मनरेगा की योजनाओं से आत्मनिर्भर मनोरमा टुटी
Published by : CHANDAN KUMAR Updated At : 16 May 2026 6:20 PM
मनोरमा टूटी कभी अभावों से घिरी एक साधारण ग्रामीण महिला थीं.
खूंटी. मुरहू प्रखंड के कुंजला पंचायत अंतर्गत ग्राम ईठे की रहने वाली मनोरमा टूटी कभी अभावों से घिरी एक साधारण ग्रामीण महिला थीं. पति आनंद पाहन के निधन के बाद उनके जीवन में कठिनाइयों का अंधेरा और गहरा गया था. गरीबी रेखा से नीचे के परिवार से होने के कारण घर चलाना भी चुनौती था. बच्चों की पढ़ाई तो मानो एक अधूरा सपना बन चुकी थी. इसी बीच गांव की ग्रामसभा में उन्हें मनरेगा महिला मेट के रूप में चुना गया. यह चयन उनके जीवन का निर्णायक मोड़ सिद्ध हुआ. प्रखंड प्रशासन और लीड्स संस्था द्वारा उन्हें नियमित प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और क्षमता वर्धन किया गया. उन्होंने अपने वर्षों से खाली पड़े बंजर खेत को हरियाली से भरने का संकल्प ली. परिवार और ग्रामीणों से चर्चा की और सामूहिक आम बागवानी की शुरुआत की. उनकी प्रेरणा से पांच किसानों ने मिलकर सात एकड़ भूमि में मनरेगा योजना के अंतर्गत आम बागवानी की. मनोरमा ने श्रम, धैर्य और दूर दृष्टि ने उस बंजर भूमि को फलते-फूलते बाग में बदल दिया. सात एकड़ भूमि में आम लहलहा रही है. आम और मौसमी सब्जियों की खेती से प्रतिवर्ष लगभग तीन से साढ़े तीन लाख रुपये तक की आय होती है. उसी भूमि पर मनरेगा से डोभा तथा भूमि संरक्षण विभाग द्वारा निर्मित तालाब में वे मछली पालन भी करती हैं. जिससे लगभग एक लाख रुपये अतिरिक्त आय प्राप्त होती है. अब मनोरमा के मार्गदर्शन और प्रेरणा से गांव में 70 एकड़ में बिरसा मुंडा आम बागवानी विकसित हुई है. वहीं 41 तालाबों में मछली पालन आरंभ हुआ और 38 परिवारों ने बकरी पालन को आय का साधन बनाया. एक समय जो महिला जीवन की कठिनाइयों से जूझ रही थी, वही आज अपने गांव और पंचायत की प्रेरणादायी महिला बन गयी है.
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