्यों में इसकी खास मांग रहती है. इस वर्ष भी क्षेत्र में कटहल की अच्छी पैदावार हुई है. कटहल का मूल्य उसकी गुणवत्ता और आकार के आधार पर तय होता है. छोटे आकार का कटहल पहले 100 रुपये प्रति किलो तक बिकता है, जबकि बड़े आकार के एक कटहल का वजन पांच से दस किलो तक हो जाता है. उसी अनुसार उसकी कीमत तय होती है. दूसरे राज्यों के व्यापारी भी सीधे गांवों में पहुंचकर किसानों से संपर्क करते हैं और कई बार पेड़ ही खरीद लेते हैं. इसके बाद कटहल को तोड़कर थोक व्यापारियों के माध्यम से उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार के गया, शेखपुरा, सासाराम, औरंगाबाद, लखीसराय, जहानाबाद, पटना सहित अन्य जिलों में भेजा जाता है. इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है.

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