खूंटी की महिला किसान ने किया कमाल, उगाया लाखों में बिकने वाला मियाजाकी आम

महिला किसान सिलप्रिया टोपनो ने जापान के महंगे मियाजाकी आम की सफल खेती कर नई पहचान बनाई
Success Story : खूंटी की महिला किसान सिलप्रिया टोपनो ने जापान के महंगे मियाजाकी आम की सफल खेती कर नई पहचान बनाई है. विदेशी आम के पेड़ों में फल आने के बाद उनका बगीचा लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
खूंटी से भूषण कांसी की रिपोर्ट
Success Story : झारखंड के खूंटी जिले के तोरपा प्रखंड के मरचा मिशन गांव की प्रगतिशील महिला किसान सिलप्रिया टोपनो इन दिनों पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई हैं. आदिवासी महिला किसान ने अपनी मेहनत और लगन से जापान के प्रसिद्ध और दुनिया के सबसे महंगे आमों में शामिल मियाजाकी आम की सफल खेती कर नई मिसाल पेश की है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस आम की कीमत 1.5 लाख से 2 लाख रुपये प्रति किलो तक बताई जाती है.
विदेशी आम के पेड़ों में आए फल
सिलप्रिया टोपनो ने अपने बारी में मियाजाकी आम के तीन और अमेरिका रेड पाल्मर आम के सात पेड़ के साथ दर्जन अच्छे नस्ल के आम लगाए हैं. वर्ष 2022 में उन्होंने कोलकाता से ऑनलाइन इन विदेशी प्रजाति के पौधे मंगवाए थे. लगातार 4 वर्षों तक देखभाल और मेहनत के बाद अब पेड़ों में फल आने शुरू हो गए हैं. पेड़ पर लगे लाल रंग के आकर्षक और बड़े आकार के आम लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि कई फलों का वजन एक किलो से अधिक है.
विदेशी आम से अच्छी कमाई की उम्मीद
विदेशी नस्ल के आमों की खेती से महिला किसान को अच्छी कमाई की उम्मीद है. हालांकि, आमों की बढ़ती चर्चा के साथ उनकी चिंता भी बढ़ गई है. लाखों रुपये कीमत वाले आम की चोरी का डर सताने लगा है. इसके कारण सिलप्रिया रातभर बगीचे की रखवाली कर रही हैं. पेड़ों के चारों ओर बांस और तार की घेराबंदी भी कर दी गई है. गांव के लोग भी इस दुर्लभ आम को देखने के लिए दूर दराज उनके बगीचे पहुंच रहे हैं.
मियाजाकी आम की हुई हजार रुपये किलो बिक्री
महिला किसान सिलप्रिया टोपनो ने बताया कि पिछले वर्ष पहली बार वह मियाजाकी आम को लेकर रांची गई थीं, जहां 1 हजार रुपये प्रति किलो की दर से इसकी बिक्री हुई थी. उन्होंने कहा कि इस बार फसल अच्छी हुई है, लेकिन गांव क्षेत्र में इतने महंगे आम खरीदने वाले ग्राहक नहीं मिल पा रहे हैं. यदि सरकार और उद्यानिकी विभाग सहयोग करे तथा उचित मार्केटिंग और निर्यात की व्यवस्था बने, तो क्षेत्र के किसान भी विदेशी आम की खेती से अच्छी आमदनी कर सकते हैं.
क्या बोलीं सिलप्रिया टोपनो ?
चार साल पहले ऑनलाइन पौधा मंगाकर लगाया था. लगातार मेहनत और देखभाल के बाद अब फल मिलने लगे हैं. इस आम की मांग काफी है, लेकिन गांव में बाजार नहीं मिलने से परेशानी हो रही है. अगर सरकार मदद करे, तो यहां के किसान भी विदेशी आम की खेती कर आगे बढ़ सकते हैं.
पोषक तत्वों से भरपूर है मियाजाकी आम
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ आनंद किशोर उरांव ने बताया कि जापान में उगाया जाने वाला मियाजाकी आम अपनी अनोखी गुणवत्ता और पोषक तत्वों के कारण पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. इसमें एंथोसायनिन, बीटा-कैरोटीन, विटामिन ए, विटामिन सी, फोलिक एसिड और पोटेशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है. यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, त्वचा को स्वस्थ रखने, आंखों की रोशनी बेहतर करने, दिल को स्वस्थ रखने तथा पाचन तंत्र को मजबूत करने में सहायक माना जाता है.
महिला किसान बनी प्रेरणा
मरचा मिशन गांव की यह महिला किसान अब पूरे जिले में खेती-किसानी के क्षेत्र में प्रेरणा बनकर उभर रही हैं. विदेशी आम की खेती ने न केवल उन्हें नई पहचान दिलाई है, बल्कि जिले के किसानों के लिए आधुनिक और लाभकारी खेती की नई राह भी खोल दी है.
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लेखक के बारे में
By प्रिया गुप्ता
प्रिया गुप्ता पिछले एक साल से प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. फिलहाल वह झारखंड से जुड़ी खबरों पर काम करती हैं, जिनमें सरकारी योजनाएं, प्रमुख घटनाएं, सामाजिक मुद्दे और अन्य महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं. इससे पहले वह लाइफस्टाइल डेस्क पर फैशन, हेल्थ, रिलेशनशिप, पैरेंटिंग और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं. प्रिया ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से स्नातक और अमिटी यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री हासिल की है.
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