समस्या नहीं सुलझी तो बंद हो सकता है पिपरवार खदान

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 May 2019 1:26 AM

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पिपरवार : अत्याधुनिक मशीनों से सुसज्जित वाइट इंडस्ट्रीज द्वारा शुरू की गयी पिपरवार की महत्वकांक्षी परियोजना बदहाल स्थिति में पहुंच गया है. कोयला उत्पादन में सीसीएल में सर्वाधिक योगदान देनेवाली पिपरवार बंदी के कगार पर आ गया है. स्थिति यह है कि प्रतिदिन 60 से 70 हजार टन कोयला उत्पादन करनेवाली परियोजना खदान वर्तमान में […]

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पिपरवार : अत्याधुनिक मशीनों से सुसज्जित वाइट इंडस्ट्रीज द्वारा शुरू की गयी पिपरवार की महत्वकांक्षी परियोजना बदहाल स्थिति में पहुंच गया है. कोयला उत्पादन में सीसीएल में सर्वाधिक योगदान देनेवाली पिपरवार बंदी के कगार पर आ गया है.

स्थिति यह है कि प्रतिदिन 60 से 70 हजार टन कोयला उत्पादन करनेवाली परियोजना खदान वर्तमान में पिपरवार पीओ एके त्यागी के अनुसार मुश्किल से मात्र दो-तीन हजार टन कोयला उत्पादन कर पा रहा है. पीओ ने बताया कि मुख्य समस्या विजैन गांव खाली कराने की है. प्रबंधन इसके लिए प्रयासरत भी है. उक्त गांव में लगभग 250 मकान हैं.
अधिकांश लोगों को जमीन के एवज में नौकरी-मुआवजा दी जा चुकी है. फिर भी मकानों के मुआवजा को लेकर रैयतों व प्रबंधन के बीच जिच कायम है. हाल ही में जिन 13 लोगों को मकान का मुआवजा मिल चुका है, वे भी मकान खाली करने में आनाकानी कर रहे हैं. इसके पीछे की मंशा प्रबंधन के समझ के परे है. मकान खाली नहीं होना ही खदान विस्तारीकरण में बाधक बना हुआ है. इस दिशा में प्रबंधन का प्रयास अब तक नाकाफी साबित हुआ है.
यही कारण है कि परियोजना खदान से कोयले के उत्पादन के लिए फेस नहीं मिल पा रहा है. यदि इस दिशा में त्वरित कार्रवाई नहीं हुई तो पिपरवार खदान कभी भी बंद हो सकता है. पिपरवार वाशरी पिपरवार परियोजना खदान पर ही आश्रित है. वर्तमान समस्या को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अशोक परियोजना से कोयला मंगा कर वाशरी को दिया जा रहा है, जो अस्थाई समाधान है.
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